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मनोरंजन भारती

पिछले ढाई दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय मनोरंजन भारती अपनी राजनीतिक पैठ और अपने राजनैतिक विश्लेषणों के लिए जाने जाते हैं। वे एनडीटीवी के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में हैं जिन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव कवर किए हैं, देश के तमाम बड़े नेताओं के इंटरव्यू लिए हैं और अलग-अलग अवसरों पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक ख़बरें ब्रेक की हैं।

  • राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन इसी 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं और इसी के साथ नए उपसभापति को लेकर सियासत तेज हो गई है. सरकार की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वह भी इस पद के लिए उम्मीदवार उतारने वाली है, जबकि कांग्रेस की तरफ से ये संकेत मिल रहे हैं कि वो अपना उम्मीदवार तो नहीं उतारेगी मगर विपक्ष की तरफ से अगर कोई दल उम्मीदवार देता है तो उसे अपना सर्मथन दे सकती है.
  • खेल के 16वें मिनट में जैसे ही मेसी को गेंद मिली उसने पहले उसे अपने जांघों पर लिया और फिर डिफेंडर को मात देते हुए बायें पांव से ऐसा गोल दागा कि सबके मुंह से निकला होगा वाह क्या गोल है मेसी द मैजेसियन .मेसी का इस फीफा वर्ल्डकप में यह पहला गोल था. वैसे भी फीफा वर्ल्डकप के शुरू होने से पहले ही इस बात की चर्चा होने लगी थी कि रोनाल्डो के अधिक गोल होंगे कि मेसी के.जाहिर सी बात है कि मेसी से रोनाल्डो काफी निकल गए हैं.
  • बिहार में जेडीयू और बीजेपी गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. 2019 चुनाव से पहले अपनी-अपनी ताकत का बखान करने के लिए बयानबाजी तेज है. सबसे ताजा बयान जेडीयू के महासचिव संजय सिंह का है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया है कि बीजेपी बिना नीतीश कुमार के 2019 का चुनाव नहीं जीत सकती और यह बात बीजेपी भी जानती है. उन्होंने यह भी कहा कि 2014 और 2019 में हालात में काफी अंतर है. संजय सिंह यहीं नहीं रुकते हैं. उन्होंने आगे कहा है कि बीजेपी सभी 40 सीटों पर लड़ने के लिए स्वतंत्र है.
  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान आया है कि वे राज्य में शराबबंदी कानून में बदलाव करना चाहते हैं. जाहिर है हाल के उपचुनावों में हार के बाद नीतीश कुमार अब अपनी रणनीति में बदलाव करना चाहते हैं.
  • उपचुनाव में बीजेपी के प्रदर्शन के बाद अब उसके सहयोगी दल अपनी ताकत दिखाने में लग गए हैं. एक तरफ बिहार में जेडीयू ने इसकी शुरूआत कर दी है. जेडीयू के नेता नीतीश कुमार को गठबंधन का बड़ा भाई बता रहे हैं जबकि बिहार में जेडीयू के पास केवल 2 सांसद हैं और बीजेपी के पास 22 सांसद.
  • बिहार में लोकसभा चुनाव से पहले जोर आजमाईश शुरू हो गई है. जेडीयू और बीजेपी के नेताओं के तरह-तरह के बयान आ रहे हैं. कई चीजें ऐसी हैं जो नीतीश कुमार को चुभ रही हैं. जैसे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा ना मिलना. यह एक ऐसा मुद्दा है जो नीतीश कुमार के लिए काफी संवेदनशील है और जरूर उनके मन में इस बात की टीस रहती होगी कि बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद भी बिहार को ये पैकेज नहीं मिल पाया.
  • कैराना लोकसभा उपचुनाव में आरएलडी की जीत की संभावना तो पहले से थी मगर अब यह पक्का हो गया है कि संगठन में ही शक्ति है. यहां का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह चुनाव समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने मिल कर चुनाव लड़ा था और बीजेपी से उसकी सीट छीन ली. 
  • सवाल सबसे बड़ा ये है कि यदि सरकारें विभिन्न प्रकार के टैक्स से इतना कमा रही हैं तो वह जनता को राहत क्यों नहीं दे सकतीं. यदि कर्नाटक चुनाव के समय 19 दिनों तक तेल के दाम नहीं बढ़े तो एक पैसे की राहत देना कैसी राहत है.
  • कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस गठबंधन ने सबसे पहले अपना विधानसभा अध्यक्ष चुन लिया. केआर रमेश पांच बार जीते विधायक हैं और पिछली सिद्धारमैया सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे. रमेश कुमार 1994 से 1999 के बीच विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं. इस तरह आप कह सकते हैं कि कर्नाटक सरकार पर लगातार कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए जा रही है.
