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घर खरीदारों को पैसा लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक डायरेक्‍टरों की संपत्ति बेचने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्‍ली हाईकोर्ट के पूर्व न्‍यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्‍यक्षता वाले पैनल को निर्देश दिया है कि यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों की संपत्तियों को बेचकर घर खरीदारेां के पैसे वापस किए जाए.

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घर खरीदारों को पैसा लौटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक डायरेक्‍टरों की संपत्ति बेचने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों की संपत्तियों बेचने के दिए आदेश

खास बातें

  1. पूर्व न्‍यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्‍यक्षता वाले पैनल को दिया निर्देश
  2. निदेशकों की संपत्तियों को बेचकर घर खरीदारों के पैसे वापस किए जाए
  3. कोलकाता वाली संपत्ति को बेचकर इसकी शुरुआत करें
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्‍ली हाईकोर्ट के पूर्व न्‍यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्‍यक्षता वाले पैनल को निर्देश दिया है कि रियल एस्टेट प्रमुख यूनिटेक लिमिटेड के निदेशकों की संपत्तियों को बेचकर घर खरीदारों के पैसे वापस किए जाए. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह से कहा कि वह पाक साफ होकर आए. शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी आवासीय परियोजनाएं पहली नजर में अवैध लगती हैं और उसका रियल एस्टेट कारोबार ‘मकड़जाल’ की तरह है. 

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मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्‍ली हाईकोर्ट के पैनल को निर्देश दिया है कि वह यूनिटे के निदेशकों की कोलकाता वाली संपत्ति को बेचकर इसकी शुरुआत करें. इस बेंच के जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ ने समिति को निर्देश दिया है कि वह 25 करोड़ रुपये घर खरीदार को तय हुए सौदे के तहत दिए जाए. इसके लिए कोर्ट एमिकस क्यूरी वकील पवनश्री अग्रवाल और दो अन्‍य लोगों को इस प्रक्रिया के लिए नियुक्‍त किया है. कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 11 सितंबर को करेगी. 


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इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु की संपत्तियों की नीलामी करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने समिति से कहा था कि वह उत्तर प्रदेश के आगरा और वाराणसी तथा तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर स्थित उन संपत्तियों की नीलामी करे जिनपर कोई देनदारी नहीं है. गौरतलब है कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था जिससे रीयल एस्टेट कंपनी की 600 एकड़ जमीन की नीलामी का काम तेजी से पूरा किया जा सके और उन घर के खरीदारों को पैसा लौटाया जा सके.

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वहीं मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को अपनी गिरवी रहित संपत्तियों का ब्योरा प्रदान करने का निर्देश देने को भी कहा है्. कोर्ट ने कहा कि समूह पर इतनी अधिक देनदारियां हैं कि उसकी संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त रकम का अधिकारियों, कर और सुरक्षित ऋणदाताओं को भुगतान करने के बाद काफी कम राशि बचेगी. न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने कहा कि भारतीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) द्वारा लंबित परियोजनाओं के निर्माण के लिये 5000 करोड़ से अधिक रुपये हासिल करने का एकमात्र उपाय है कि आम्रपाली समूह के निदेशकों की निजी संपत्तियां बेच दी जाएं. पीठ ने सभी निदेशकों का सात दिन में विस्तृत हलफनामा मांगा, जिन्होंने कुछ महीने के लिये भी समूह में सेवा दी. पीठ ने उनकी निजी संपत्तियों और बैंक खातों का भी ब्योरा मांगा. 

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पीठ ने कहा, ‘पहली नजर में ऐसा लगता है कि समूह की नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सभी आवासीय संपत्तियां जहां लोगों को कब्जा दिया गया है, वो अवैध हैं क्योंकि किसी के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है.’ पीठ ने साफ कर दिया कि वह सही निदेशकों को नहीं छुएगी. उसने कहा कि वह इसलिये ब्योरा मांग रही है क्योंकि उसे संदेह है कि ‘व्यक्ति के पीछे व्यक्ति हैं.’  पीठ ने कहा, ‘एकबार निदेशकों और उनकी संपत्ति का ब्योरा मिलने के बाद हम उचित आदेश देंगे. हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम सही निदेशकों के खिलाफ नहीं हैं.’

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पीठ ने समूह को निर्देश दिया कि वह उन आठ कंपनियों का ब्योरा दे जो उन कंपनियों की सूची में शामिल नहीं थी, जो पहले सौंपी गई थीं. जहां घर खरीदारों को कब्जा दिया गया है उस बारे में न्यायालय ने कहा कि कानूनी रूप से कहा जाए तो स्वामित्व अधिकारों का अंतरण नहीं किया गया क्योंकि कंप्लीशन प्रमाण पत्र नहीं है. पीठ ने कहा, ‘आम्रपाली अपनी बकाया देनदारियों को चुकाने की जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता है.’ गिरवी रहित संपत्तियों के आंकड़े को देखने के बाद पीठ ने कहा, ‘आप बेदाग होकर आएं, न कि दागदार हाथों के साथ. आपको हर देनदारी का ब्योरा देना है. इसमें खरीदारों और सुरक्षित ऋणदाताओं पर देनदारी भी शामिल है.’    



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