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Election Results 2019 : संबित पात्रा ने वेश-भूषा बदली, गाना गया, कई घरों में खाना भी खाया, फिर भी हार गए, जानें क्यों

Lok Sabha Election 2019 : संबित पात्रा ने पूरी में चुनाव जीतने के लिए काफी मेहनत की. संबित खुद पुरी के रहने वाले नहीं है लेकिन जब उन्हें पुरी से उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया उनके पास सिर्फ दो महीने का समय था. इतने कम समय में संबित ने लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश की.

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Election Results 2019 : संबित पात्रा ने वेश-भूषा बदली, गाना गया, कई घरों में खाना भी खाया, फिर भी हार गए, जानें क्यों

Lok Sabha Election Results 2019 : पुरी से बीजेपी उम्मीदवार संबित पात्रा चुनाव हार गए हैं.

नई दिल्ली:

राष्ट्रीय मीडिया में अगर इस बार ओडिशा के किसी लोकसभा उम्मीदवार का सबसे ज्यादा चर्चा हुई हो तो वो थे बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा. संबित न्यूज चैनलों में बीजेपी की ओर से बहस करते हैं. पुरी लोकसभा क्षेत्र से संबित पात्रा बीजेपी के उम्मीदवार थे लेकिन संबित पात्रा यह लड़ाई जीतते-जीतते हार गए. संबित पात्रा को पुरी से तीन बार सांसद रहे पिनाकी मिश्र ने 11714 वोट से हराया है. पुरी में लड़ाई बहुत नजदकी रही है. साबित पात्रा कभी आगे निकल जाते तो कभी पिनाकी मिश्रा. आखिरकार पिनाकी को जीत नसीब हुई. पिनाकी चौथी बार संसद पहुंचेंगे.  2014 में पिनाकी मिश्र यहां से 263361 वोट से जीत हासिल की थी. 2014 में बीजेपी यहां तीसरी स्थान पर थी लेकिन इस बार जीत के करीब पहुंच गई.  संबित पात्रा की हार के पीछे बीजेडी के कोर वोटर हैं  जो पिनाकी मिश्र के साथ खड़े रहे. अगर 2014 की बात करें तो 2014 के लोक सभा चुनाव में पुरी से पिनाकी मिश्र को 523161 वोट पड़े थे. 2019 में 537782 वोट पड़े यानी 2014 से 14621 वोट  ज्यादा लेकिन अगर बीजेपी की बात की जाए तो 2014 में बीजेपी को पुरी से 215763 वोट पड़े थे लेकिन इस बार संबित को 524504 वोट पड़े यानी 308741 वोट ज्यादा लेकिन फिर भी संबित हार गए. कांग्रेस के जो वोटर हैं उनका भी वोट संबित पात्रा को मिला.  2014 में पुरी से कांग्रेस को 259800 वोट पड़े थे लेकिन इस बार सिर्फ 44734 वोट मिले यानी 215066 वोट कम. आंकड़े यह साफ कहते हैं कि कांग्रेस के वोट तो संबित को पड़ा है लेकिन इसके अलावा एक भी वोट इधर-उधर से नहीं गया.

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संबित ने कैसे लड़ी लड़ाई
संबित पात्रा ने पूरी में चुनाव जीतने के लिए काफी मेहनत की. संबित खुद पुरी के रहने वाले नहीं है लेकिन जब उन्हें पुरी से उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया उनके पास सिर्फ दो महीने का समय था. इतने कम समय में संबित ने लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश की. संबित रोज़ सभाएं और रैलियां करते थे. जहां रैली खत्म होता था वहीं सो जाते थे, किसी के भी घर में खाना खा लेते थे. संबित ने साथ-साथ अपनी वेश-भूषा भी बदल डाली. वह रोज़ धोती पहनते थे, चंदन टिका लगाते थे. पुरी में जो तेलुगु वोटर्स हैं उन्हें लुभाने के लिए तेलुगु में भाषण भी देते थे. वह तेलुगु में गाना भी गाने सिख गए थे. संबित ने मीडिया का भी काफी इस्तेमाल किया. पहली बार काफी नेशनल मीडिया ओडिशा के किसी लोकसभा उम्मीदवार को कवर करने के लिए पहुंचा था. संबित पात्रा ने पीएम मोदी के नाम से वोट मांग रहे थे. उन्हें पता था पुरी से जीतना इतना आसान नहीं है.

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पिनाकी के जीत के कारण
पिनाकी मिश्र पिछले 10 साल से पुरी से सांसद हैं. कुल-मिलाकर तीन बार सांसद रह चुके हैं. 1996 में भी यहां कांग्रेस टिकट से जीते थे.लेकिन इस बार पुरी के जनता पिनाकी से खुश नहीं थी. कई लोगों में यह आरोप लगाया था कि पिनाकी लोगों से नहीं मिलते हैं. पुरी में बारिश के वजह से भर जाने वाले पानी को बाहर निकालने के लिए कोई इंतजाम नहीं करवाए. लोगों का यह भी कहना था पुरी में भू-माफिया बढ़ गए हैं. इसके बावजूद भी पिनाकी के वोट में कमी नहीं हुई इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जो थी वो है नवीन पटनायक की लोकप्रियता. नवीन पटनायक ने चुनाव के कुछ ही दिन पहले पुरी में रोड शो किया था. नवीन ने ओडिशा के लोगों के लिए एक रुपया में जो चावल दे रहे हैं उसे लोग काफी खुश हैं. नवीन की कालिया योजना से भी लोग खुश हैं. पिनाकी ने नवीन के नाम पर वोट मांगा. पिनाकी का हार मतलब नवीन का हार यह लोगों को समझाया गया. 



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