आम जनता को पॉलीटीशियनों पर भरोसा नहीं रहा, वादे करते हैं, पर पूरे नहीं होते : आतिशी

पूर्वी दिल्ली सीट पर आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी आतिशी ने कहा, पूर्ण राज्य का दर्जा मिले बिना नहीं सुलझेंगी दिल्ली की सभी समस्याएं

नई दिल्ली:

पूर्वी दिल्‍ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने आतिशी को उम्‍मीदवार बनाया है. उनका मुकाबला बीजेपी के गौतम गंभीर और कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली के साथ है. आतिशी जोरशोर से चुनाव प्रचार में लगी हैं और उन्‍होंने कल्‍याणपुरी इलाके में रोड शो किया. इस दौरान उन्‍होंने NDTV के रवीश कुमार से बात भी की.

पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुर इलाके में आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार आतिशी का रोडशो चला. यह रोड शो कम गली शो ज्यादा लगा. आतिशी संकरी गलियों में घूमीं. आतिशी के सामने बीजेपी से क्रिकेटर गौतम गंभीर हैं और कांग्रेस से हरविंदर सिंह लवली हैं. हम देखने के लिए इस इलाके में पहुंचे कि आतिशी के प्रचार अभियान में किस तरह की बातें हो रही हैं. पूर्वी दिल्ली का चुनाव एक तरह से दिल्ली यूनिवर्सिटी के नार्थ कैंपस का चुनाव है. आतिशी सेंट स्टीफेंस में पढ़ी हैं और गौतम गंभीर हिंदू कॉलेज के पढ़े हैं. अरविंदर सिंह लवली खालसा कॉलेज में पढ़े हैं. यह तीनों आसपास के कॉलेज हैं और ये तीनों यहीं के पूर्व छात्र हैं.

आतिशी को उम्मीदवारी में काफी बढ़त है. पिछले साल अगस्त में ही इनकी उम्मीदवारी का ऐलान आम आदमी पार्टी ने कर दिया था. गौतम गंभीर अभी-अभी बीजेपी में आए हैं और उनकी उम्मीदवारी का ऐलान अभी हुआ है. अरविंदर सिंह लवली कांग्रेस में थे, बीजेपी में चले गए और फिर कांग्रेस में आ गए हैं. वे अब पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार हैं. यह काफी बड़ा इलाका है, यहां 18 लाख से ज्यादा मतदाता हैं और दस विधानसभा क्षेत्र हैं.        

डॉ आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके आतिशी ने अपना रोडशो शुरू किया.  

आतिशी से बातचीत  

अगस्त 2018 में आपकी उम्मीदवारी का ऐलान हुआ था. उस वक्त आपने अपने लोकसभा क्षेत्र को घूमा था?   
-जी. वास्तव में हम पिछले कई महिनों से अपनी कॉन्स्टीट्यूएंसी में घूम रहे हैं. आम आदमी पार्टी इलेक्शन की तैयारी काफी पहले से करती है. हमारा कैंपेन मीडिया में दिखाने वाला नहीं होता. ग्राउंड पर हम पिछले छह-आठ महिने से रहे हैं. तकरीबन सारा एरिया एक बार से ज्यादा कवर हो गया है. लोगों के घरों में जाना, इनडोर मीटिंग करना, छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं करना...

बहुत से लोगों को मालूम नहीं है कि पूर्वी दिल्ली में कौन-कौन से इलाके हैं, कितनी विधानसभाएं हैं? हम आपका टेस्ट लेना चाहते हैं.
- बिल्कुल लीजिए. पूर्वी दिल्ली और हर लोकसभा क्षेत्र में 10 विधानसभाएं आती हैं. अगर आप नार्थ से शुरू करिए तो शहादरा, गांधी नगर, कृष्णा नगर, विश्वास नगर, लक्ष्मी नगर, पटपड़गंज, त्रिलोकपुरी, कुंडली, जंगपुरा, ओखला.

यह टेस्ट ठीक रहा, मैं सोच रहा था उम्मीदवार को पता नहीं होगा.
- हमारी पार्टी में पैराशूट उम्मीदवार नहीं आते. इस एरिया को कई बार कवर किया है.

आपकी उम्मीदवारी पहले घोषित हुई इसकी आपको बढ़त मिली है. अच्छा और चार इलाकों के नाम बताइए जिनका आपने पहले जिक्र नहीं किया.
- अगर आप शाहदरा चले जाइए तो ओल्ड सीमापुरी से शुरू होता है. उसके आगे इंडस्ट्रियल एरिया आता है. फिर गुढ़ई मोहल्ले वाला एरिया आता है. वहां से अम्बेडकर पार्क से होते हुए आप विश्वास नगर, कस्तूरबा नगर में आ जाते हैं.

