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क्या है Public Safety Act (PSA)? जिसके तहत जम्मू कश्मीर के पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला हैं नजरबंद

What is Public Safety Act: पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) यानी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम. बिना मुकदमे के किसी भी व्यक्ति को दो साल तक की गिरफ्तारी या नज़रबंदी की अनुमति देता है.

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क्या है Public Safety Act (PSA)? जिसके तहत जम्मू कश्मीर के पूर्व CM फारूक अब्दुल्ला हैं नजरबंद

What is Public Safety Act: फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) PSA के तहत नजरबंद हैं.

खास बातें

  1. यह कानून 1970 के दशक में लाया गया था
  2. कानून का उद्देश्य लकड़ी की तस्करी रोकना था
  3. बिना मुकदमे के 2 साल तक नज़रबंदी की अनुमति
नई दिल्ली:

What Is Public Safety Act: जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत नजरबंद किया गया है. पब्लिक सेफ्टी एक्ट (Public Safety Act) यानी सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम. सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (What is Public Safety Act) बिना मुकदमे के किसी भी व्यक्ति को दो साल तक की गिरफ्तारी या नज़रबंदी की अनुमति देता है. यह कानून 1970 के दशक में यह कानून जम्मू-कश्मीर में लकड़ी की तस्करी को रोकने के लिए लागू किया गया था, क्योंकि उस समय ऐसे अपराध में शामिल लोग मामूली हिरासत के बाद आसानी से छूट जाते थे. पूर्व मुख्यमंत्री और फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने लकड़ी तस्करों के खिलाफ इस अधिनियम को एक निवारक के रूप में लाए थे, जिसके तहत बिना किसी मुकदमे के दो साल तक जेल की सजा देने का प्रावधान किया गया था.

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1990 के दशक की शुरुआत में जब राज्य में उग्रवाद भड़का तो पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) पुलिस और सुरक्षा बलों के काम आया. 1990 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को लागू किया तो बड़े पैमाने पर PSA का इस्तेमाल लोगों को पकड़ने के लिए किया गया. PSA के तहत हिरासत की एक आधिकारिक समिति द्वारा समय समय पर समीक्षा की जाती है और इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है.  

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सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) सरकार को 16 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को दो साल तक बिना मुकदमा चलाए रखने की अनुमति देता है. 2011 में, न्यूनतम आयु 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई थी. हालिया दशकों से दौरान इसका इस्तेमाल आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों के खिलाफ किया जाता था. 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पीएसए के तहत 550 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था.

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बता दें कि पिछले महीने अनुच्छेद 370 के फैसले के बाद जारी सुरक्षा बंदिशों के बीच यह पहला मौका है जब एक मुख्यधारा के राजनीतिज्ञ, सांसद और तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके किसी व्यक्ति को PSA के तहत नजरबंद किया गया है. पीएसए के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का आदेश जिला मजिस्ट्रेट या संभागीय आयुक्त द्वारा जारी किया जा सकता है.

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