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BJP नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 90 दिन में तय हो अल्पसंख्यक की परिभाषा

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(सी) को रद्द किया जाए क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है

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BJP नेता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 90 दिन में तय हो अल्पसंख्यक की परिभाषा

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

अल्पसंख्यक की परिभाषा और अल्पसंख्यकों की पहचान के दिशा निर्देश तय करने की मांग का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया है कि तीन महीने के अंदर वो अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे. बीजेपी नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने जनहित याचिका दाखिल कर सिर्फ वास्तव में अल्पसंख्यकों को 'अल्पसंख्यक संरक्षण' दिये जाने की मांग की है. याचिका में मांग की गई है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(सी) को रद्द किया जाए क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करती है. इस धारा में केंद्र सरकार को किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने के असीमित और मनमाने अधिकार दिये गये हैं. याचिका में यह भी कहा गया है कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आकंड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, वह पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक है. याचिका में कहा गया कि हिंदू समुदाय उन लाभों से वंचित है जो कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए मौजूद हैं. अल्पसंख्यक पैनल को इस संदर्भ में ‘अल्पसंख्यक' शब्द की परिभाषा पर पुन: विचार करना चाहिए.  

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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपाध्याय से अल्पसंख्यक पैनल में अपने प्रतिवेदन को फिर से दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं. इस पर सोमवार से तीन महीने के भीतर फैसला लिया जाएगा.  

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