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कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर शशि थरूर ने जताया असंतोष, बोले- 'स्पष्टता की कमी'  पार्टी पर पड़ रही है भारी

शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नेतृत्व को लेकर 'स्पष्टता की कमी'  पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है.

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कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर शशि थरूर ने जताया असंतोष, बोले- 'स्पष्टता की कमी'  पार्टी पर पड़ रही है भारी

शशि थरूर (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. थरूर ने पार्टी की कमान किसी युवा को देने का समर्थन किया
  2. कहा- पार्टी जिस हालात से गुजर रही है उसका अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है
  3. ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की शैली अपनाने का सुझाव दिया
नई दिल्ली :

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही कांग्रेस के अंदर उठा-पटक का दौर जारी है. कांग्रेस अभी तक अगले अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है. इस बीच राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, हरीश रावत जैसे अन्य नेताओं ने भी अपना पद छोड़ दिया है. ऐसे में पार्टी के अंदर एक अनिश्चितता का माहौल बन गया है. इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने बड़ा बयान दिया है और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नेतृत्व को लेकर 'स्पष्टता की कमी'  पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है. उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कमान किसी युवा नेता को सौंपे जाने का भी समर्थन किया. शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि कांग्रेस में सुधार का रास्ता यही हो सकता है कि कार्य समिति सहित पार्टी में सभी महत्वपूर्ण पदों के लिए चुनाव हों, जिससे इनमें चुने जाने वाले नेताओं को स्वीकार्यकता हासिल करने में मदद मिलेगी.  

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उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के इस आकलन का भी समर्थन किया कि इस समय कांग्रेस की कमान किसी युवा नेता को सौंपी जानी चाहिए. थरूर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव होने पर महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा इसमें अपनी किस्मत आजमाने को लेकर फैसला करेंगी, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि यह गांधी परिवार का फैसला होगा कि प्रियंका इस पद के लिए चुनाव लड़ेंगी या नहीं. शशि थरूर ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर असंतोष जताते हुए कहा कि कांग्रेस जिन हालात से गुजर रही है उसका अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है. तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘यह बिल्कुल सही बात है कि पार्टी के शीर्ष पद पर स्पष्टता की कमी संभवत: कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नुकसान पहुंचा रही है, इनमें से ज्यादातर पार्टी नेता की कमी महसूस करते हैं जो अहम फैसलों को देखे, कमान संभाले और यहां तक कि पार्टी में नई जान फूंके और उसे आगे ले जाए.'  

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शशि थरूर ने उम्मीद जतायी कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) मौजूदा स्थिति को ‘बहुत गंभीरता' से ले रही है और वह बिना किसी देरी के समाधान खोजने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस में सुधार का एक रास्ता यह हो सकता है कि सीडब्ल्यूसी पार्टी के लिए एक अंतरिम कार्यकारी अध्यक्ष का नाम बताए और फिर इसे भंग कर दें. इसके बाद सीडब्ल्यूसी समेत पार्टी के भीतर मुख्य नेतृत्व पदों पर ताजा चुनाव हों.'उन्होंने कहा, ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों (पीसीसी) से लिए गए नेताओं को यह तय करने का अधिकार दिया जाए कि इन अहम पदों में से कौन पार्टी का नेतृत्व करेगा. इससे आने वाले नेताओं को स्वीकार्यता मिल सकेगी और उन्हें पार्टी का नेतृत्व करने का विश्वसनीय जनादेश मिलेगा.' शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष पद पर चुनाव कराने के लिए ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की शैली अपनाने का सुझाव दिया जिससे पार्टी में राष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ सकती है तथा वह एक बार फिर और ज्यादा मतदाताओं को अपनी ओर प्रेरित कर सकती है. 

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यह पूछने पर कि क्या उन्हें लगता है कि प्रियंका गांधी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त है, इस पर थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगी. उन्होंने कहा कि उनके पास ‘स्वाभाविक करिश्मा'' है जो निश्चित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं तथा मतदाताओं को प्रेरित और एकजुट कर सकता है. उनकी इसी खूबी के कारण कई लोग उनकी तुलना उनकी दादी और पूर्व पार्टी अध्यक्ष दिवंगत इंदिरा गांधी से करते हैं. वह निश्चित रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं में नयी जान डालेंगी और साथ ही मतदाताओं को भी पार्टी की ओर खीचेंगी. कांग्रेस नेता ने कहा कि पिछले चुनावों में उत्तर प्रदेश में काम करते हुए वह प्रभावशाली छाप छोड़ने के साथ ही संगठन में अनुभवी नेता के तौर पर उभरी हैं. पार्टी अध्यक्ष पद के लिए खड़े होने में रुचि के बारे में पूछने पर 63 वर्षीय थरूर ने कहा, ‘मैं ईमानदारी से कहूंगा कि मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर अटकलें लगाने की दूर-दूर तक भी कोई संभावना है.' 

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इनपुट : भाषा



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