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नान घोटाले के आरोपी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, कोर्ट में दायर किया शपथपत्र

छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम 'नान' में हुए कथित घोटाले के आरोपी शिवशंकर भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.

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नान घोटाले के आरोपी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, कोर्ट में दायर किया शपथपत्र

पूर्व सीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप

खास बातें

  1. छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप
  2. नान घोटाले के आरोपी ने सीएम पर लगाया आरोप
  3. नान घोटाले के आरोपी ने कोर्ट में दायर किया शपथपत्र
नई दिल्ली:

छत्तीसगढ़ में नागरिक आपूर्ति निगम 'नान' में हुए कथित घोटाले के आरोपी शिवशंकर भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य लोगों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. रायपुर स्थित नागरिक आपूर्ति निगम के मुख्यालय में प्रबंधक पद पर रहे भट्ट ने गुरूवार को स्थानीय अदालत में शपथपत्र दायर किया. शपथ पत्र में भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व खाद्य मंत्री पुन्नू लाल मोहले, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लीलाराम भोजवानी और अन्य लोगों पर करोड़ों रूपए का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. 

भट्ट ने शपथपत्र में कहा है कि वह अप्रैल 2001 से नान मुख्यालय रायपुर में प्रबंधक के पद पर कार्यरत था. खरीफ विपणन वर्ष 2011-12, 2012-13 और 2013-14 के दौरान धान की कस्टम मिलिंग की गई थी और वर्ष 2014-15 में भी धान की कस्टम मिलिंग की गई थी.

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उसने कहा है कि वर्ष 2014 में अगस्त माह में नान के पास नौलाख मीट्रिक टन चावल का स्टाक था, इसके बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रमन सिंह ने विभाग के अधिकारियों पर दबाव डालकर 10 लाख मीट्रिक टन चावल का अतिरिक्त उपार्जन करने का आदेश दिया था.

भट्ट ने आरोप लगाया है कि रमन सिंह ने पद का इस्तेमाल करते हुए 238 करोड़ रूपये की क्षतिपूर्ति की गारंटी बिना कैबिनेट के अनुमोदन के स्वतः प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आदेश जारी कर दिया था. उन्होंने सभी अधिकारियों को आपत्ति करने से मना किया था तथा पैसों का लालच दिया था. 

पूर्व अधिकारी ने कहा है कि रमन सिंह ने चुनावी खर्च के लिए फंड एकत्र करने के लिए ऐसा किया था. भट्ट ने आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार करने के लिए वर्ष 2013 में 21 लाख फर्जी राशन कार्ड बनाए गए थे. इसके लिए रमन सिंह, पुन्नूलाल मोहले और लीलाराम भोजवानी ने अधिकारियों पर दबाव डाला था. फर्जी राशन कार्ड से लगभग तीन वर्षों तक चावल, चना दाल, नमक, मिट्टी तेल, गैस और खाद्यपदार्थ संबंधी गड़बड़ी बड़े स्तर पर की गई जो आगे भी जारी रहा.

उसने कहा है कि फर्जी राशन कार्ड के माध्यम से वर्ष 2013-14 में प्रतिमाह लगभग 266 करोड़ रुपये के खाद्यान्न, शक्कर, चना, दाल, नमक, मिट्टी तेल व गैस का वितरण कराकर शासन को वर्षभर में लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाई गई और यह क्षति आगे के वर्षों में भी जारी रही.

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भट्ट ने कहा है कि पूर्व मुख्यंत्री ने 2014—15 में 12 लाख राशनकार्डों को निरस्त करने की घोषणा की थी लेकिन मई, 2014 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए इन राशन कार्डों को निरस्त नहीं किया गया तथा कई महीनों तक इन राशन कार्ड से खाद्यान्नों को लेकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई.

उसने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ(मार्केटिंग फेडरेशन) के धान उपार्जन और कस्टम मिलिंग के लिए वर्ष 2003-04 से वर्ष 2014-15 तक लगभग 10 हजार करोड़ रूपये की अग्रिम सब्सिडी स्वीकृत कर दी गई. इसमें सहकारी विपणन संघ के तत्कालीन अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता भी शामिल थे.

वहीं, राज्य में राइस मिलर्स को भी फायदा पहुंचाया गया. भट्ट ने शपथ पत्र में आरोप लगाया है कि चुनावी फंड के लिए करोड़ों रूपए का लेन-देन किया गया. इस दौरान उन्होंने भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी कौशलेंद्र सिंह और अन्य लोगों पर भी भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया है. साथ ही उन्होंने रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह को भी पैसे पहुंचाने का आरोप लगाया है.

उसने कहा है कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है. वहीं 12 फरवरी, 2015 को छापा मारकर एक करोड़ 62 लाख रूपये की फर्जी जब्ती बनायी गई. जो पैसे जब्त बताए गए हैं, वे अधिकारी कौशलेन्द्र सिंह और चिंतामणि चन्द्राकर के हैं. इस कारण उसे 'भट्ट' चार से पांच साल जेल में रहना पड़ा. 

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भट्ट ने कहा है कि उसके ऊपर की गई गलत कार्यवाही के कारण उसका जीवन बरबाद हो गया है और दूर-दूर तक उसे न्याय की गुंजाइश कम ही नजर आती है. उसने अदालत से न्याय दिलाने की अपील की है. इधर, इन आरोपों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि षड़यंत्र के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है. 

नान प्रकरण में मूल अपराधियों को बचाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आज संवाददाताओं से कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम का प्रकरण न्यायालय में है. इस मामले में जितने भी गवाह हैं, सभी गवाह पहले ही इस मामले में अपना बयान दर्ज करा चुके हैं. उस समय उनके बयान क्या थे? यह न्यायालय के समक्ष है. उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद इस प्रकरण से जुड़े गवाह अपने बयान बदल रहे हैं. ये सभी गवाह अपने बयान क्यों बदल रहे हैं? 
यह राज्य की जनता को सब कुछ समझ आ रहा है, मुझे भी यह समझ आ रहा है और न्यायालय को भी समझ आ रहा है. गवाहों के पहले के और आज के बयान को देखना न्यायालय का काम है. 

रमन सिंह ने कहा है कि इस मामले में शिवशंकर भट्ट का 164 के तहत बयान दर्ज नहीं किया गया, इसलिए उससे शपथपत्र लेकर इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, क्योंकि न्यायालय में इस मामले का अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत हो चुका है और विचार जारी है. आगे जो भी कार्यवाही होगी, न्यायालय में होगी. मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने नागरिक आपूर्ति निगम के दफ्तरों में छापा मारा था.

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इस दौरान ब्यूरो ने भारी मात्रा में नकदी और एक डायरी बरामद की थी. डायरी में कुछ रसूखदार लोगों का नाम था. बाद में इस मामले में ब्यूरो ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा और प्रबंधक शिवशंकर भट्ट समेत 18 लोगों को आरोपी बनाया था.

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अधिकारियों के मुताबिक राज्य में वर्ष 2018 में नई सरकार के गठन के बाद आरोपी अधिकारी अनिल टुटेजा ने राज्य सरकार से इस मामले में जांच की मांग की थी. उनकी मांगों को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से अभिमत मांगा था जिसके आधार पर राज्य सरकार ने इस मामले की एसआईटी से जांच कराने का फैसला किया है.

 



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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