कांग्रेस छोड़ थामा था BJP का हाथ, फिर घर वापसी - अरविंदर सिंह लवली का सियासी सफर

अरविंदर सिंह का जन्म लुधियाना में 11 दिसंबर 1968 को हुआ. उनके पिता का नाम बलविंदर सिंह है. लवली ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है.

कांग्रेस छोड़ थामा था BJP का हाथ, फिर घर वापसी - अरविंदर सिंह लवली का सियासी सफर

गांधी नगर सीट से कांग्रेस उम्‍मीदवार अरविंदर सिंह लवली (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

अरविंदर सिंह लवली (Arvinder Singh lovely) एक युवा राजनेता हैं. शीला सरकार में वह वह तीन बार विधायक रहने के साथ-साथ मंत्री भी रह चुके हैं. इतना ही नहीं वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं. शीला दीक्षित की कैबिनेट में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने पब्लिक स्कूलों में कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण शुरू करने की पहल की थी. बीच में वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में भी शामिल हो गए थे. फिलहाल उनकी कांग्रेस में पुन: वापसी हो गई है और वे गांधी नगर से चुनाव मैदान में हैं. 1998 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पहली बार अरविंदर सिंह लवली गांधी नगर से ही चुनाव जीतकर विधानसभा में कदम रखे थे.

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अरविंदर सिंह का जन्म लुधियाना में 11 दिसंबर 1968 को हुआ. उनके पिता का नाम बलविंदर सिंह है. लवली ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया है. कॉलेज के दिनों में ही उनके राजनीतिक करियर की नींव पड़ी. 1987 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव का पद संभाला. बाद में उन्हें पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया.

1998 में पहली बार अरविंदर सिंह लवली (Arvinder Singh lovely) गांधीनगर सीट से दिल्ली विधानसभा पहुंचे. उस समय वे दिल्ली विधानसभा के सबसे युवा सदस्य थे. साल 2000 में उन्हें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति का महासचिव बनाया गया. 2003 और 2008 के विधानसभा चुनावों में भी बड़े अंतर से लवली ने जीत दर्ज की. 2003 में पहली बार उन्हें शीला दीक्षित के कैबिनेट में जगह मिली. 2013 विधानसभा चुनाव में उन्हें आम आदमी पार्टी के प्रकाश जारवाल के सामने हार का मुंह देखना पड़ा.

पर्यटन मंत्री के रूप में, लवली ने दिल्ली को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए कई पहल कीं. उन्होंने कुतुब महोत्सव, भक्ति महोत्सव, अनन्या महोत्सव, शरद उत्सव, उद्यान पर्यटन महोत्सव और मैंगो महोत्सव जैसे उत्सवों का आयोजन किया. लवली ने शिक्षा विभाग को भी संभाला. उन्हीं के समय में दिल्ली के अधिकांश स्कूलों का कम्यूटरीकरण किया गया. दिल्ली को सभी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करने वाला भारत का पहला राज्य बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है.

साल 2017 में दिल्ली में नगर निगम के चुनाव के वक्त अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी (BJP) का दामन थामकर सबको चौंका दिया था. इस दौरान उन्होंने बीजेपी के लिए इलाके में प्रचार कर वोट की अपील भी की थी. हालांकि करीब 10-12 महीने बाद वह वापस बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आ गए थे. 2019 के लोकसभा चुनावों में वे पूर्वी दिल्ली से चुनावी मैदान में हाथ आजमा चुके हैं.

Gandhi Nagar Assembly Seat - Delhi Assembly Elections 2020 - गांधी नगर विधानसभा सीट (Gandhi Nagar Assembly Seat) दिल्ली के पूर्वी क्षेत्र में है और पूर्वी दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (East Delhi Lok Sabha Constituency) का हिस्सा है.

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वर्ष 2015 के चुनाव में इस सीट पर आम आदमी पार्टी (AAP) के अनिल कुमार बाजपेयी ने जीत हासिल की थी, जबकि वर्ष 2013 और वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में इस सीट, यानी गांधी नगर (Gandhi Nagar Assembly Elections) सीट पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली ने जीत हासिल की थी.

चुनाव आयोग (Election Commission) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में कुल 1,46,92,136 मतदाता हैं, जो कुल 2,689 स्थानों पर स्थापित किए गए कुल 13,750 मतदान केंद्रों में अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे. दिल्ली में पुरुष मतदाताओं की तादाद 80,55,686 है, जबकि यहां कुल 66,35,635 महिला मतदाता हैं. राष्ट्रीय राजधानी में 815 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं, जबकि अप्रवासी भारतीय (NRI) मतदाताओं की संख्या 489 है. दिल्ली में सर्विस वोटरों (Service Voters) की कुल संख्या 11,556 है, जिनमें से 9,820 पुरुष मतदाता हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी में 55,823 मतदाता दिव्यांग श्रेणी के भी हैं.