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'अगर उद्धव ठाकरे आकर आपसे हाथ मिला लें तो?' कुछ ऐसा था राज ठाकरे का जवाब

राज ठाकरे लगातार यह दोहराते रहे हैं कि महाराष्ट्र में उनकी लड़ाई सिर्फ कांग्रेस और एनसीपी से है, शिवसेना से नहीं.

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खास बातें

  1. उद्धव के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे राज ठाकरे
  2. मतभेद के बाद परिवार से अलग हो गए थे राज ठाकरे
  3. हालांकि वे कहते रहे हैं कि उनकी लड़ाई शिवसेना से नहीं है
नई दिल्ली :

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. शपथ ग्रहण समारोह में उनके चचेरे भाई राज ठाकरे (Raj Thackeray) भी शिरकत करेंगे. उद्धव ने उन्हें खुद आमंत्रित किया है. महाराष्ट्र में बने नए सियासी समीकरण के बीच उद्धव और राज ठाकरे के रिश्तों में जमी बर्फ भी पिघलती दिख रही है. हालांकि राज ठाकरे लगातार यह दोहराते रहे हैं कि महाराष्ट्र में उनकी लड़ाई सिर्फ कांग्रेस और एनसीपी से है, शिवसेना से नहीं. एनडीटीवी को साल 2014 में दिये एक इंटरव्यू में राज ठाकरे साफ-साफ कहते हैं कि 'मेरी शिवसेना से कोई लड़ाई नहीं है'. डॉ. प्रणव रॉय जब राज ठाकरे से पूछते हैं कि चुनाव में आपका मुख्य प्रतिद्वंदी कौन है? इस सवाल के जवाब में राज ठाकरे कहते हैं, ''कांग्रेस और एनसीपी''.

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यह पूछने पर कि शिवसेना प्रतिद्वंदी नहीं है, वे कहते हैं 'जी नहीं...बिल्कुल नहीं. ये एक परसेप्शन है. लोगों को लगता है कि मैं उम्मीदवार खड़े कर रहा हूं तो उनके खिलाफ खड़े कर रहा हूं, लेकिन ऐसा नहीं है.' राज ठाकरे (Raj Thackeray) से जब यह पूछा जाता है कि, 'मान लीजिये उद्धव ठाकरे यहां आ जाएं और आपसे हाथ मिला लें तो आप क्या कहेंगे?' इस पर राज ठाकरे कहते हैं 'कैसे हो...' वे आगे कहते हैं, 'पारिवारिक संबंध में कोई बात आती ही नहीं है. अगर प्रॉब्लम हो सकते हैं तो वे राजनीति के हो सकते हैं...चुनाव के हो सकते हैं...अन्यथा इसकी कोई जरूरत नहीं है. राज ठाकरे साफ-साफ कहते हैं कि उद्धव से 'राजनीतिक मतभेद है, व्यक्तिगत नहीं. न ही कोई प्रॉपर्टी का मामला है और न ही कोई और. जब मैं निकला था तो अकेले निकला था.' 

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वे आगे कहते हैं,  'मैंने कोई चीज नहीं मागी थी. बहुत बार ऐसा होता कि सीट नहीं चुनकर आती है तो उनको (उद्धव को) लगता है कि वोट बंटा है, लेकिन जब उनकी सीट चुनकर आती है तब उन्हें ऐसा नहीं लगता है'. राज ठाकरे (Raj Thackeray) से यह पूछने पर कि 'क्या कभी वे और उद्धव साथ आएंगे?' वे कहते हैं, 'इफ एंड बट में कोई जवाब नहीं हो सकता है. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन राजनीतिक डिफरेंस जो हैं, उनका कुछ नहीं हो सकता है. हर आदमी का अपना स्वभाव होता. उसके हिसाब से काम करता है.' 



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