क्‍या PM केयर्स फंड का पैसा NDRF में ट्रांसफर हो, सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

SC ने वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे को PM केयर्स फंड और NDRF को लेकर लिखित जवाब दाखिल करने की इजाज़त दी है.मामले में SC ने केंद्र की ओर से पेश SG से भी 3 दिन में लिखित नोट दाखिल करने को कहा है.

क्‍या PM केयर्स फंड का पैसा NDRF में ट्रांसफर हो, सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला

PM केयर्स फंड को NDRF में ट्रांसफर करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है

नई दिल्ली:

PM केयर्स फंड को NDRF में ट्रांसफर करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  ने फैसला सुरक्षित रखा है. SC ने वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे को PM केयर्स फंड और NDRF को लेकर लिखित जवाब दाखिल करने की इजाज़त दी है.मामले में SC ने केंद्र की ओर से पेश SG से भी 3 दिन में लिखित नोट दाखिल करने को है. प्रवासी मजदूरों (Migrant labour Issue) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. जस्टिस भूषण ने कहा कि केंद्र सरकार को PM केयर फण्ड (PM CARES Fund) को NDRF (National Disaster Response Fund) में ट्रांसफर किया जा सकता है या नहीं, इस पर स्पष्ट जवाब दाखिल करना चाहिए.

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) की ओर से वकील प्रशांत भूषण द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में, केंद्र ने हलफनामे में कहा है  कि NDRF, जैसा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 ( DMA) की धारा 46 के तहत निर्धारित है, इसमें बिना किसी निजी योगदान के केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए गए बजटीय प्रावधानों के रूप में धनराशि शामिल है. दूसरी ओर पीएम केयर्स फंड  एक ऐसा फंड है जो स्वैच्छिक दान को अच्छी तरह से स्वीकार करता है. यहां कई फंड हैं जो या तो पहले स्थापित किए गए हैं या अब विभिन्न राहत कार्यों को करने के लिए बनाए गए हैं. पीएम केयर्स एक ऐसा फंड है जो स्वैच्छिक दान के साथ है.DMA की धारा 46 के तहत निर्धारित फंड मौजूद है जिसे NDRF कहा जाता है.हलफनामे में कहा गया है कि वैधानिक निधि का अस्तित्व केवल पीएम केयर्स फंड की तरह अलग फंड के निर्माण पर रोक नहीं लगाएगा जो स्वैच्छिक दान की व्यवस्था प्रदान करता है.

राजस्थान के स्पीकर ने बागी विधायकों के खिलाफ SC में दायर याचिका वापस ली

SG तुषार मेहता ने कहा कि हम अलग से जैविक आपदा योजना का प्रबंधन करते हैं क्योंकि हम यह समझ नहीं सकते कि पहले से हमें क्या जैविक आपदा आ जाएगी. SG ने कहा कि जैसे ही हम कोरोना के बारे में सीखा है, हमारे पास एक कोरोना की महत्वाकांक्षा योजना है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पहला मुद्दा खाद्य सुरक्षा का है और यदि SG इस पर गौर करेंगे तो इसका हल निकल जाएगा. केंद्र द्वारा प्रस्तुतियां इसके लिए वास्तविक संवितरण या आंकड़ों को उजागर नहीं करती हैं, इसके बाद स्वास्थ्य बीमा आता है और यह किसी भी रूप में उपलब्ध नहीं है. पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होने के बाद 1.5 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को बाहर रखा गया है, यह प्रक्रिया मजदूरों को लाभदायक योजनाओं से वंचित रखने के लिए विवश कर रही है. सुनवाई के दौरान दुष्यंत दवे ने कहा कि NDRF के खातों को CAG ऑडिट करता है लेकिन PM केयर्स के लिए निजी ऑडिटर है. उन्‍होंने कहा यह मुद्दा खिलाफ नहीं है सरकार को एक और विस्तृत हलफनामा दर्ज करने का निर्देश दिया जाना चाहिए.SG ने कहा कि पीएम केयर्स एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, यहां सिर्फ स्वैच्छिक दान करते हैं.

हैदराबाद एनकाउंटर : मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को छह महीने का और वक्त दिया

इससे पहले, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि एक करोड़ से ज़्यादा प्रवासी मज़दूरों को शिफ्ट किया गया है. अब सवाल राज्य सरकारों की स्कीम का है और राज्य किस तरह प्रवासी मज़दूरों की मदद करते है
. SG ने यह भी कहा कि अब प्रवासी मज़दूरों के लिए किसी स्पेशल ट्रेन की ज़रूरत नही है, अब रेगुलर ट्रेन ही चल रही हैं. उन्‍होंने कहा कि प्रवासी मज़दूरों के लिए एक यूनिफार्म प्लान नही है, जो स्कीम मुंबई में काम करेगी वह कर्नाटक में काम नहीं करेगी. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि एक समय था जब केंद्र सरकार की ओर से ₹1 भेजा जाता था और जनता के पास 15 पैसे पहुंचते थे जबकि आज ₹1 भेजा जाता है और पूरे 1 रुपए जरूरतमंद के पास पहुंचते हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने विरोध करते हुए कहा कि सॉलिसिटर जनरल इस मसले पर कोर्ट में राजनीति कर रहे हैं. 

मामले में वरिष्‍ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि देश मे प्रवासी मज़दूरों के लिए एक नेशनल प्लान, राज्य योजना और जिला योजना की ज़रूरत है, जहां आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि प्रवासी मज़दूरों के लिए भोजन, आवास, आवास सुविधाओं के लिए न्यूनतम मानदंड क्या है?कुछ नहीं है. इसका सामान्य दिशानिर्देशों से कोई लेना देना नहीं है. उन्‍होंने कहा कि शौचालय या पानी की गुणवत्ता की संख्या का तो न्यूनतम स्तर भी नहीं है. इसके जवाब में SG तुषार मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय योजना 2019 में बनाई गई थी, इसमें COVID19 नहीं है लेकिन कोरोना एक जैविक आपदा है, हमारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना भी है.

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

वोडाफोन-आइडिया कंपनी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत