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पीएम मोदी क्या कर्नाटक में भी गुजरात वाला दांव चलने की कोशिश में हैं?

कर्नाटक में सीएम सिद्धारैमया की एक चाल ने सियासी गुणा-गणित को बदल कर रख दिया. अब आखिरकार बीजेपी को एक बार फिर से पीएम मोदी का ही सहारा लेना पड़ा. 

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पीएम मोदी क्या कर्नाटक में भी गुजरात वाला दांव चलने की कोशिश में हैं?

पीएम मोदी कर्नाटक में भी एजेंडा तय करने की कोशिश में हैं.

बंगलोर: कर्नाटक विधानसभा चुनाव  प्रचार के शुरुआत में कहा जा रहा था. ये चुनाव पीएम मोदी और कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के कामों के बीच होगा. कर्नाटक के सीएम ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देकर गेंद मोदी सरकार के पाले में डाल दी. कर्नाटक में लिंगायत बीजेपी का ही वोट बैंक माने जाते हैं और बीजेपी की ओर से सीएम पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं. लेकिन सिद्धारैमया के मास्टर स्ट्रोक के आगे बीजेपी को कोई जवाब नहीं सूझ रहा था. उधर राहुल गांधी ने भी चुनाव प्रचार की शुरुआत में ही मंदिर-मठों और लिंगायत संतों के आशीर्वाद के साथ आगाज किया. इसी बीच चुनावी सर्वे भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर दिखा रहे थे. बीजेपी को लग रहा था कि उसे सत्ता विरोधी लहर का फायदा मिलेगा. लेकिन सिद्धारैमया की एक चाल ने सियासी गुणा-गणित को बदल कर रख दिया. अब आखिरकार बीजेपी को एक बार फिर से पीएम मोदी का ही सहारा लेना पड़ा. 

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पीएम मोदी ने अभी तक के चुनाव प्रचार में वही दांव खेला है जो उन्होंने गुजरात में चला था. यानी कांग्रेस को अपनी 'पिच' पर खेलने के लिए मजबूर करना. पीएम मोदी ने कई ऐसे बयान दिये हैं जिनका जवाब देने में कांग्रेस लगी है. भले ही पीएम मोदी के भाषणों में कई तथ्यात्मक गलतियां हों फिर भी कांग्रेस अपने मुद्दों को छोड़कर मोदी की बातों में उलझी हुई है. कुल मिलाकर चर्चा में चुनाव प्रचार के केंद्र में एक बार फिर से पीएम मोदी और उनके बयान हैं. हर चुनाव में पीएम मोदी यही दांव अपनाते हैं और पूरे चुनाव का एजेंडा का खुद ही तय करते हैं. 

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'भ्रष्टाचार में गोल्ड मेडलिस्ट कर्नाटक की सरकार'
कांग्रेस से सत्ता छीनने के प्रयास में भाजपा के प्रचार को बढावा देने के लिए पीएम मोदी ने तीन चुनावी जनसभाओं को, जबकि राहुल गांधी ने अपनी चुनावी यात्रा के दौरान चार जनसभाओं को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य की राजधानी बेंगलुरु में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार भ्रष्टाचार में 'गोल्ड मेडलिस्ट' है और कांग्रेस नेता 'सत्ता के नशे में चूर' हैं. जबकि बीजेपी सीएम पद के प्रत्याशी बीएस येदियुरप्पा पर खुद ही भ्रष्टाचार का आरोप है और वो जेल भी जा चुके हैं. 

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15 मिनट बोलने का चैलेंज
राहुल गांधी ने कहा था कि अगर उनको 15 मिनट बोलने का मौका दिया जाए तो वह नीरव मोदी, राफेल डील जैसे मुद्दों पर पीएम मोदी को ठहरने नहीं देंगे. इस बात का जवाब पीएम मोदी ने बड़ी ही चालकी से दिया और कर्नाटक में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी 15 मिनट बोलते हैं तो बड़ी बात होगी. उन्होंने कहा चुनौती देते हुये कहा कि अगर राहुल गांधी हिंदी-अंग्रेजी या अपनी मां की मातृभाषा में बिना कागज पढ़े बोलते हैं तो पता लग जायेगा किसकी बातों में किसका दम है. इतना ही नहीं उन्होंने शर्त रखा कि 15 मिनट के भाषण में वो 5 बार श्रीमान विश्वसरैया भी बोलकर दिखायें.

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'सर्जिकल स्ट्राइक' की बात
पीएम मोदी अब हर चुनाव में सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठाते हैं और कहते हैं कि देश के जवानों पर कांग्रेस को भरोसा नहीं है. सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत मांगती है. 

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खनन के मुद्दे पर उल्टे आरोप
बेल्लारी में जिन रेड्डी बंधुओं को बीजेपी ने टिकट दिया है उन पर खुद ही अवैध खनन का आरोप है और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेल्लारी में प्रचार करने से मना कर दिया है लेकिन पीएम मोदी ने उल्टे सीएम सिद्धारमैया पर आरोप लगाये हैं कि पांच साल में कर्नाटक की रुपया सरकार एक सही माइनिंग पॉलिसी भी नहीं बना पाई और पदयात्रा की ड्रामा करने वाले सत्ता में आते ही सब कुछ भूल गई.

वीडियो : पीएम मोदी का भाषण

सेना के अधिकारियों के अपमान की बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा और जनरल के थिमय्या का कांग्रेस सरकार ने अपमान किया था. पीएम ने कहा कि हमने 1948 की लड़ाई जनरल थिमय्या के नेतृत्व में जीती थी. जिस आदमी ने कश्मीर को बचाया, उसका प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और रक्षामंत्री कृष्ण मेनन ने अपमान किया. लेकिन 1947-48 की लड़ाई में भारतीय सेना के जनरल सर फ्रांसिस बुचर थे, न कि जनरल थिमय्या. युद्ध के दौरान जनरल थिमय्या कश्मीर में सेना के ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे. 1957 में सेनाध्यक्ष बने. 1959 में जनरल थिमय्या सेनाध्यक्ष थे. तब चीन की सैनिक गोलबंदी को लेकर रक्षामंत्री कृष्ण मेनन ने उनका मत मानने से इनकार कर दिया था. कुछ लोगों का कहना है कि तथ्यात्मक रूप से पीएम मोदी गलत साबित हुये लेकिन कांग्रेस भी उनकी इस बात पर उलझती नजर आई और मोदी की यही चाल है कि उनके बयान और बातें चर्चा के केंद्र में रहें. 


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