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दिग्विजय सिंह VS प्रज्ञा ठाकुर : क्या कहते हैं भोपाल गैस कांड के पीड़ित

भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार कहते हैं, लाखों पोस्टकॉर्ड पिटिशन भेजे रहे हैं, दोनों पार्टियां कांग्रेस-बीजेपी का ध्यान इस ओर नहीं है जो बहुत शर्मनाक है.

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दिग्विजय सिंह VS प्रज्ञा ठाकुर :  क्या कहते हैं भोपाल गैस कांड के पीड़ित

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से दो बार मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह और उनके सामने बीजेपी से हैं प्रज्ञा सिंह ठाकुर. दोनों के सामने हैं 34 साल बाद भी वैसे ही खड़े भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित, जिनके जख्मों पर इतने साल के बाद भी कोई सरकार मरहम नहीं लगा पाई है. फिर भी दिल में ज़ख्म लिये भोपाल गैस त्रासदी के ये पीड़ित ऐसे लाखों पोस्टकार्ड पिटिशन में अपना दर्द लिखते हैं. भोपाल की रहने वाली हसीना पुतली के परिवार के 3 लोगों को गैस त्रासदी ने लील लिया था इनको सरकार की ओर से मिले मुआवजे का राशि माज्ञ 25 हजार रुपया है. हसीना की उम्मीदें अब पूरी तरह से टूट चुकी हैं. हसीना कहती हैं, ' भैय्या हम इंतज़ार करते रहे ये पार्टी आएगी तो सहायता देगी, हमें इंतज़ार में कितने साल हो गये. आप को बताएं तो कोई पार्टी ने हमारा साथ नहीं दिया. हसीना सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, 'क्यों उठाएंगे हमारी आवाज़, गरीबों की आवाज़ कौन उठाता है. दो बेटे 10-12 साल के थे. कोई उम्मीद नहीं थी. अगर हैं तो जब्बार भाई, मेहनत कर रहे हैं उसकी मेहनत वसूल कर दे परवर दिगार' वहीं इब्राहिमपुरा में रहने वालीं 62 साल की हमीदा हादसे को लेकर आज भी सहम जाती हैं. गैस त्रासदी के बाद उनके परिवार के एक-एक कर 41 लोग जान गंवा चुके हैं. खुद कई बीमारियों से जूझ रही हैं. वो याद करते हुए कहती हैं, '2 दिसंबर 1984 की आधी रात को जान बचाने के हर तरफ सिर्फ मौत का ही मंजर देखा..ससुराल...मायका सब खाली हो गया.. किसी को भी वोट दें कोई ध्यान नहीं देता'.

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इसके बाद हमीदा ने जो बात कही सभी पार्टियों के लिए किसी भी तमाचे से कम नहीं था, उन्होंने कहा, '34 साल हो गये. आज तक किसी सरकार ने किसी घोषणापत्र के अंदर एक लाइन नहीं लिखी ताकि पीड़ितों को तसल्ली हो...इतनी सरकारें आ रही हैं... जा रही हैं सरकार से उम्मीद करो लेकिन वो कुछ नहीं करती ना सुनती...हमारे रोज़गार, पेंशन की बात करें सिर्फ वोट लेना है विदेश घूमना है.' पीड़िता रइसा कहती हैं, किसी राजनीतिक दल से कोई उम्मीद नहीं जो मिला कोर्ट से..चुनाव से कोई उम्मीद नहीं है, पहले भी कांग्रेस थी जब गैस रिसी... बीजेपी रोजगार छीन लिया 2200 महिलाओं का'

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भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार कहते हैं, लाखों पोस्टकॉर्ड पिटिशन भेजे रहे हैं, दोनों पार्टियां कांग्रेस-बीजेपी का ध्यान इस ओर नहीं है जो बहुत शर्मनाक है. ये पूछा जाए प्रज्ञा ठाकुर से यूनियन कार्बाइड कहां है वो दिशा नहीं बता पाएंगी हमने शिवराज चौहान को 26000 मेमोरेंडम दिये वो कहां गये हमें मालूम नहीं.' वहीं भोपाल गैस त्रासदी पर बीजेपी-कांग्रेस दोनों का दावा है कि पीड़ितों को भूले नही हैं. पीड़ितों के हालात के लिये वो अपने नहीं दूसरे के ज़िम्मेदार ठहराते हैं. बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी कहते हैं, 'लगातार उनसे हमारा संपर्क रहता है, उनके बीच में काम करते रहे हैं, कांग्रेस की सरकार जब से आई है सिर्फ कागजों पर काम हो रहा है जो अस्पताल बनाया गया था भोपाल मेमोरियल वो बंद होने की कगार पर आ गया इससे खराब कुछ नहीं हो सकता'. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मानक अग्रवाल कहते हैं कि बीजेपी की सरकार ने 15 साल में कुछ ध्यान नहीं दिया इसलिये इस स्थिति से गुजरना पड़ रहा है. उनका कहना है कि दिग्विजय सिंह तो उन इलाकों में जाते हैं प्रज्ञा को तो पता ही नहीं किसी गली में क्या हुआ था.

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आपको बता दें कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है. लेकिन 34 साल बाद भी अगर पीड़ित दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं तो उसकी वजह भी सियासी है. आखिर इस हादसे के गुनहगार को देश से भगाने वाले उस वक्त कुर्सी पर बैठे थे, तो उन्हें कोर्ट में बचाने वाले आज कुर्सी पर बैठे हैं.

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