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गुजरात के गिर के जंगलों में शेरों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट गम्भीर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा - सरकार पता लगाए कि ऐसा क्यों हो रहा है और इसे रोकने के लिए क्या इंतजाम जरूरी हैं

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गुजरात के गिर के जंगलों में शेरों की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट गम्भीर

गुजरात के गिर अभ्यारण्य में शेरों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है.

खास बातें

  1. गिर अभ्यारण्य में तीन सप्ताह में 23 शेरों की मौत हो चुकी
  2. किसी वायरस संक्रमण की वजह से शेरों की मौत होने की आशंका
  3. नामीबिया से भारत में चीतों को फिर से लाने से संबंधित मामले की सुनवाई
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने गिर के जंगलों में शेरों की मौत को लेकर केन्द्र और गुजरात सरकार से कहा कि यह मामला बहुत गम्भीर है. शेरों का संरक्षण जरूरी है. सरकार पता लगाए कि ऐसा क्यों हो रहा है और इसे रोकने के लिए क्या इंतज़ाम ज़रूरी हैं. केंद्र ने इस मामले में कोर्ट को जानकारी देने के लिए समय मांगा है.

कोर्ट से गुजरात सरकार ने कहा शेरों के संरक्षण के लिए हर तरह के उपाय किए जाएंगे. कोर्ट ने केन्द्र से कहा कि गुजरात के गिर अभ्यारण्य में तीन सप्ताह के भीतर 23 शेरों की रहस्यमय मृत्यु के मामले पर गौर करे. ऐसा संदेह है कि किसी वायरस संक्रमण की वजह से इन शेरों की मौत हुई है. न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केन्द्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से कहा, ‘‘आज हमारे सामने एकदम अजीब समस्या है. शेर मर रहे हैं. ऐसा लगता है कि वहां किसी किस्म का वायरस है. हमें मालूम नहीं. ऐसा ही समाचार पत्रों में आ रहा है.आप इसका पता लगाएं.’’ 

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पीठ को सूचित किया गया कि दुनिया में एशियाई शेरों के इस एकमात्र ठिकाने में पिछले तीन सप्ताह में 23 शेरों की मौत हो चुकी है. अधिवक्ता ऋत्विक दत्ता ने पीठ से कहा, ‘‘यदि यह किसी किस्म का वायरस संक्रमण है तो फिर इस इलाके से सारे ही शेरों का सफाया हो जाएगा.’’ यह पीठ अफ्रीका के नामीबिया से भारत में चीतों को फिर से लाने से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी. उन्होंने कहा कि जिस तरह से शेरों की मौत हो रही है उससे दूसरे जानवरों में भी यह महामारी फैलने की आशंका है. 

गुजरात सरकार ने सोमवार को कहा था कि कुछ शेरों की मौत वायरस संक्रमण के कारण हुई है. उसने कहा था कि इन शेरों की मौत के जिम्मेदार वायरस की अभी पहचान होनी है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने शीर्ष अदालत में एक आवेदन दायर कर यह अनुरोध किया था कि न्यायालय का 2013 का फैसला भारत में उचित जगह पर अफ्रीका से लाकर चीते बसाने से प्राधिकारियों को रोकता नहीं है. इस मामले में सुनवाई के दौरान पीठ ने नाडकर्णी से गिर अभ्यारण्य में शेरों की मौत के बारे में पूछा और कहा, ‘‘शेरों के मामले में आप क्या कर रहे हैं?’’ इस पर नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि गुजरात में शेरों से संबंधित एक मामला पहले से ही शीर्ष अदालत में लंबित है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं पता लगाऊंगा.’’ 

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सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के वकील ने पीठ से कहा कि उसने अफ्रीका से भारत में चीतों को बसाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक संरक्षण यूनियन की आवश्यकताओं का पालन किया है. हालांकि, पीठ ने प्राधिकरण से सवाल किया कि क्या उसने इस संगठन से अनुमति प्राप्त की है. क्या उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. न्यायालय इस मामले में अब 29 अक्तूबर को आगे विचार करेगा. 
(इनपुट भाषा से भी)



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