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क्‍या नीतीश कुमार से मित्रता की वजह से झारखंड के वरिष्‍ठ मंत्री सरयू राय को अमित शाह ने नहीं दिया टिकट?

पार्टी की चुनाव समिति की बैठक में अमित शाह ने उनके प्रति अपना विरोध खुल कर ज़ाहिर किया था. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे और शाह ने कहा कि राय ने अपनी एक पुस्तक का विमोचन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से करवाया था.

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क्‍या नीतीश कुमार से मित्रता की वजह से झारखंड के वरिष्‍ठ मंत्री सरयू राय को अमित शाह ने नहीं दिया टिकट?

खास बातें

  1. मुख्यमंत्री दास की आलोचना करते रहे हैं सरयू राय
  2. अमित शाह को उनकी नीतीश कुमार से दोस्ती नागवार गुज़री
  3. कैबिनेट की बैठकों में भी नहीं पहुंचते थे सरयू राय
रांची:

Jharkhand Assembly Election 2019: झारखंड की राजनीति में शनिवार शाम को तय हो गया कि अपने वरिष्ठ मंत्री सरयू राय (Saryu Rai) को भाजपा टिकट नहीं देगी. राय के टिकट पर सस्पेंस ख़ुद उन्होंने यह कह कर ख़त्म किया कि लगता है पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या से निपटने में इतना समय लग रहा है कि उन्हें जमशेदपुर पश्चिम से उम्मीदवार कौन हो तय करने का समय नहीं है. इसलिए वो अब अपने समर्थकों के साथ विचार कर मुख्यमंत्री रघुबर दास के ख़िलाफ़ मैदान में आ सकते हैं. लेकिन जानकारों का मानना है कि सरयू राय जिन्‍होंने अब तक दो-दो मुख्य मंत्रियों - लालू यादव और मधु कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को उजागर कर जेल भिजवाने में सक्रिय भूमिका निभायी थी, उनका टिकट कटना इस आधार पर तय था कि मुख्यमंत्री रघुबर दास (Raghubar Das) और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (Amith Shah) उन्हें नापसंद करते थे. इसका एक कारण राय द्वारा सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री दास की आलोचना करना भी रहा है और कैबिनेट की बैठकों में भी आना उन्होंने कमोबेश बंद कर दिया था.

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लेकिन पार्टी की चुनाव समिति की बैठक में अमित शाह ने उनके प्रति अपना विरोध खुल कर ज़ाहिर किया था. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे और शाह ने कहा कि राय ने अपनी एक पुस्तक का विमोचन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से करवाया था. हालांकि बिहार भाजपा के नेताओं का कहना है कि राय और नीतीश कुमार की मित्रता जगज़ाहिर है.

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लेकिन जब नीतीश कुमार ने पुस्‍तक विमोचन 2017 के दिसंबर महीने में किया था तब बिहार में एनडीए की सरकार बन गयी थी. हां, ये बात अलग है कि जब 2013 में नीतीश कुमार के साथ सम्बंध टूट गये थे और बिहार में बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी हमेशा चारा घोटाले में नीतीश कुमार को आरोपी बनाने की मांग करते थे, तब सरयू राय ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि नीतीश कुमार का चारा घोटाले में कोई लेना देना नहीं है और ये मांग राजनीतिक प्रतिशोध से की जा रही है जो ग़लत है.

हालांकि सुशील मोदी ने कोशिश की थी कि राय को पिछले चुनाव में टिकट ना मिले. बहरहाल भाजपा चुनाव समिति के सदस्यों को इस बात का भ्रम नहीं था कि भले राय का टिकट होल्ड पर हो लेकिन अमित शाह को उनकी नीतीश कुमार से दोस्ती नागवार गुज़री है.

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लेकिन झारखंड भाजपा नेताओं का मानना है कि राय का टिकट काटकर मधु कोड़ा घोटाले के आरोपी भानु प्रताप साही को जैसे टिकट दिया गया उसके एक संदेश गया है कि पार्टी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर समझौता कर लिया है. उन्हें इस बात की भी परवाह नहीं कि विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर जनता के सामने घेरेगी. चुनाव के समय ऐसे परस्पर विरोधाभासी निर्णय का ख़ामियाज़ा उठाना पड़ सकता है.

हालांकि पार्टी के नेता इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि निर्दलीय मैदान में रहने के कारण सरयू राय चुनाव में तो कोई ख़ास असर नहीं डालेंगे. लेकिन चुनाव के बाद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अगर उन्होंने कोई बात सार्वजनिक की तो मुख्यमंत्री रघुबर दास के किए मुश्किल बढ़ सकती है.

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