लोग कहते हैं जो ऑक्सफोर्ड पढ़ने चला जाता है वह इंडिया भूल जाता है. तो मैं टेस्ट कर रहा था कि इनको पूर्वी दिल्ली का कितना पता है? आपको इसका लाभ मिलता है क्या कि आप ऑक्सफोर्ड गई हैं, स्कॉलर हैं?
- ऐसा कम ही होता है कि लोग वहां से पैसे वाली नौकरियां छोड़कर वापस आते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि असली एडवांटेज तो आम आदमी पार्टी के काम का है, जो काम आम आदमी पार्टी ने पिछले चार साल में किया है. समस्या यह है कि आम जनता को पॉलीटीशियन पर भरोसा नहीं रहा. वादे तो करते हैं, पर कुछ पूरे नहीं होते. आम आदमी पार्टी के काम से पिछले चार साल में जनता का इस पर भरोसा बना है.

बीजेपी वाले कहते हैं कि मोदी का ही नाम है, मोदी का ही भरोसा है.
-आप अभी सड़क पर चलकर पूछ लीजिए कि उनके बिजली के बिल का क्या हाल है. सरकारी स्कूलों का क्या हाल है. जब हम मोहल्ला क्लीनिक जाते हैं या सरकारी अस्पताल जाते हैं तो उसमें क्या बदलाव हुआ है. तो लोग जो बात आपसे कहेंगे, उसी से आपको क्लियर हो जाएगा. हमारी बात पर मत विश्वास कीजिए.
     
गलियों में घरों के सामने नालियां बह रही हैं. पहले जो सरकार थी तब नहीं बदला और अब आपकी सरकार में भी नहीं बदल रहा.
-देखिए, इसलिए हम दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. सन 2015 में जब हमने चुनाव लड़ा तो कहा हम पक्का मकान देंगे. लेकिन डीडीए ने बार-बार इस काम को रोका. डीडीए की जिम्मेदारी थी, डीडीए बना ही इसीलिए था कि वह दिल्ली के हर निवासी को एक अफोर्डेबल रेट पर घर दे.

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दिल्ली का जिस तरह से विस्तार हुआ है और यहां की सीवेज की जो समस्या है, उसके समाधान की क्षमता क्या सरकार में है? पैसे के हिसाब से और प्लान के हिसाब से भी.
-इसमें दो तरह के इशू हैं. एक यह इशू  है कि झुग्गियों का रीहेबिलिटेशन कैसे हो. पूर्वी दिल्ली को ही देखें तो यहां का 70-75 प्रतिशत हिस्सा अवैध है. इन एरिया में पिछले 15-20 साल से न पानी की लाइनें डलीं, न सीवर की लाइनें डलीं.  कच्ची कालोनियां हैं, जिनको बिल्कुल निग्लेक्ट किया गया है, बीसों साल से. अब वहां सीवर की लाइनें डलनी शुरू हुई हैं. अभी दिल्ली में 10 हजार सड़कों का काम चल रहा है. सीवर की लाइन डल रही है, पानी की लाइन डल रही है.

यह काम करने के लिए तो आपकी सरकार के पास पर्याप्त अधिकार हैं.
- जी. इसलिए यह काम अच्छे तरीके से हो रहा है. जिन 10 हजार सड़कों की बात कर रहे हैं वे सब कच्ची कालोनियों की सड़कें हैं. आप दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों और झुग्गियों के बारे में देखें तो वे एक पुरानी बीमारी की तरह हैं. ऐसा नहीं है कि वे एक दिन में ठीक हो जाएंगी. जब से आम आदमी पार्टी आई है, यह समस्याएं एक-एक कर हल होना शुरू हुई हैं. कॉलोनियों में पानी पहुंचा है, सीवर की लाइनें डलनी शुरू हुई हैं. दिल्ली में झुग्गी में रहने वाले बच्चे जिन सरकारी स्कूलों में जाते हैं, उनमें बहुत सुधार आया है. मोहल्ला क्लीनिक में दवाइयां फ्री मिलती हैं. लेकिन अभी भी ऐसी बहुत सारी समस्याएं हैं जो तब तक हल नहीं हो सकतीं जब तक दिल्ली को फुल स्टेट नहीं बनाया जाता.