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मनोरंजन भारती

पिछले ढाई दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय मनोरंजन भारती अपनी राजनीतिक पैठ और अपने राजनैतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। वे एनडीटीवी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में हैं जिन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव कवर किए हैं, देश के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए हैं और अलग-अलग अवसरों पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक ख़बरें ब्रेक की हैं।

  • बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की सरकार ना बन पाने पर उसका सारा ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ा जा रहा है. कांग्रेस को लेकर कहा जा रहा लिखा जा रहा है उसने महागठबंधन को नीचे की ओर खींचा है. इसलिए कांग्रेस के नजरिए से इस विधानसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करना जरूरी है.
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्णिया के धमदाहा की रैली में अपने उम्मीदवार के लिए वोट मांगते हुए कहा कि आज चुनाव का आखिरी दिन है और परसों चुनाव है और ये मेरा भी अंतिम चुनाव है.. अंत भला तो सब भला..
  • बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री 6 रैलियां कर चुके हैं. पहली रैली से ही जेडीयू नेताओं को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री चिराग पासवान पर कुछ बोलेंगे, मगर प्रधानमंत्री की 6 रैलियों के बाद भी जेडीयू के नेता ये जानने की कोशिश में लगे हैं कि चिराग पासवान को लेकर प्रधानमंत्री के मन में क्या है.
  • बीजेपी बिहार चुनाव के दौरान ये घोषणा कर रही है फिर थोड़े दिनों बाद बंगाल चुनाव को देखते हुए बंगाल में भी यही घोषणा करेगी. जो काम किसी भी सरकार का कर्तव्‍य होना चाहिए उसे बीजेपी अपने घोषणा पत्र में शामिल कर रही है. बीजेपी को पता है नीतीश के साथ वो इस चुनाव को नहीं जीत पाएंगे इसलिए अब जुमलेबाजी पर उतर आए हैं.
  • बिहार में चुनाव धीरे-धीरे रंग पकड़ता जा रहा है. जैसे-जैसे दिन बीतते जाऐंगे, बिहार की स्थिति और साफ होती जाएगी. जब चुनाव शुरू हुए थे तब लग रहा था कि एनडीए यानि BJP और JDU गठबंधन को आसानी से बहुमत मिल जाएगा, क्योंकि इस गठबंधन ने सोशल इंजीनियरिंग के तहत हम पार्टी के जीतन राम माझी और वीआईपी पार्टी के मुकेश साहनी को भी जोड़ लिया.
  • बिहार चुनाव में आखिरकार बीजेपी अपने ऐजेंडे पर आती दिख रही है. हालांकि कई लोगों का यह मानना है कि जेडीयू और बीजेपी गठबंधन को कोई खतरा नहीं है मगर बीजेपी हर चुनाव में हिंदु ध्रुवीकरण की कोशिशों से बाज नहीं आती है.
  • बिहार चुनाव (Bihar Elections) के बारे में अभी तक यह कहा जा रहा था कि यहां तीन बड़े दल हैं जिसमें से दो एक साथ हो गए तो चुनाव वही जीतेंगे. जैसे कि जेडीयू (JDU) और बीजेपी (BJP), या कहें पिछली बार जेडीयू और आरजेडी (RJD). मगर बिहार में जिस तरह के चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने अपने तेवर दिखाए हैं उससे बिहार का चुनाव दिलचस्प हो गया है. एक तो चिराग पासवान ने नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के अस्तित्व को ही नकारते हुए जेडीयू के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. चिराग की इस घोषणा के पीछे बीजेपी की भी रणनीति दिखाई दे रही है.
  • हाथरस में जो कुछ हुआ उससे पूरा देश सन्न है और सदमे में है. लोगों में इस वारदात को ले कर गुस्सा है. उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ए के जैन ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक क्राईम स्टेट बन चुका है. पुलिस की तरफ से कहा गया है कि सभी आरोपी हिरासत में हैं.
