Mother's Day 2019: 'स्याही खत्म हो गयी 'मां लिखते-लिखते', पढ़ें मदर्स डे पर ऐसी ही 10 बेहतरीन शायरी...

Happy Mother's Day 2019: भारत  में आज यानी 12 मई को मदर्स डे (Mother's Day) मनाया जा रहा है. इस खास दिन पर सभी लोग अपनी मां के प्रति प्यार जताते हैं और उन्हें तमाम तरह के तोहफे देते हैं.

Mother's Day 2019: 'स्याही खत्म हो गयी 'मां लिखते-लिखते', पढ़ें मदर्स डे पर ऐसी ही 10 बेहतरीन शायरी...

Happy Mother's Day 2019: मदर्स डे पर पढ़ें 10 बेहतरीन शायरी...

नई दिल्ली:

Happy Mother's Day 2019: भारत  में आज यानी 12 मई को मदर्स डे (Mother's Day) मनाया जा रहा है. इस खास दिन पर सभी लोग अपनी मां के प्रति प्यार जताते हैं और उन्हें तमाम तरह के तोहफे देते हैं. आधुनिक मदर्स डे (Mother's Day) का अवकाश ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में एना जार्विस के द्वारा समस्त माताओं तथा मातृत्व के लिए खास तौर पर पारिवारिक एवं उनके आपसी संबंधों को सम्मान देने के लिए आरम्भ किया गया था. यह खास दिन दुनिया के हर कोने में अलग-अलग दिनों में मनाया जाता हैं. मदर्स डे  (Mother's Day)  वाले दिन कुछ लोग अपनी मां को बाहर घुमाते हैं तो कुछ पूरा दिन सिर्फ मां के साथ बिताते हैं. सभी लोग अपनी-अपनी तरह से इस दिन को सेलिब्रेट करते हैं. इस आधुनिक युग में कुछ लोग अपनी मां को मैसेज के जरिए मदर्स डे (Mother Day Quotes) की बधाई भी देते हैं. मदर्स डे (Mothers day shayari) पर आप शायरी के जरिए भी अपनी मां से प्यार जता सकते हैं. देखिए इस दिन के लिए खास शायरी...

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मदर्स डे शायरी (Mothers day shayari)....

1. ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूं मेरी मां सजदे में रहती है
- मुनव्वर राना

2. स्याही खत्म हो गयी 'मां लिखते-लिखते
उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी

3. न जाने क्यों आज अपना ही घर मुझे अनजान सा लगता है,
तेरे जाने के बाद ये घर-घर नहीं खाली मकान सा लगता है

4. तेरी ही आंचल में निकला बचपन
तुझ से ही तो जुड़ी हर धड़कन
कहने को तो मां सब कहते
पर मेरे लिए को है तू भगवान

5.उसके होंठो पर कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो कभी खफा नहीं होती


6.अभी ज़िंदा है मां मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा 
मैं घर से जब निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है 
-मुनव्वर राना


7. बहन की इल्तिजा मां की मोहब्बत साथ चलती है 
वफा-ए-दोस्तां बहर-ए-मशक़्कत साथ चलती है 
-सय्यद ज़मीर जाफ़री

8. बूढ़ी मां का शायद लौट आया बचपन 
गुड़ियों का अम्बार लगा कर बैठ गई 
-इरशाद ख़ान सिकंदर

9.घर से निकले हुए बेटों का मुक़द्दर मालूम 
मां के क़दमों में भी जन्नत नहीं मिलने वाली 
-इफ़्तिख़ार आरिफ़

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10. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई 
मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में मां आई 
-मुनव्वर राना

 

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