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मनोरंजन भारती

पिछले ढाई दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय मनोरंजन भारती अपनी राजनीतिक पैठ और अपने राजनैतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। वे एनडीटीवी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में हैं जिन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव कवर किए हैं, देश के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए हैं और अलग-अलग अवसरों पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक ख़बरें ब्रेक की हैं।

  • 2019 के लोकसभा चुनाव की लड़ाई को कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के घर तक ले गई है और इसी उम्मीद में कांग्रेस की पूरी कार्यसमिति गुजरात में इकट्ठा हुई है.
  • कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने पांव जमाने की कोशिश में लगी है. जब से पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा प्रियंका गांधी को मिला है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ज्योतिरादित्य सिंधिया को, दोनों ने अपने-अपने ढंग से कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए प्रियंका अपनी खास कोशिशों में जुट गई हैं. इसी रणनीति का हिस्सा है कि प्रियंका ने उत्तर प्रदेश के सभी छोटे-छोटे दलों की खोज खबर लेना शुरू कर दिया है.
  • बीजेपी ने तमिलनाडु में अपने गठबंधन की घोषणा कर दी है. एक ही दिन में महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु दूसरा राज्य है जहां बीजेपी ने गठबंधन बनाने में देरी नहीं की है. वहां बीजेपी और शिवसेना में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ में लड़ने पर सहमति बन चुकी है.
  • देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी राजनैतिक दलों ने युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है और जैसे जंग के मैदान में होता है लड़ाई के लिए एक लकीर सी खींच दी गई है...दोनों तरफ गठबंधन करने की होड़ सी लगी हुई है. एक-एक दल और एक-एक राज्य के हिसाब से नफे नुकसान का जायजा लेने के बाद पार्टियां आपस में बात कर रही हैं.
  • तीन दिनों के अपने लखनऊ प्रवास के दौरान प्रियंका ने दिन रात बैठकें करके करीब चार हजार कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. यदि उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर की माने तो प्रियंका ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के चार हजार कार्यकत्ताओं से मुलाकात कर इन ईलाकों के लिए एक खाका तैयार कर लिया है और उनके पास एक रणनीति भी है जो कांग्रेस को इन ईलाकों में फिर से जिंदा कर सकती है.
  • राहुल गांधी द्वारा लिए गए कुछ फैसले काफी चौंकाने वाले हैं, अंग्रेजी में जिसे कहते हैं आउट ऑफ बॉक्स आइडिया यानि लीक से हट कर लिया गया फैसला. हाल के दिनों में लिए गए ये सभी फैसले कांग्रेस के हित में जाते दिख रहे हैं..
  • हरियाणा के जींद का उपचुनाव अब महज एक विधायक चुनने का चुनाव नहीं रह गया है क्योंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला ने यहां से चुनाव लड़ने का फैसला कर इस उपचुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का बिषय बना दिया है.
  • प्रियंका गांधी ने आखिरकार ना-ना करते-करते हां कर ही दी. अब वे आधिकारिक तौर पर राजनीति में आ गई हैं और कांग्रेस की महासचिव बनाई गई हैं. प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का जिम्मा दिया गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 34 सीटें आती हैं जिनमें से करीब 16 सीटें ऐसी हैं जहां यदि ब्राह्मण और मुस्लिम एक साथ आ जांए तो पासा पलटा जा सकता है.
  • उत्तरप्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा ने साथ आकर कुछ ऐसा किया है जो करीब 25 साल पहले भी हुआ था, मगर इस बार इनका साथ आना काफी मायने रखता है. यह गठबंधन भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने वाला है. मायावती और अखिलेश दोनों ने अपने अहं को दरकिनार करते हुए साथ आने का फैसला लिया.
  • कांग्रेस ने शीला दीक्षित को एक बार फिर दिल्ली की कमान सौंप दी है. वैसे इस खबर की चर्चा कई दिनों से थी मगर जैसे ही यह खबर आई तो लोगों ने कई तरह के सवाल पूछने शुरू कर दिए कि इतनी उम्र में यह जिम्मेदारी क्यों? वैसे यह लाजिमी भी था क्योंकि शीला दीक्षित 80 को पार कर गई हैं और एक तरह से सक्रिय राजनीति से दूर हो गई थीं. मगर कांग्रेस के पास लगता है कोई चारा नहीं था.
  • संसदों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर वे अगड़ों को 10 फीसदी का आरक्षण देने की बात पर सत्र के आखिरी दिन चर्चा क्यों कर रहे हैं. जाहिर है कोई भी इस बिल का विरोध नहीं कर सकता इसलिए सबको मिलकर इस बिल को पारित कराना ही होगा. मगर सबके मन में एक ही सवाल है कि अब क्या...लोकसभा का चुनाव सिर पर है और क्या ऐसे और भी मामले आने वाले हैं जिनके लिए उनको तैयार रहना चाहिए?
