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भोपाल हॉस्टल बलात्कार कांड : आरोपी अश्विनी शर्मा को सरकार ने दो साल में दिए छह लाख रुपये

मूक-बधिर छात्राओं से बलात्कार का आरोपी अश्विनी शर्मा लड़कों के लिए बने छात्रावास के नाम पर छात्राओं के हॉस्टल के लिए भी अनुदान लेता था

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भोपाल हॉस्टल बलात्कार कांड : आरोपी अश्विनी शर्मा को सरकार ने दो साल में दिए छह लाख रुपये

मूक-बधिर छात्राओं से बलात्कार करने का आरोपी अश्विनी शर्मा.

खास बातें

  1. एसआईटी कर रही जांच, गंभीर अनियमितता के बावजूद अनुदान कैसे मिला?
  2. सीएम ने गर्ल्स हॉस्टल मामले में सामाजिक न्याय विभाग से भी जवाब मांगा
  3. कांग्रेस ने सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव से इस्तीफा मांगा
भोपाल: भोपाल में मूक-बधिर छात्राओं के साथ छात्रावास में बलात्कार के मामले में नए तथ्य सामने आए हैं. पता लगा है कि मामले के मुख्य आरोपी अश्विनी शर्मा को पिछले दो साल में मध्यप्रदेश सरकार से छह लाख रुपये का अनुदान मिला है. उसका एक ही हॉस्टल कृतार्थ पंजीकृत था, लड़कों के लिए बने इस हॉस्टल के नाम पर उसे छात्राओं के छात्रावास के लिए भी अनुदान मिलता रहा. उसके पंजीकरण के दस्तावेज अभी तक नहीं मिल पाए हैं.

यह खुलासा विशेष जांच दल की जब्ती में मिले दस्तावेजों से हुआ है. एसआईटी प्रमुख राहुल लोढ़ा ने बताया कि "शर्मा को 2016 में 50,000 वहीं 2017 में 5.57 लाख रुपये का अनुदान मिला. अयोध्या बाईपास पर उसने छात्रों के लिए हॉस्टल खोला था उसी के दस्तावेजों के आधार पर अवधपुरी में स्थित छात्राओं के हॉस्टल के लिए उसे सरकारी मदद मिलती रही. एसआईटी अब जांच कर रही है कि दस्तावेजों में गंभीर अनियमितता के बावजूद उसे अनुदान कैसे मिला.

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गर्ल्स हॉस्टल मामले में अब सामाजिक न्याय विभाग से भी जवाब मांगा है. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में संयुक्त निदेशक स्तर के एक अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है. सामाजिक न्याय विभाग जनवरी 2018 के बाद से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्र को 4000 रुपये हर महीने वज़ीफा देता है. इससे पहले यह रकम 1800 रुपये प्रति माह थी.

इस मामले में कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव का इस्तीफा मांगा है. हालांकि भार्गव ने कहा है कि विभाग अनुदान राशि सीधे छात्रों को देता है और उसका हॉस्टलों से कुछ लेना देना नहीं है. भार्गव ने ये भी कहा कि ऐसे हॉस्टलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को समय-समय पर उनका निरीक्षण करना चाहिए . भार्गव ने यह भी कहा है कि ''हमने किसी भी एनजीओ को कोई अनुदान नहीं दिया. यह गरीब, एससी-एसटी छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति थी. विशेष रूप से दिव्यांग या दृष्टिहीन छात्रों को तकनीकी पाठ्यक्रमों में आगे बढ़ाने के लिए. हम यह रकम तकनीकी शिक्षा विभाग को देते हैं, जो इसे व्यक्तिगत छात्रवृत्ति की तरह छात्रों को देता है.''     

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इस बीच विपक्षी कांग्रेस ने फिर आरोप लगाया है कि अश्विनी शर्मा-सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं का करीबी है. पार्टी प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि उन्हें सत्ता के करीबी होने की वजह से ही अनुदान मिला..

शर्मा ने एसआईटी के सामने दावा किया कि उसके छात्रावास में 74 बच्चे रहते थे, जिसमें 53 लड़के और 21 लड़कियां थीं. इस मामले में कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता शोभा ओझा ने सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए सवाल किया कि एसआईटी ने अब तक केवल 4 बलात्कार पीड़ित लड़कियों के बयान क्यों दर्ज किए, जब वहां 70 से ज्यादा छात्र रह रहे थे.

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पुलिस ने आरोपी अश्विनी शर्मा के बैकग्राउंड के बारे में बताया कि वो कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट है. 2008 में उसे आईटी कारोबार में बड़ा नुकसान हुआ तो उसने किराने का काम शुरू किया. इसी दौरान वो मध्य प्रदेश के बाहर से छात्रों के संपर्क में आया और छात्रावास चलाना शुरू किया.


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