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बाबरी केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वायरल होने लगा वाजपेयी का 25 साल पुराना ये वीडियो

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बाबरी केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वायरल होने लगा वाजपेयी का 25 साल पुराना ये वीडियो

बाबरी विध्वंस मामले में एलके आडवाणी पर मुकदमा चलाने के फैसले के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का पुराना भाषण वायरल. तस्वीर: फाइल

खास बातें

  1. बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी समेत 12 लोगों पर चलेगा मुकदमा
  2. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वाजपेयी का भाषण वायरल
  3. वाजपेयी ने यह भाषण 5 दिसंबर 1992 की शाम लखनऊ में दिया था
नई दिल्ली: बाबरी विध्वंस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत 12 लोगों पर आपराधिक साजिश का केस चलाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में रोजाना सुनवाई के आदेश दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्पेशल कोर्ट 2 साल में मामले की सुनवाई पूरी करे. वहीं केस को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने के बाद सोशल मीडिया पर #BabriMasjid के साथ भारी संख्या में ट्वीट हो रहे हैं. इन ट्वीटस के बीच पूर्व प्रधानमंत्री और आडवाणी के सबसे अच्छे दोस्त अटल बिहारी वाजपेयी का एक 25 साल पुराना भाषण काफी शेयर किया जा रहा है. बताया जाता है कि वाजपेयी ने यह भाषण 5 दिसंबर 1992 की शाम लखनऊ में दिया गया था. मंच पर उस समय उनके साथ आडवाणी भी थे और वहां भारी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता भी मौजूद थे.

वायरल हो रहे वाजपेयी के भाषण के अंश


मंच से अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं, 'सुप्रीम कोर्ट ने हमें, अधिकार दिया है कि हम कार सेवा करेंगे. रोकने का तो सवाल ही नहीं. कार सेवा करके सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश की अवेहलना नहीं होगी. कार सेवा करके सुप्रीम कोर्ट का सम्मान किया जाएगा. खुदाई बाद वहां जो नुकीले पत्थर निकले, उनपर तो कोई नहीं बैठ सकता, तो जमीन को समतल करना पड़ेगा. बैठने लायक बनाना पड़ेगा. यज्ञ का आयोजन होगा. मैं नहीं कल वहां क्या होगा...'

मालूम हो कि छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में भारी भीड़ ने मिलकर विवादित ढ़ाचे को गिरा दिया था. आरोप है कि बीजेपी नेताओं के उकसाने पर कार सेवकों ने विवादित ढ़ाचे को गिराया था. ये मामला काफी दिनों से अदालत में चल रहा है.

हालांकि बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती लगातार कहते रहे हैं कि उनकी ओर से किसी को भी नहीं उकसाया गया. वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा थी, जिन्हें संभालना मुश्किल हो गया था.
 


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