NASA ने अंतरिक्ष यानों के लिये ‘इंडियन टेक्नोलॉजी’ में दिखाई दिलचस्पी, इस ‘रिसर्चर’ ने खींचा ध्यान

राजस्थान के एक शोधार्थी द्वारा अंतरिक्ष यानों में गैस टर्बाइन इंजन में इस्तेमाल के लिये विकसित नये थर्मल स्प्रे कोटिंग प्रौद्योगिकी ने नासा के एक वैज्ञानिक का ध्यान आकर्षित किया है.

NASA ने अंतरिक्ष यानों के लिये ‘इंडियन टेक्नोलॉजी’ में दिखाई दिलचस्पी,  इस ‘रिसर्चर’ ने खींचा ध्यान

नासा ने अंतरिक्ष यानों के लिये इंडियन टेकनोलॉजी में दिखाई दिलचस्पी

खास बातें

  • NASA ने अंतरिक्ष यानों के लिये ‘इंडियन टेक्नोलॉजी’ में दिखाई दिलचस्पी
  • राजस्थान के ‘रिसर्चर’ ने नासा का ध्यान खींचा
  • थर्मल स्प्रे कोटिंग प्रौद्योगिकी ने नासा के एक वैज्ञानिक का ध्यान खींचा
जयपुर:

राजस्थान के एक शोधार्थी द्वारा अंतरिक्ष यानों में गैस टर्बाइन इंजन में इस्तेमाल के लिये विकसित नये थर्मल स्प्रे कोटिंग प्रौद्योगिकी ने नासा के एक वैज्ञानिक का ध्यान आकर्षित किया है. शोध में दिलचस्पी दिखाते हुए नासा के वैज्ञानिक जेम्स एल स्मियालेक ने डॉ. सतीश टेलर को पत्र लिखा. जोधपुर स्थित मेटलाइजिंग इक्विपमेंट कंपनी के अध्यक्ष एस सी मोदी ने बताया कि स्मियालेक ने जर्नल सेरामिक्स इंटरनेशनल एंड थर्मल स्प्रे बुलेटिन में शोध के प्रकाशित होने के बाद यह पत्र लिखा. 

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एमईसी में शोध एवं विकास (आर एंड डी) मुख्य वैज्ञानिक डॉ. टेलर ने नियंत्रित सेगमेंटेड यत्रिया स्टैबिलाइज्ड जिरकोनिया (वाईएसजेड) प्लाज्मा स्प्रेड कोटिंग प्रौद्योगिकी विकसित की. यह थर्मल स्प्रे कोटिंग की लागत तकरीबन 50 फीसदी तक घटा सकता है. डॉ. टेलर ने कहा, ‘‘सरल भाषा में कोटिंग में लंबवत दरार (सेगमेंटेशन) अंतरिक्ष यानों में इस्तेमाल गैस टर्बाइन इंजन के लिये लाभप्रद है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल शोधार्थी इस तरह की दरार बेहद महंगी प्रक्रिया के जरिये विकसित करते हैं और दरार कोटिंग डिपोजिशन प्रक्रिया के दौरान पैदा होती है और दरार पैदा होना नियंत्रित नहीं है.’’ 

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टेलर ने कहा कि उन्होंने नासा वैज्ञानिक के साथ अपना शोध पत्र साझा किया, जिन्होंने उन्हें इस बारे में ई-मेल लिखा था.