  • बिहार चुनाव के लिए राजनीति का शतरंज बिछ चुका है और सभी दलों ने अपना दांव खेलना शुरू कर दिया है. वैसे देखा जाए तो दो ही प्रमुख गठबंधन नजर आ रहे हैं एक बीजेपी-जदयू का एनडीए, जिसमें बीजेपी के साथ पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी है तो जेडीयू के साथ मांझी की हम पार्टी.
  • बिहार में अगले कुछ दिनों में पहले फेज के लिए नामांकन की प्रकिया शुरू हो जाएगी, लेकिन बिहार में राजनैतिक परिदृश्य अभी तक साफ नहीं हुआ है. एनडीए और महागठबंधन में अभी तक सहयोगी दलों को लेकर संशय बना हुआ है. एनडीए में चिराग पासवान ने पेच फंसाया हुआ है तो महागठबंधन में कांग्रेस और वाम दलों ने. दोनों गठबंधन में सभी दल ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं.
  • Bihar Assembly Elections: बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. 28 अक्टूबर,3 और 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 10 नवंबर को वोटों की गिनती होगी. चुनाव आयोग ने इस बार कोरोना को देखते हुए बड़ी संख्या में मास्क,सेनेटाइजर और दस्तानों की व्यवस्था की है. मगर सवाल अभी भी वही बना हुआ है कि इस वक्त चुनाव कराने की क्या जरूरत थी. कोरोना के इस काल में दुनिया के करीब 60 देशों ने अपने चुनाव टाल दिए हैं तो बिहार में चुनाव के लिए इतनी हड़बड़ी क्यों की गई? आखिर इससे किसको फायदा हो रहा है ? कौन है वो जो इस चुनाव के लिए जोर लगा रहा है ? ये बात यहां इसलिए महत्वपूर्ण है कि चुनाव आयोग से चुनाव टालने का अनुरोध विपक्षी दल जैसे आरजेडी और कांग्रेस ने तो किया ही था एनडीए में शामिल रामविलास पासवान की लोक जन शक्ति पार्टी ने भी किया था.
  • कांग्रेस का लेटर बम मामला अभी तक खत्म नहीं हुआ है. हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में कहा था अब इस मामले पर कोई बात नहीं करेगा और पार्टी को इससे निकल कर आगे बढना चाहिए. मगर कांग्रेस में अभी भी सब ठीक-ठाक नहीं है. यह तो उसी दिन पता चल गया था जब कांग्रेस कार्य समिति की औपचारिक बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद के घर पर उन नेताओं की बैठक हुई जिन्होने चिट्ठी पर दस्तखत किए थे और अब गुलाम नबी ये कह रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव होना चाहिए और साथ में कांग्रेस कार्य समिति का भी चुनाव हो. यही नहीं ब्लॉक लेवल से उपर तक नियुक्ति चुनाव के बाद ही हो. आजाद ने यह भी कहा कि हमारी मंशा कांग्रेस को मजबूत करने और उसको सक्रिय करने की है.
  • राजस्थान में 33 दिनों से चल रहे संकट में अचानक एक नया मोड़ आया है. बताया जा रहा है सचिन पायलट और राहुल गांधी की मुलाकात हुई है जिसमें प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं. अब जो खबरें सचिन पायलट कैंप से आ रही हैं उनकी मानें तो राहुल गांधी ने पायलट को भरोसा दिलाया है उनकी सम्मानजनक घर वापसी होगी.
  • अभी तक यह आरोप कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए राज्यपालों पर लगते रहे हैं मगर हाल के वर्षों में एनडीए शासन द्वारा राज्यपालों ने सभी को पीछे छोड दिया है. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड का उदाहरण तो दे ही चुका हूं. राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रभी इसका सबसे ताजा उदाहरण है, जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं मगर राज्यपाल महोदय को यह नागवार गुजर रहा है.
