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Soorma Movie Review: दिलजीत दोसांझ की 'सूरमा' इश्क और हॉकी के बीच बुलंद हौसलों की इंस्पिरेशनल स्टोरी है

'सूरमा' मूवी रिव्यूः 'सूरमा (Soorma)' की कहानी हॉकी (Hockey) के सूरमा संदीप सिंह (Sandeep Singh) की है. 'सूरमा' का किरदार दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) ने निभाया है. मूवी रिव्यू में जानें कैसी है फिल्म.

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Soorma Movie Review: दिलजीत दोसांझ की 'सूरमा' इश्क और हॉकी के बीच बुलंद हौसलों की इंस्पिरेशनल स्टोरी है

'सूरमा (Soorma)' में दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू हॉकी खिलाड़ियों के रोल में हैं

खास बातें

  1. शाद अली हैं 'सूरमा' के डायरेक्टर
  2. तापसी पन्नू भी हैं फिल्म में
  3. दिलजीत दोसांझ ने निभाया है लीड किरदार
नई दिल्ली: Soorma Movie Review: 'सूरमा (Soorma)' की कहानी हॉकी (Hockey) के सूरमा संदीप सिंह (Sandeep Singh) की है. 'सूरमा' का किरदार दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) ने निभाया है. 'सूरमा' की कहानी शुरू होती है एक महिला हॉकी प्लेयर हरप्रीत कौर की जुबानी जो ये बताती है कि कोच की सख्ती की वजह से 9 साल की उम्र में संदीप ने हॉकी खेलना छोड़ दिया था लेकिन बड़ा होने के बाद हरप्रीत (तापसी पन्नू) के प्यार और उसे हासिल करने की वजह से वो हॉकी स्टिक उठाता है और इंडिया के लिए खेलता है. लेकिन एक हादसे की वजह से उसे गोली लगती है और वो चल-फिर नहीं पाता है, इस बार वो देश के लिए खेलना चाहता है और फिर से हिम्मत और मेहनत कर वो इंडिया के लिए खेलता है और जीत दिलाता है.

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'सूरमा' की कहानी अर्जुन पुरस्कार विजेता एक ऐसे सूरमा की है जिसकी प्रतिभा को उसका बड़ा भाई खेतों में पहचानता है और वो प्रतिभा है ड्रैग फ्लिक. संदीप ने 145.5 किलोमीटर की गति से ड्रैग फ्लिक कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था. ये कहानी दर्शकों के बीच लानी लाजिमी है जिसे निर्देशक शाद अली ने अच्छे से दिखाया है. कहानी की रफ्तार अच्छी है. बायोपिक होने के बावजूद फिल्म को मनोरंजक रखने की कोशिश की गई है जिसके लिए कास किरदार है एक कोच का जिसे विजय राज ने निभाया है. फिल्म की पटकथा और कई डायलॉग्स अच्छे हैं. संदीप सिंह की भूमिका को दिलजीत दोसांझ ने अच्छे से निभाया है. कहीं कहीं उनकी मासूमियत भरे दृश्य मनोरंजन देते हैं.

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फिल्म कहीं-कहीं थोड़ी ड्रैग या धीमी भी लगती है मगर मुझे लगता है कि कहानी और किरदारों को इस्टेब्लिश करने के लिए शायद जरूरी था. 'सूरमा' की एक और कमजोरी है और वो मुझे लगता है हॉकी के खेल को शूट करना. स्पोर्ट्स पर आधारित फिल्मों में अकसर मैच के दौरान एक्साइटमेंट देखा जाता है जैसे 'लगान', 'चक दे! इंडिया', 'सुल्तान' जैसी फिल्मों में तेज रफ्तार विजुअल देखे हैं. इसमें वो हिस्सा कमजोर या दांत तले उंगली दबाने वाला नहीं है. क्रिकेट प्रधान इस देश में ऐसे सूरमाओं की कहानी परदे पर आनी चाहिए. 2 घंटे 10 मिनट की ये फिल्म आपको बोर नहीं करती, ये जरूर बताती है कि प्रतिभा पहचानने की जरूरत है, हिम्मत और हौसले से कुछ भी नामुमकिम नहीं ये एक प्रेरणादायक कहानी है.

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रेटिंगः 3 स्टार
डायरेक्टरः शाद अली
कलाकारः दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू और विजय राज

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