BJP उम्मीदवार संबित पात्रा के लिए आखिर क्यों पुरी से चुनाव जीतना है मुश्किल, आंकड़ों से समझें

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति हाथ में लेकर नामांकन दाखिल करने पहुंचे संबित पात्रा (Sambit Patra) के लिए पुरी की राह आसान नहीं है. इसकी तस्दीक खुद आंकड़े करते हैं.

BJP उम्मीदवार संबित पात्रा के लिए आखिर क्यों पुरी से चुनाव जीतना है मुश्किल, आंकड़ों से समझें

बीजेपी पुरी (Puri) से कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकी है.

खास बातें

  • बीजेपी ने संबित पात्रा को पुरी से मैदान में उतारा
  • इस सीट पर अभी बीजू जनता दल का कब्जा है
  • बीजेपी कभी इस सीट से लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकी है
नई दिल्ली :

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ओडिशा की पुरी सीट (Puri Lok Sabha constituency) से पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा (Sambit Patra) को मैदान में उतारा है. पहले पुरी से खुद पीएम मोदी के चुनाव लड़ने की चर्चा थी, लेकिन संबित पात्रा को टिकट मिलने के बाद तमाम चर्चाओं पर विराम लग गया. भगवान जगन्नाथ की मूर्ति हाथ में लेकर नामांकन दाखिल करने पहुंचे संबित पात्रा (Sambit Patra) के लिए पुरी की राह आसान नहीं है. इसकी तस्दीक खुद आंकड़े करते हैं. हिंदू धर्म के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक पुरी (Puri) को पारंपरिक तौर पर बीजू जनता दल (Biju Janata Dal) का गढ़ माना जाता है. इसकी वजहें भी हैं. पिछले ढाई दशकों से बीजेडी लगातार पुरी की गद्दी पर काबिज रही है और यहां से पार्टी के उम्मीदवार लोकसभा में पहुंचते रहे हैं. 2014 में तो बीजेडी को अकेले 50 फीसद वोट मिले थे, जो इस बात को और पुख़्ता करते हैं कि पुरी नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) की पार्टी का मजबूत किला है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं हैं. 

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पुरी हमेशा से बीजेपी के लिए रही है अबूझ पहेली 
तीर्थनगरी पुरी हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा के लिए हमेशा से एक पहेली रही है और बीजेपी कभी भी इस सीट से लोकसभा चुनाव नहीं जीत सकी है. वर्तमान में पुरी (Puri Lok Sabha constituency) से बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्र (Pinaki Misra) सांसद हैं, जो यहां काफी लोकप्रिय हैं. वे साल 2009 भी यहां से संसद में पहुंच चुके हैं. इसके अलावा 1996 में भी पिनाकी मिश्र कांग्रेस के टिकट पर पुरी (Puri Seat)से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. पिछले चुनावों की बात करें तो, पिनाकी मिश्र को 50 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी और बीजेपी तीसरे पर. बीजेपी को 20 प्रतिशत के आसपास वोट मिले थे.  

1998 से लगातार जीतती रही है बीजेडी 
बीजू जनता दल यानी बीजेडी (BJD) साल 1998 से लगातार पुरी की सीट पर कब्जा जमाती रही है. 1998 से 2004 तक लगातार ब्रज किशोर त्रिपाठी यहां से बीजेडी के टिकट पर जीतकर लोकसभा में पहुंचते रहे हैं. जबकि 2009 से पिनाकी मिश्र (Pinaki Misra) सांसद हैं. अब तक हुए कुल 16 लोकसभा चुनावों में  बीजेडी 5 बार, कांग्रेस 6 बार, जनता दल 2 बार, जनता पार्टी 1 बार, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी 1 बार और सीपीआई ने एक बार इस सीट से जीत दर्ज की है.  

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पुरी की विधानसभा सीटों पर भी बीजेडी का पलड़ा भारी 
पुरी (Puri) में सात विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 6 पर बीजेडी (BJD) का कब्ज़ा है. सिर्फ एक सीट बीजेपी के हाथ में है. पिछली बार पुरी की चिल्का विधानसभा सीट पर बीजेपी बमुश्किलन जीत हासिल कर पाई थी. बीजेपी को इस सीट पर सिर्फ 541 वोटों से जीत मिली थी. यानी बीजेपी की राह कतई आसान नहीं है.  

इस बार तीन प्रवक्ताओं में है मुकाबला 
पुरी सीट (Puri Lok Sabha constituency) पर जहां बीजेपी के संबित पात्रा (Sambit Patra) ताल ठोंक रहे हैं. तो वहीं, मौजूदा सांसद और बीजू जनता दल (Biju Janata Dal) के प्रत्याशी पिनाकी मिश्र (Pinaki Misra) के अलावा कांग्रेस के सत्यप्रकाश नायक भी अखाड़े में उतर गए हैं. खास बात यह है कि ये तीनों उम्मीदवार अपनी-अपनी पार्टी के प्रवक्ता हैं और बहस-मुबाहिसों में पार्टी का पक्ष रखते नजर आते हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी अखाड़े में कौन किस पर भारी पड़ता है. 

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