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कल्पनाओं के परों पर उड़ान भरने वाले रस्किन बॉन्ड ने दिए बाल साहित्य को नए पंख...

वे अपनी कल्पनाओं को इतने सुंदर और रंगीन पर देते हैं कि कहानियों की शक्ल में वे खूब रोचक और मनोरंजक हो जाती हैं.

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कल्पनाओं के परों पर उड़ान भरने वाले रस्किन बॉन्ड ने दिए बाल साहित्य को नए पंख...
जब कभी कहानी सुनने का मन किया तो बचपन में कदम उठ पड़ते थे दादा जी की ओर... है न. किताबों की दुनिया में कुछ ऐसा ही किरदार निभाते हैं जाने-माने लेखक रस्किन बॉन्ड. वे अपनी कल्पनाओं को इतने सुंदर और रंगीन पर देते हैं कि कहानियों की शक्ल में वे खूब रोचक और मनोरंजक हो जाती हैं. रस्किन बॉन्ड ने 500 से ज्यादा कहानियां, उपन्यास, संस्मरण और कविताएं लिखीं. उनके लेखन का ज्यादातर हिस्सा बाल साहित्य की अमूल्य धरोहर है. 

स्कूल पूरा करने के बाद रस्किन बॉन्ड लंदन चले गए. लेकिन रस्किन बॉन्ड लंदन में रहने के बावजूद भारत को भूल नहीं पाए. उनकी कहानियों में इस देश की मिट्टी की खुश्बू महसूस की जा सकती है. इस समय वह हिमाचल में ही रह रहे हैं.

इस बार अपने जन्मदिन पर मशहूर लेखक रस्किन बॉण्ड अपनी नई किताब जोकि एक संस्मरण है, जिसमें वह अपने पिता कि साथ बिताए लम्हों को याद कर रहे हैं, उनके जन्मदिन यानी 19 मई को जारी होगी. बॉण्ड की नई किताब ‘‘लुकिंग फॉर द रेनबो: माई ईयर्स विद डैडी (Looking For The Rainbow: My Years with Daddy) ’’ यह पहली बार है जब बॉण्ड ने कोई किताब अपने पिता को समर्पित की है.

कहानियों के राजा का बचपन: 
19 मई को अंग्रेजी भाषा के बेहतरीन लेखक रस्किन बॉन्ड का जन्मदिन है. उनका जन्म हिमाचल के कसौली में 19 मई, 1934 हुआ था. रस्किन के पिता रॉयल एयर फोर्स में थे. रस्किन उस समय महज चार साल के ही रहे होंगे, जब उनके माता पिता ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर तलाक ले लिया था. इस तलाक के बाद रस्किन की मां ने दूसरी शादी कर ली. तकरीबन 10 साल की उम्र में 1944 में उन्होंने अपने पिता को खो दिया. पिता की मृत्यु के बाद रस्किन देहरादून में अपनी दादी के साथ रहने लगे. 

सम्मान और पुरस्कार
रस्किन बॉन्ड को बचपन से ही कल्पनाओं के पर लगाकर उड़ान भरने का शौक रहा. जब उन्होंने लेखन शुरू किया तो यह शौक मन की कल्पनाओं से कागज के पन्नों पर आ बिखरा. रस्किन बॉन्ड ने लेखन के लिए अंग्रेजी को चुना. उन्हें अंग्रेजी में लघु कहानियों के संकलन पर 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया. 1999 में बाल साहित्य में योगदान के लिए वे पद्म श्री से सम्मानित हुए. कॉलेज तक आते-आते बॉन्ड एक मंझे लेखक बन गए. इसके बाद उन्होंने कई अवार्ड जीते. बॉन्ड ने महज 17 साल की उम्र में अपना पहला उपन्यास ‘रूम ऑन द रूफ’ लिखा. यह इतना पसंद किया गया कि इसके लिए बॉन्ड को 1957 में जॉन लिवेलिन् राइस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 
 


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