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मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया दो महिलाओं का जिक्र, जानिए उनके बारे में

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना को लेफ्टिनेंट स्वाति और निधि के रूप में दो वीरांगनाएं मिली हैं और वे असामान्य वीरांगनाएं हैं.

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मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया दो महिलाओं का जिक्र, जानिए उनके बारे में

लेफ्टिनेंट महाडिक और ले. दुबे

खास बातें

  1. मन की बात में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया जिक्र
  2. दोनों महिलाएं सेना में अफसर
  3. दोनों के पति हो गए देश सेवा में हुए शहीद
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 36वें रेडियो पर मन की बात में दो वीर महिलाओं का जिक्र किया जिनके पति देश के लिए आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए. इसके बावजूद इन महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि पति के अधूरे सपने को पूरा करने के लिए सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर शामिल हुईं. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना को लेफ्टिनेंट स्वाति और निधि के रूप में दो वीरांगनाएं मिली हैं और वे असामान्य वीरांगनाएं हैं. असामान्य इसलिए हैं कि उनके पति मां-भारती की सेवा करते-करते शहीद हो गए थे. हम कल्पना कर सकते हैं कि इस छोटी आयु में जब संसार उजड़ जाये तो मन:स्थिति कैसे होगी? लेकिन शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक ने इस कठिन परिस्थितियों का मुक़ाबला करते हुए आगे बढ़ने की ठानी और वह भारतीय सेना में भर्ती हो गईं. 11 महीने तक उसने कड़ी मेहनत करके प्रशिक्षण हासिल किया और अपने पति के सपनों को पूरा करने के लिए उसने अपनी ज़िन्दगी झोंक दी. 

उसी प्रकार से निधि दुबे, उनके पति मुकेश दुबे सेना में नायक के पद पर तैनात थे और मातृ-भूमि के लिए शहीद हो गए तो उनकी पत्नी निधि ने मन में देश सेवा करने की ठानी और वे भी सेना में भर्ती हो गईं. हर देशवासी को हमारी इस मातृ-शक्ति पर, हमारी इन वीरांगनाओं के प्रति आदर होना बहुत स्वाभाविक है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं इन दोनों बहनों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं. उन्होंने देश के कोटि-कोटि जनों के लिए एक नई प्रेरणा, एक नई चेतना जगाई है. उन दोनों बहनों को बहुत-बहुत बधाई. 

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ये दोनों महिलायें हाल ही में 11 महीनें का कठिन परिश्रम के बाद सेना में शामिल हुई हैं. लेफ्टिनेंट स्वाति महादिक के पति कर्नल संतोष महादिक कुपवड़ा के लाइन ऑफ कंट्रोल पर दो साल पहले आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे. कर्नल महादिक अपने पीछे बेटा स्वराज और बेटी कार्तिकी को छोड़ गए. स्वाति को जब लगा कि रोने-धोने से काम नहीं चलेगा बल्कि उसे पति की यादों को जिंदा रखने के लिए सेना की यूनिफार्म पहनना होगा लेकिन इसमें उम्र आड़े आ रही थी.  
सेना में अफ़सर बनने की अधिकतम आयु 27 साल होती है जबकि स्वाति की उम्र दस साल ज़्यादा यानी 37 साल की थी. पर नियति को कुछ और मंजूर था. रक्षा मंत्री की पहल पर सेना ने आयु सीमा में रियायत दी गई. इसके बावजूद स्वाति ने एसएसबी परीक्षा पास की. इसी महीने चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में स्वाति भी सेना में लेफ्टिनेंट बन गई. 

ऐसे ही 29 साल की निधि दुबे के पति मुकेश कुमार सेना में नायक थे. मुकेश की मौत के समय निधि गर्भवती थी. पति को दिल का दौरा पड़ने पर ससुराल वाले ने उसे बेसहारा छोड़ दिया था. लेकिन निधि ने हार नहीं मानी. बस फिर क्या था निधि ने भी ठान लिया कि उसे  सेना में अफसर बनना है. जब एक बार ठान लिया तो फिर निधि के हौसले को कौन रोक सकता था. अपनी मेहनत और लगन के बल पर वो भी इसी महीने ओटीए यानि कि ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से अफसर बन गई है.
VIDEO: मन की बात में पीएम मोदी

यकीनन ये दोनों ऐसी प्रेरक महिलायें हैं जिन्होंने ये दिखाया है कि अपनी मेहनत और हौसले से किसी भी तरह के बाधा से पार पाया जा सकता है. इनसे कई सारी महिलाओं को कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलेगी.


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