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मनोरंजन भारती

पिछले ढाई दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय मनोरंजन भारती अपनी राजनीतिक पैठ और अपने राजनैतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। वे एनडीटीवी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में हैं जिन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव कवर किए हैं, देश के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए हैं और अलग-अलग अवसरों पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक ख़बरें ब्रेक की हैं।

  • राजस्थान में 33 दिनों से चल रहे संकट में अचानक एक नया मोड़ आया है. बताया जा रहा है सचिन पायलट और राहुल गांधी की मुलाकात हुई है जिसमें प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं. अब जो खबरें सचिन पायलट कैंप से आ रही हैं उनकी मानें तो राहुल गांधी ने पायलट को भरोसा दिलाया है उनकी सम्मानजनक घर वापसी होगी.
  • अभी तक यह आरोप कांग्रेस द्वारा नियुक्त किए गए राज्यपालों पर लगते रहे हैं मगर हाल के वर्षों में एनडीए शासन द्वारा राज्यपालों ने सभी को पीछे छोड दिया है. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड का उदाहरण तो दे ही चुका हूं. राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रभी इसका सबसे ताजा उदाहरण है, जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं मगर राज्यपाल महोदय को यह नागवार गुजर रहा है.
  • राजस्थान में सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पीछे लगे हुए हैं तो सचि पायलट के पीछे राजस्थान की की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी लगी हुई है. दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने अशोक गहलोत के करीबियों के पीछे ईडी या प्रवर्तन निदेशालय और इनकम टैक्स को लगाया हुआ है.
  • राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सत्ता का संघर्ष कई स्तरों पर चल रहा है. एक लड़ाई जयपुर में लड़ी जा रही है जहां जयपुर से तीस किलोमीटर दूर एक रिसॉर्ट में कांग्रेस के विधायक जमे हुए हैं तो दूसरी तरफ गुड़गांव के एक रिसॉर्ट में सचिन के सर्मथक विधायक डटे हुए हैं. वहीं एक लड़ाई अदालत में भी लड़ी जा रही है जहां भारत के सबसे नामी गिरामी वकील जैसे हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अभिषेक मनु सिंघवी एक-दूसरे से भिड़ रहे हैं. मगर इस सबके बीच राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया नदारद हैं..वे अपने गृह क्षेत्र झालावाड़ में हैं और जयपुर तक आने को राजी नहीं हैं.
  • राजस्थान में चल रहे सत्ता के शह और मात के खेल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को पटकनी दे दी है. मगर खेल अभी खत्म नहीं हुआ है क्योंकि सचिन पायलट अभी भी कांग्रेस में हैं. गहलोत को राजस्थान में वहां की राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है वजह है कि गहलोत के पिता जादूगर थे और गहलोत ने भी बचपन में कुछ गुण उनसे सीखे हैं. यही वजह है कि हर बार वे अपनी सरकार बचा ले जाते हैं. कभी बीएसी तो कभी निर्दलीय तो कभी दोनों गहलोत को अपना सर्मथन दे देते हैं. 
  • प्रियंका गांधी को केंद्र सरकार ने बंगला खाली करने का नोटिस दिया है. सरकार नियमों का हवाला दे रही है कि यदि आपके पास एसपीजी की सुरक्षा नहीं है तो आप एक विशेष टाईप के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस नियम के तहत प्रियंका गांधी लोधी रोड के अपने 35 नंबर के बंगले की हकदार नहीं हैं. इस सबकी शुरुआत उसी वक्त हो गई थी जब मौजूदा सरकार ने सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी. तब यह दलील दी गई थी कि अब उनके ऊपर उतना खतरा नहीं है. ये सब सरकार की एक समिति ने तय किया था. उसी वक्त यह भी तय किया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री को भी अब एसपीजी की सुरक्षा नहीं मिलेगी.
