NDTV Khabar

OMG! जानिए क्या हुआ जब स्पेस में पहुंच गए थे बंदर, देखें फोटोज

अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के शुरुआती दौर की कुछ फोटोज सामने आई हैं. जहां दिखाया गया है कि स्पेस में बंदरों को भेजा जा रहा है.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
OMG! जानिए क्या हुआ जब स्पेस में पहुंच गए थे बंदर, देखें फोटोज

नासा ने 1948 से टेस्टिंग के तौर पर बंदरों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया था.

खास बातें

  1. नासा ने 1948 में ही बंदरों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया था.
  2. नासा को पहली सफलता1959 में मिस बेकर के स्पेस से लौटने पर मिली.
  3. मिस बेकर इस घटना के 15 साल बाद 1984 तक जिंदा रहीं.
नई दिल्ली:

अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के शुरुआती दौर की कुछ फोटोज सामने आई हैं. इन फोटोज में टेस्टिंग के लिए स्पेस में भेजे जाने वाले चिंपांजी और बंदरों को दिखाया गया है. बीते कुछ सालों में अमेरिका ने स्पेस में बाकी देशों को पीछे छोड़ते हुए अपना राज कायम कर लिया है, लेकिन 1950-60 का दौर में अमेरिका की नासा और सोवियत संघ की ‘रोस्कॉस्मस’ के बीच स्पेस में सबसे पहले पहुंचने की जंग छिड़ी थी. इसी रेस को जीतने के लिए नासा ने 1948 से टेस्टिंग के तौर पर बंदरों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया था. 

पढ़ें- नासा की खोज में मंगल पर बालू के संभावित स्रोत का पता चला​

ऐसे की जाती थी लॉंचिंग
1959 के दौर की कुछ फोटोज भी सामने आई हैं, जिनमें अलग-अलग बंदरों को स्पेस में जाने से पहले ट्रेनिंग लेते हुए दिखाया गया है. कुछ फोटोज में स्पेस से सही-सलामत वापस धरती पर पहुंचने वाले पहले बंदर मिस बेकर को भी दिखाया गया है. स्पेस की दुनिया में अपने प्रतिद्वंदी रोसकॉस्मस से आगे रहने के लिए नासा ने 1948 में ही बंदरों को स्पेस में भेजना शुरू कर दिया था.


पढ़ें- मंगल के अध्ययन से पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का मिल सकता है सुराग

टिप्पणियां

हालांकि, नासा को पहली सफलता 28 मई 1959 में मिस बेकर के स्पेस से सही-सलामत लौटने पर मिली. स्पेस से लौटने के बाद मिस बेकर के साथ भेजे गए एक और बंदर मिस एबल की सर्जरी के दौरान मौत हो गई, लेकिन मिस बेकर इस घटना के 15 साल बाद 1984 तक जिंदा रहीं. मिस बेकर को अमेरिकी सरकार ने सम्मान के तौर पर स्पेस एंड रॉकेट सेंटर में दफनाया था.

पढ़ें- अमेरिका के उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा, मनुष्य को फिर से चांद पर भेजेगा नासा​

देखें PHOTOS

 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa
 
nasa

इस एक्सपेरिमेंट के बाद ही नासा को स्पेस में इंसानों के जाने की उम्मीद दिखी. 1961 में हैम नाम के चिंपांजी को भेजने से पहले बकायादा ट्रेनिंग मुहैया कराई गई थी. यहां तक कि हैम को रॉकेट के लीवर्स तक ऑपरेट करने के लिए ट्रेन्ड किया गया था ताकि स्पेस की ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाई जा सके. करीब 9500 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाले रॉकेट में हैम ने 16 मिनट बिताए थे. कुछ कॉम्पलिकेशन के बावजूद हैम सही-सलामत धरती पर लौट पाया था.


Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement