क्या लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव जीत पाएंगे AAP के दिलीप पांडे?

दिलीप अण्‍णा आंदोलन के समय से ही अरविंद केजरीवाल से जुड़े रहे हैं. 2012 में जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो वे भी इस टीम में शामिल रहे थे.

क्या लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव जीत पाएंगे AAP के दिलीप पांडे?

आम आदमी पार्टी के नेता दिलीप पांडे (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

दिलीप पांडे (Dilip Pandey) आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) से इस बार तिमारपुर विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly election 202) लड़ रहे हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के उम्‍मीदवार सुरेंद्र सिंह बिट्टू और कांग्रेस की अमर लता सांगवान से है. दिलीप अण्‍णा आंदोलन के समय से ही अरविंद केजरीवाल से जुड़े रहे हैं. 2012 में जब आम आदमी पार्टी का गठन हुआ तो वे भी इस टीम में शामिल रहे थे. दिलीप एक अक्टूबर 1980 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के जमनिया तहसील में पैदा हुए. उनकी पत्नी का नाम प्रियंका पांडे है, उनके दो बच्चे भी हैं. साहित्य और लेखन में दिलचस्पी रखने वाले दिलीप की दो किताबें 'दहलीज़ पर दिल' पेंग्विन से और 'खुलती गिरहें' राजकमल प्रकाशन से छप चुकीं हैं.

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दिलीप ने अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उनका रुझान कंप्यूटर की तरफ हुआ तो राजीव गांधी टेक्नीकल यूनिवर्सिटी से 2005 में एमसीए (MCA) किया. कई सालों तक हांगकांग में एक आईटी कंपनी में नौकरी की. 2011 में वे नौकरी छोड़कर भारत आकर भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्‍णा आंदोलन में शामिल हो गए. यहीं से वे अरविंद केजरीवाल के संपर्क में आए और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) से जुड़े. वे अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर अपनी एक कंसल्टेंसी कंपनी भी चलाते हैं.

दिलीप को 2014 में आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई का संयोजक नियुक्त किया गया. उनके सफल निर्देशन में 2015 में आप ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की थी. 2017 के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि बाद वे फिर पार्टी में शामिल हो गए.

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