  • छत्तीसगढ़ में एक चरण के चुनाव के बाद बसपा नेता मायावती ने यह साफ किया है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस से समान दूरी बनाकर रखेगी. हालांकि उनके ही सहयोगी अजीत जोगी ने एक दिन पहले यह पूछे जाने पर कि क्या जरूरत पड़ी जो बीजेपी को अपना सर्मथन दे सकते हैं. इस पर उन्होंने कहा था कि राजनीति में कुछ भी संभव है मगर बाद में वे अपने बयान से पलट गए. जाहिर है मायावती चुनाव परिणाम से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. जाहिर है इन चुनावों का 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी काफी असर पड़ने वाला है. सभी पार्टियों को पता है कि अभी तक छत्तीसगढ में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर एक फीसदी से भी कम होता है. ऐसे में यहां एक-एक वोट कीमती होता है.
  • बिहार में एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है...लोकसभा चुनाव के लिए हुए सीट बंटवारे में केवल दो सीटें मिलने से उपेंद्र कुशवाहा नाराज चल रहे हैं...कहा जा रहा है कि वे दिल्ली आ कर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने की कोशिश करेगें... उधर जेडीयू की तरफ से ताजा बयान यह है कि किसी के भी गठबंधन में आने या जाने से कोई भी फर्क नहीं पड़ता है, यानि जेडीयू ने यह तय कर लिया है कि मौजूदा एनडीए गठबंधन में कुशवाहा के लिए कोई जगह नहीं है...इसके पीछे का कारण समझना जरूरी है. आखिर नीतीश कुमार को उपेंद्र कुशवाहा क्यों पसंद नहीं हैं...वजह साफ है दोनों की राजनीति का आधार एक ही वोट बैंक है...
  • राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति की बिसात बिछ चुकी है. इसके साथ ही हमेशा की तरह नेताओं में भी इस पार्टी से उस पार्टी में जाने के लिए भगदड़ मची हुई है...नेताओं को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है खासकर चुनाव के संर्दभ में उन्हें चुनाव के ठीक पहले अंदाजा हो जाता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. इसके बाद वह उन पार्टियों के तरफ रुख करते हैं, जिसके बारे में उन्हें लगता है कि इस पार्टी की सरकार बनने वाली है...कुछ ऐसा ही राजस्थान कांग्रेस में हो रहा है...
  • कनार्टक में पांच सीटों पर उपचुनाव हुए हैं जिनमें से चार सीटों पर कांग्रेस-जेडीयू गठबंधन ने जीत दर्ज की है. कर्नाटक में विधानसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हुए जिसमें जामकंडी सीट को कांग्रेस के न्यामागौड़ा ने करीब 40 हजार वोटों से जीता. जबकि रामनगरम की सीट को मुख्यमंत्री की पत्नी अनिता कुमारास्वामी ने एक लाख वोटों के जीता.
  • राहुल गांधी और चंद्रबाबू नायडू का एक साथ आना फोटो खिंचवाना और साथ साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करना ये अपने आप में देश के मौजूदा हालात को बयान करने के लिए काफी है...साथ ही इस तस्वीर से कांग्रेस के तमाम सर्मथकों ने भी राहत की सांस ली होगी...यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि तेलुगू देशम पार्टी जैसे दलों का जन्म ही कांग्रेस विरोध के चलते हुआ था...
  • बिहार में बीजेपी ने भले ही जेडीयू से गठबंधन पक्का कर लिया हो मगर बाकी दलों के साथ अभी भी स्थिति साफ नहीं है. खासकर उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ. कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस कर कई बातों पर स्थिति साफ की है, जैसे बिहार में सीटों के बंटवारे पर वो प्रधानमंत्री से भी मिल सकते हैं.
  • सीबीआई के दो बड़े अफसरों के झगड़े में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ. दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर आलोक वर्मा के घर के बाहर से चार इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोगों को पकड़ लिया. हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया. मगर उनको यह कहकर पकड़ा गया कि वे आलोक वर्मा की जासूसी कर रहे थे.
  • सीबीआई पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और वो भी किसी छोटे-मोटे अफसर पर नहीं बल्कि सीबीआई के डायरेक्टर और उनके नंबर दो पर लगे हैं..और आरोप लगाने वाला भी कोई और नहीं वही नंबर एक और नंबर दो हैं. होड़ इस बात में लगी हुई है कि कौन सबसे बड़ा चोर है और किसने सबसे ज्यादा रिश्वत ली है.
  • बिहार में आखिरकार एनडीए के दलों के बीच गठबंधन हो गया. इस समझौते में सबको खुश करने की कोशिश जरूर की गई है खासकर जेडीयू को. लगता है कि बीजेपी आलाकमान फिलहाल नीतीश कुमार को नाराज नहीं करना चाहती है. यही वजह है कि बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में अपनी जीती सीटें भी जेडीयू के लिए छोड़ दी हैं.
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