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आर्थिक आधार पर आरक्षण पर RJD का यूटर्न: रघुवंश प्रसाद बोले- संसद में हमसे चूक हुई, हम सवर्ण आरक्षण के खिलाफ नहीं

आरजेडी ने संसद में ये कहते हुए आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण का विरोध किया था कि ये ओबीसी कोटे पर दिनदहाड़े डाका है.

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आर्थिक आधार पर आरक्षण पर RJD का यूटर्न: रघुवंश प्रसाद बोले- संसद में हमसे चूक हुई, हम सवर्ण आरक्षण के खिलाफ नहीं

आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह. (फाइल तस्वीर)

खास बातें

  1. RJD ने संसद में किया था विरोध
  2. अब कहा- हमसे चूक हुई, हम आरक्षण के खिलाफ नहीं
  3. 'हड़बड़ी में बिल पेश हुआ, विचार-विमर्श नहीं कर सके'
नई दिल्ली:

आर्थिक आधार पर आरक्षण (Quota For Economically Weak) के मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने यूटर्न मारा है. संसद में बिल पेश किए जाने के वक्त आरजेडी ने आर्थिक आधार पर आरक्षण के खिलाफ वोटिंग की थी. लेकिन अब आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) का कहना है कि संसद में हमसे चूक हुई है, हम सवर्ण आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं. आरजेडी ने संसद में ये कहते हुए आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण का विरोध किया था कि ये ओबीसी कोटे पर दिनदहाड़े डाका है. लेकिन आरजेडी उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह इस मसले पर पार्टी लाइन से अलग दिख रहे हैं. सिंह का कहना है कि इस मसले पर आरजेडी से संसद में चूक हो गई. इतनी हड़बड़ी में बिल पेश किया गया कि पार्टी में विचार-विमर्श नहीं हो सका. हमारी वोटिंग जल्दबाजी में हुई. 

साथ ही सिंह ने कहा आरजेडी को इस बिल पर अलग नहीं होना चाहिए था. हम सवर्ण आरक्षण के खिलाफ नहीं है, हमारे मेनीफ़ेस्टो में भी आरक्षण की बात है. हालांकि, रघुवंश प्रसाद ने आठ लाख तक की आमदनी की सीमा तय करने पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि  क्रीमी लेयर सबके लिए आठ लाख हो, जिसकी जितनी आबादी, उसके अनुपात में आरक्षण मिले.


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बता दें, राजद प्रमुख लालू प्रसाद के छोटे बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने 7 जनवरी को कहा था कि 15 फीसदी आबादी वाले को अगर दस प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है तो 85 प्रतिशत आबादी वाले अनुसूचित जाति जनजाति और समाज के अन्य पिछडे वर्ग को 90 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए. इस बीच बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने आशा जतायी है कि प्रदेश में नीतीश सरकार जल्द से जल्द आरक्षण की इस व्यवस्था को शुरू करेगी.

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बता दें, मोदी सरकार आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण देने बिल लेकर आई थी. बिल लोकसभा और राज्यसभा से दो ही दिनों में पास हो गया. हालांकि, बिल के समय को लेकर काफी सवाल उठे, लेकिन संसद के दोनों ही सदनों से बिल बहुमत के साथ नौ जनवरी को पास हुआ था, इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी आरक्षण देने संबंधी विशेष प्रावधान को मंजूरी दे दी थी. 

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इसके लिए संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के जरिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन किया गया है. इसके जरिए एक प्रावधान जोड़ा गया है जो राज्य को ‘नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर किसी तबके की तरक्की के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है.' यह ‘विशेष प्रावधान' निजी शैक्षणिक संस्थानों सहित शिक्षण संस्थानों, चाहे सरकार द्वारा सहायता प्राप्त हो या न हो, में उनके दाखिले से जुड़ा है. हालांकि यह प्रावधान अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर लागू नहीं होगा. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह आरक्षण मौजूदा आरक्षणों के अतिरिक्त होगा और हर श्रेणी में कुल सीटों की अधिकतम 10 फीसदी सीटों पर निर्भर होगा. 

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