  • पंजाब अब प्रवासी मजदूरों को वापस बुला रहा है. इसके लिए पंजाब सरकार ने रेल मंत्रालय को तो लिखा ही है, इस संदर्भ में पंजाब के इंडस्ट्री मंत्री ने भारत सरकार को भी पत्र लिखा है. मगर वह ट्रेनों का इंतजार नहीं कर रहे हैं. जाहिर है पिछली बार जब ये प्रवासी मजदूर अपने गांव जा रहे थे तब पंजाब का अनुभव उतना अच्छा नहीं रहा था. यही वजह है कि पंजाब सरकार ने मजदूरों को वापस लाने के लिए बसों का इंतजाम किया है. तीन बसें इन प्रवासी मजदूरों को लेकर वापस भी आ चुकी हैं.
  • महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम आए दो हफ्ते होने को आए, मगर अभी भी वहां सरकार बनती नहीं दिख रही है. महाराष्ट्र में साथ-साथ चुनाव लड़ने वाली BJP और शिवसेना अब आपस में इस तरह लड़ रही हैं, जैसे जन्म-जन्म की दुश्मन हों. दरअसल, दोनों दलों के नेताओं के बीच आपसी विश्वास इतना कम हो गया कि दोनों दलों के बीच बातचीत एक दम बंद है. ऐसा लगने लगा है, जैसे दोनों दलों के बीच संपर्क का कोई ज़रिया ही नहीं है. महाराष्ट्र के आंकड़े भी कुछ इसी तरह के हैं कि BJP और शिवसेना साथ आएं, तभी स्थिर सरकार बन और चल सकती है.
  • लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर हो रही बहस के दौरान एक नए युवा सांसद को बोलने का मौका मिला. वह सांसद थे लद्दाख के 34 वर्षीय जामयांग सेरिंग नामग्याल. नामग्याल ने संसद में जोरदार भाषण दिया था और जब इस बार मैं लेह गया तो उनसे मिलने का मौका मिला. मैंने उनसे पूछा कि आखिर आप जैसे युवा सांसद को आर्टिकल 370 जैसे विषय पर बोलने का मौका कैसे मिला? नामग्याल का कहना था कि 'यह सच है कि संसद में युवाओं को बोलने का मौका कम मिलता है. इसके कई कारण हैं. युवाओं को अपने में आत्मविश्वास लाना होगा. उन्हें विषय को पढ़ना होगा. साथ ही उन्हें संसदीय नियमों की जानकारी लेनी होगी. मेरे साथ भी यही हुआ.'
  • दरअसल लेह के जिस होटल में रुका था वहां के मेस में काम करने वाले कर्मचारियों से बातचीत होने लगी. बातचीत में मालूम चला कि जो शख़्स वहां काम कर रहे हैं वो सारे बिहार-यूपी के लोग हैं.
  • जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रतिक्रिया हुई. एक तरफ़ कश्मीर घाटी में प्रतिबंध रहा वहीं जम्मू के लोग ख़ुश बताए जा रहे थे तो लेह-लद्दाख के इलाक़े में ख़ुशी के साथ लोगों के दिलों में आशंकाएं भी हैं.
  • भारत ने वेस्ट इंडीज दौरे के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी है. टीम का जो चयन किया गया है उसमें से दो बातें समझ में आ रही हैं, सबसे बड़ी बात है कि कप्तान विराट कोहली तीनों फार्मेट में खेलने वाले हैं. जिस भारतीय कप्तान के बारे में कहा जा रहा था कि वह शायद वेस्ट इंडीज के दौरे पर नहीं जाने वाले हैं और थोड़ा आराम करने वाले हैं मगर विराट ने इन सभी खबरों को विराम देते हुए न सिर्फ वेस्ट इंडीज जाने का फैसला किया बल्कि तीनों फार्मेट भी खेलेंगे.
  • कर्नाटक का नाटक रचा जा रहा है दिल्ली में. वहां की विधानसभा में जो कुछ भी हो रहा है, या कहें कर्नाटक के नेता जो कुछ भी कर रहे हैं, वह उनसे करवाया जा रहा है जिसमें महामहिम राज्यपाल भी शामिल हैं. ये सभी उस नाटक के पात्र हैं जिसकी पटकथा दिल्ली में लिखी जा रही है. इसमें जेडीएस-कांग्रेस सरकार की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष, या कहें वहां के स्पीकर अहम पात्र हैं, तो केन्द्र सरकार की तरफ से हैं राज्यपाल बजू भाई वाला. यह वही शख्स हैं जिन्होंने एक वक्त में विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी. अब यहां सब अपने-अपने आकाओं के हितों की रक्षा करते नजर आ रहे हैं. किसी को संविधान की रक्षा करने की फिक्र नहीं है.
