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सियासत की चोटी से कैसे जेल की सलाखों तक पहुंचे पी चिदंबरम? पढ़ें- पूरा किस्सा

पूर्व वित्त मंत्री ने अपनी शुरुआती शिक्षा चेन्नई स्थित मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल से की है. उन्होंने चेन्नई से ही प्रेसिडेंसी कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली है.

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सियासत की चोटी से कैसे जेल की सलाखों तक पहुंचे पी चिदंबरम? पढ़ें- पूरा किस्सा

चिदंबरम (P Chidambaram) तमिलनाडु के छोटे से गांव के रहने वाले हैं.

खास बातें

  1. पी चिदंबरम को 19 सितंबर तक जेल भेजा गया
  2. आईएनएक्स मीडिया मामले विशेष कोर्ट ने भेजा जेल
  3. इस मामले में उनके बेटे कार्ती भी हैं आरोपी
नई दिल्ली:

आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 19 सितंबर तक के लिए जेल भेज दिया गया है. इससे पहले पी चिदंबरम (P Chidambaram) को सीबीआई (CBI) ने राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में पेश किया. उनके वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कोर्ट से कहा कि उनके मुवक्किल प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने सरेंडर के लिए तैयार हैं. कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके मुवक्किल को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए. कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा, 'जहां तक सीबीआई की बात है तो चिदंबरम को न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा जाना चाहिए? उन्होंने (सीबीआई) सभी सवाल पूछ लिए हैं. मेरे मुवक्किल ईडी की कस्टडी में जाना चाहते हैं. उन्हें न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.' 

कनाडुकथन के रहने वाले हैं पी चिदंबरम 
पी चिदंबरम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री रह चुके हैं. पी चिदंबरम का जन्म 16 सितंबर 1945 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव कनाडुकथन में हुआ था. उनका पूरा नाम पलानीअप्पन चिदंबरम है. पूर्व वित्त मंत्री ने अपनी शुरुआती शिक्षा चेन्नई स्थित मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल से की है. उन्होंने चेन्नई से ही प्रेसिडेंसी कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली है. जबकि बोस्टन के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट में उन्होंने अपनी मास्टर की डिग्री हासिल की है. बता दें कि पी चिदंबरम राजनीतिक के अलावा पेशे से वकील भी हैं. उन्होंने वर्ष 1972 में भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्यता ग्रहण की. जबकि वह 1984 में तमिलनाडु के शिवगंगा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव जीतने के साथ पी चिदंबरम सक्रिय राजनीति में आए. खास बात यह है कि इस सीट से वह छह बार चुनाव जीते हैं.


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पहली बार 1986 में बने थे मंत्री: 
पी चिदंबरम को पहली बार 1986 में मंत्री बनाया गया था. उस समय उन्हें लोक-शिकायत व पेंशन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद इसी साल उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा मंत्री का पदभार दिया गया. वर्ष 2004 में मनमोहन सरकार में उन्हें वित्त मंत्रालय का काम सौंपा गया. इस पद पर वह 2008 तक रहे. साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद उस समय गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफे के बाद पी चिदंबरम को ही गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. जबकि वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद एक बार फिर उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई. 

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बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम पर आरोप है कि वित्त मंत्री रहते विदेशी निवेश को मंज़ूरी दी गई. CBI ने इस मामले में उनके बेटे कार्ति को गिरफ़्तार किया था और फ़िलहाल ज़मानत पर है.कार्ति पर 2007 में आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दिलाने के लिए पैसे लेने का आरोप है. उस वक्त उनके पिता संप्रग सरकार में वित्तमंत्री थे. सीबीआई ने पिछले साल 15 मई को मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी. सीबीआई का आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी दिलाने में अनियमितताएं बरती गईं और 305 करोड़ रुपये विदेशी निवेश हासिल किया गया. सीबीआई ने शुरू में आरोप लगाया था कि एफआईपीबी मंजूरी को सुविधाजनक बनाने के लिए कार्ति को रिश्वत के रूप में 10 लाख रुपये मिले थे. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय मामले की जांच कर रही है. 

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