  • राजस्थान में सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पीछे लगे हुए हैं तो सचि पायलट के पीछे राजस्थान की की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी लगी हुई है. दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने अशोक गहलोत के करीबियों के पीछे ईडी या प्रवर्तन निदेशालय और इनकम टैक्स को लगाया हुआ है.
  • राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सत्ता का संघर्ष कई स्तरों पर चल रहा है. एक लड़ाई जयपुर में लड़ी जा रही है जहां जयपुर से तीस किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में कांग्रेस के विधायक जमे हुए हैं तो दूसरी तरफ गुड़गांव के एक रिसॉर्ट में सचिन के सर्मथक विधायक डटे हुए हैं. वहीं एक लड़ाई अदालत में भी लड़ी जा रही है जहां भारत के सबसे नामी गिरामी वकील जैसे हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं. मगर इस सबके बीच राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नदारद हैं..वे अपने गृह क्षेत्र झालावाड़ में हैं और जयपुर तक आने को राजी नहीं हैं.
  • राजस्थान में चल रहे सत्ता के शह और मात के खेल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को पटकनी दे दी है. मगर खेल अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि सचिन पायलट अभी भी कांग्रेस में हैं. गहलोत को राजस्थान में वहां की राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है वजह है कि गहलोत के पिता जादूगर थे और गहलोत ने भी बचपन में कुछ गुण उनसे सीखे हैं. यही वजह है कि हर बार वे अपनी सरकार बचा ले जाते हैं. कभी बीएसी तो कभी निर्दलीय तो कभी दोनों गहलोत को अपना सर्मथन दे देते हैं. 
  • प्रियंका गांधी को केंद्र सरकार ने बंगला खाली करने का नोटिस दिया है. सरकार नियमों का हवाला दे रही है कि यदि आपके पास एसपीजी की सुरक्षा नहीं है तो आप एक विशेष टाईप के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस नियम के तहत प्रियंका गांधी लोधी रोड के अपने 35 नंबर के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस सबकी शुरुआत उसी वक्त हो गई थी जब मौजूदा सरकार ने सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी. तब यह दलील दी गई थी कि अब उनके ऊपर उतना खतरा नहीं है. ये सब सरकार की एक समिति ने तय किया था. उसी वक्त यह भी तय किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री को भी अब एसपीजी की सुरक्षा नहीं मिलेगी.
  • पंजाब अब प्रवासी मजदूरों को वापस बुला रहा है. इसके लिए पंजाब सरकार ने रेल मंत्रालय को तो लिखा ही है, इस संदर्भ में पंजाब के इंडस्ट्री मंत्री ने भारत सरकार को भी पत्र लिखा है. मगर वह ट्रेनों का इंतजार नहीं कर रहे हैं. जाहिर है पिछली बार जब ये प्रवासी मजदूर अपने गांव जा रहे थे तब पंजाब का अनुभव उतना अच्छा नहीं रहा था. यही वजह है कि पंजाब सरकार ने मजदूरों को वापस लाने के लिए बसों का इंतजाम किया है. तीन बसें इन प्रवासी मजदूरों को लेकर वापस भी आ चुकी हैं.
  • महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम आए दो हफ्ते होने को आए, मगर अभी भी वहां सरकार बनती नहीं दिख रही है. महाराष्ट्र में साथ-साथ चुनाव लड़ने वाली BJP और शिवसेना अब आपस में इस तरह लड़ रही हैं, जैसे जन्म-जन्म की दुश्मन हों. दरअसल, दोनों दलों के नेताओं के बीच आपसी विश्वास इतना कम हो गया कि दोनों दलों के बीच बातचीत एक दम बंद है. ऐसा लगने लगा है, जैसे दोनों दलों के बीच संपर्क का कोई ज़रिया ही नहीं है. महाराष्ट्र के आंकड़े भी कुछ इसी तरह के हैं कि BJP और शिवसेना साथ आएं, तभी स्थिर सरकार बन और चल सकती है.
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