  • संसद के गलियारे में इस बात को लेकर काफी चर्चा हो रही थी कि आखिर समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज शेखर ने अपना इस्तीफा क्यों दिया और इसके पीछे कारण क्या हो सकते हैं..संसद के संसदीय कक्ष में इस बात पर सांसद गहन चर्चा में दिखे. कुछ ने कहा कि यह कैसे संभव हो सकता है, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सांसद बेटे के आगे ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने एक धुरी की राजनीति करते हुए एकदम से दूसरी धुरी की राजनीति का दामन थाम लिया. खुद नीरज शेखर भी अपने पुराने दोस्तों के सामने थोड़े झेंपे से नजर आ रहे थे..कई लोगों ने उनको कहते सुना कि मैं आपको अलग से बताऊंगा कि मैंने यह फैसला क्यों लिया.
  • क्रिकेट वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल के लिए टीमों में अभी भी जोर आजमाईश चल रही है. केवल ऑस्ट्रेलिया और भारत के सेमीफाइनल तक पहुंचने की राह आसान लग रही है मगर बाकी दो स्‍थानों के लिए बाकी टीमों में कांटें की टक्कर है, खासकर चौथे स्थान के लिए.
  • इंग्‍लैंड में हो रहे मौजूदा वर्ल्ड कप को लेकर दो बातें काफी चर्चा में हैं एक है इंग्‍लैंड की बारिश और दूसरा है वर्ल्ड कप में प्रयोग में की जा रही गिल्लियां (Bails)जो गिरती नहीं है...बारिश का साया इस बार के वर्ल्ड कप पर बुरी तरह पड़ा है. इस बारिश की वजह से श्रीलंका के दो मैच और वेस्ट इंडीज,बांग्लादेश, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के एक-एक मैच रद्द हो चुके हैं.
  • कांग्रेस से यह खबर आ रही है कि राहुल गांधी से अलग पार्टी किसी और को अध्यक्ष बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है और नए पार्टी अध्यक्ष की खोज भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की माने तो पार्टी का नया अध्यक्ष गैर गांधी होगा यानी नए अध्यक्ष का गांधी परिवार से कोई लेना देना नहीं होगा. साथ ही अगले दो से तीन महीनों में इसकी घोषणा की जाएगी.
  • मायावती ने एकला चलो रे का एलान कर दिया है मतलब उत्तर प्रदेश में जो 11 उपचुनाव होन वाले हैं उसमें बीएसपी अपने उम्मीदवार खड़े करेगी मगर जो तर्क मायावती ने दिए उसकी जांच पड़ताल करनी जरूरी है. मायावती ने कहा कि उनके एकला चलो रे के पीछे वजह है कि समाजवादी पार्टी के वोट बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं मिले.
  • नीतीश कुमार का कहना था कि जब अकाली दल के पास दो सांसद हैं और उन्हें एक मंत्री पद मिल रहा है और रामविलास पासवान की पार्टी के पास छह सांसद हैं और उन्हें एक कैबिनेट का पद मिल रहा है, तो जेडीयू के पास 16 सांसद हैं, उन्हें किस आधार पर एक ही कैबिनेट मंत्री पद दिया जा रहा है.
  • यही नहीं नजफगढ़ से केजरीवाल सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत भी तीसरे नंबर पर हैं, यहां कांग्रेस को लोकसभा के वोटों के अनुसार 23 हजार 354 वोट मिलेगें तो आप को 22 हजार 302 वोट. यदि इन आकंड़ों के आधार पर विधानसभा के क्षेत्रवार सीटों से मिलान किया जाए तो दिल्ली की 70 सीटों में से बीजेपी 65 सीट जीत सकती और कांग्रेस 5 सीटें जबकि आम आदमी पार्टी का खाता भी नहीं खुलता दिख रहा है.
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