  • इन प्‍लेयर्स में टॉप पर हैं ऋषभ पंत, उम्र 20 वर्ष..अब जरा इनके रिकॉर्ड को देखें ..आईपीएल की 14 पारियों में सर्वाधिक 684 रन बनाए. यही नहीं, पूरे आईपीएल में सबसे अधिक छक्के मारने का रिकॉर्ड भी पंत के ही नाम है उन्‍होंने आईपीएल 2018 में 37 छक्के मारे हैं. उनके रूप में एक ऐसा खिलाड़ी उभरा है जिसको लेकर भारतीय क्रिकेट काफी आशावान होगा.
  • सरकार के मुखिया भले ही एचडी कुमारस्वामी हों, मगर कांग्रेस बागडोर अपने हाथ में रखने वाली है. दो उपमुख्यमंत्री कांग्रेस के होंगे, जिनमें से एक दलित और एक लिंगायत होगा. मंत्रियों में भी अधिक लोग कांग्रेस के ही होंगे. यानी, सरकार अच्छा काम न करे, तो बदनामी मुख्यमंत्री की और सब ठीकठाक हुआ, तो वाहवाही सबकी. मगर इतना सब होने के बावजूद कर्नाटक का प्रयोग भारतीय राजनीति के लिए संभावनाओं के कई दरवाज़े खोल रहा है.
  • सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक मामले पर रात भर सुनवाई चली. अक्सर अदालतें रात भर नहीं बैठतीं..यह विरले होता है. मेरे करीब 25 साल के पत्रकारिता के कैरियर में यह दूसरी बार हुआ है.
  • कर्नाटक में इस बात पर बहस चल रही है कि किस पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दिया जाए. BJP राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुकी है. BJP को लगता है, बड़ी पार्टी होने के नाते उसे सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए.
  • कर्नाटक में दलित और आदिवासी सीटों की संख्या कुल 224 में से 51 है जिनमें 36 दलित और 15 आदिवासी सीटें हैं. 36 दलित सीटों में से कांग्रेस के पास 17, जेडीएस के पास 10 और बीजेपी के पास 6 सीट है. जबकि 15 आदिवासी सीटों में कांग्रेस के पास 9, जेडीएस और बीजेपी के पास एक-एक सीट है.
  • कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में से BJP ने 68 सीटें लिंगायत समुदाय के लोगों को दी हैं, वहीं कांग्रेस ने 49 और JDS ने 41 सीटें इस समुदाय को दी हैं. जबकि दूसरी बड़ी जाति वोक्कालिगा पर JDS की पकड़ है, क्योंकि देवेगौड़ा इसी जाति से आते हैं. JDS ने वोक्कालिगा समुदाय के 55 लोगों को टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने 46 और BJP ने 38 सीटें इस समुदाय को दी हैं.
  • राहुल गांधी ने एक तरह से ऐलान कर दिया है कि 2019 में वे प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं. हालांकि उनके इस बयान का बीजेपी नेता काफी मखौल बना रहे हैं. मगर सबसे बडा सवाल है कि क्या यह संभव है और यदि यह संभव करना है तो कांग्रेस को अकेले 100 से अधिक सीटें जीतनी होंगी.
  • सबसे बड़ा दांव खेला है मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने. उन्होंने लिंगायत को एक अलग धर्म का दर्जा देते हुए उसे अल्पसंख्यकों में शामिल करने की घोषणा कर दी. कई लोग इसे बड़ा राजनैतिक जुआ बता रहे हैं.
  • उत्तर प्रदेश के कैराना में होने वाला उपचुनाव यह तय करेगा कि 2019 के लोकसभा चुनाव की क्‍या दिशा होगी. यह तय हुआ है कि कैराना का उपचुनाव राष्ट्रीय लोक दल लड़ेगा यानी जयंत चौधरी वहां पर अपना उम्मीदवार उतारेंगे. अभी तक सपा और बीएसपी के ही गठबंधन की बात हो रही थी मगर अब इसमें राष्ट्रीय लोकदल भी जुड़ गया है.
  • प्रधानमंत्री पहले यहां 15 रैलियां करने वाले थे अब वे 21 रैलियां करेंगे. यानि बीजेपी ने सबकुछ दांव पर लगा दिया है यहां तक की प्रधानमंत्री को भी. मगर सबसे बडा सवाल उठता है कि आखिर कर्नाटक बीजेपी के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है.
  • संसद के केन्द्रीय कक्ष यानी सेंट्रल हॉल में कुछ पत्रकारों और कुछ नेताओं के बीच इस बात पर बहस छिड़ी हुई थी कि मौजूदा हालात में राहुल गांधी का राजनैतिक ग्राफ ऊपर जा रहा है या फिर प्रधानमंत्री का ग्राफ नीचे. कुछ पत्रकार इस थ्योरी को सही साबित करने में लगे थे मगर बीजेपी नेताओं को यह नागवार लग रहा था.
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