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Gandhi Jayanti 2017: बापू को इसलिए जानते हैं दुनियाभर के लोग, आज भी कम नहीं हुई महानता

गांधी जयंती के मौके पर हम आपको बता रहे है महात्‍मा गांधी के कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें शायद कम ही लोग जानते हैं.

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Gandhi Jayanti 2017: बापू को इसलिए जानते हैं दुनियाभर के लोग, आज भी कम नहीं हुई महानता

Gandhi Jayanti 2017: महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस ने कहा था.

हमारे देश में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के तौर पर मनाया जाता है. महात्मा गांधी को उनके विकास रूपी विचारों और आदर्शों के लिए जाना जाता है. उन्होंने अहिंसा के पथ पर चलकर पूरी दुनिया को बता दिया कि कैसे सिर्फ बिना किसी हिंसा के कोई भी लड़ाई लड़ी जा सकती है. यह तो आपने सुना ही होगा कि गांधी जी कहते थे कि अगर कोई एक थप्पड़ मारे तो उसे दूसरा गाल दे देना चाहिए. आपकी विनम्रता से सामने वाला इंसान जरूर एक न एक दिन पिघल ही जाएगा. आज भी लोग सिर्फ गांधी जयंती नहीं मनाते बल्‍कि महात्मा गांधी के विचारों को मानते भी हैं और उनके बताए रास्‍ते पर चलते हैं. गांधी जयंती के मौके पर हम आपको बता रहे है महात्‍मा गांधी के कुछ ऐसे रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें शायद कम ही लोग जानते हैं. 

1. महात्मा गांधी के नाम को रिकॉर्ड पांच बार नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया गया था.
2. महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस ने कहा था.
3. अपने पूरे जीवन में गांधी जी ने कभी कोई राजनीति पद नहीं लिया.
4. जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन छेड़ दिया था उसी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टैंप जारी किया.
  5. महात्मा गांधी ने आइंस्टीन, हिटलर, टॉलस्टॉय जैसे दुनिया की कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात की थी.
6. गांधी जी ने डरबन, और जॉहिनसबर्ग में फुटबाल क्लब स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी.
7. दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी को 15 हजार डॉलर मिलते थे जिसकी कीमत आज लगभग 10 लाख रुपए के बराबर है, इसके बावजूद गांधी जी भारत आए.
8. महात्मा गांधी को सम्मान देने के लिए एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स गोल चश्मा भी पहनते थे.
9. बापू के नाम से हमारे देश में 53 प्रमुख सड़कें हैं, इसके अलावा विदेशों में भी उनके नाम की 48 सड़के हैं.
10. स्वतंत्रता दिवस की रात गांधी जी ने उपवास रखा था, इसी वजह से वह नेहरू जी का भाषण भी नहीं सुन पाए थे. 


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