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देश में 'आर्थिक सुस्ती' के बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली करेंगे उच्चस्तरीय बैठक

इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार सहित वित्त मंत्रालय के सचिव अशोक लवासा, सुभाष चंद्र गर्ग, हसमुख अधिया, राजीव कुमार और नीरज कुमार गुप्ता के हिस्सा लेने की संभावना है. बैठक मंगलवार शाम आयोजित होनी है. 

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देश में 'आर्थिक सुस्ती' के बीच वित्तमंत्री अरुण जेटली करेंगे उच्चस्तरीय बैठक

देश की अर्थव्यवस्था पर चर्चा करेंगे वित्तमंत्री.

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद से लगातार देश की गिरती अर्थव्यवस्था पर जानकार सवाल उठाते चले आ रहे हैं, वही सरकार नोटबंदी को सफल बताने में लगी है. पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम आंकड़े विकास की धीमी गति को दर्शाते हैं.  केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली अर्थव्यवस्था को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे, जिसमें आर्थिक सुस्ती के बीच उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की जाएगी. इन कदमों में किसी संभावित प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा शामिल हो सकती है. इस बैठक में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार सहित वित्त मंत्रालय के सचिव अशोक लवासा, सुभाष चंद्र गर्ग, हसमुख अधिया, राजीव कुमार और नीरज कुमार गुप्ता के हिस्सा लेने की संभावना है. बैठक मंगलवार शाम आयोजित होनी है. 

पहले यह समीक्षा बैठक प्रधानमंत्री के साथ होनी थी. पिछले हफ्ते मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रह्मण्यम ने मोदी से मिलकर अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की थी. नोटबंदी के बाद विकास दर को लगा झटका, उसके बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत ढलने में परेशानी और ढुलमुल निजी निवेश से अर्थव्यवस्था की बुरी हालत को देखते हुए सरकार द्वारा कुछ वित्तीय प्रोत्साहन देने की बात कही जा रही है.

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विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की दर घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई है, जो साल 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद की सबसे कम दर है.  मुख्य सांख्यिकीविद् टी.सी.ए. अनंत ने कहा है कि पहली तिमाही में जीडीपी गिरकर 5.7 फीसदी पर इसलिए आई है, क्योंकि कंपनियों ने एक जुलाई को जीएसटी लागू होने से पहले सभी स्टॉक को खाली कर दिया था.

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रपटों में कहा गया है कि सरकार निर्यात को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और व्यापार घाटे को कम करने के लिए लघु और मध्यम अवधि दोनों तरह के उपायों पर विचार कर रही है, जो कि 2018-19 के केंद्रीय बजट में पेश किए जाने की संभावना है. हालांकि, इसके बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.


सरकार बैंकों और कॉरपोरेट के दोहरे बैलेंस शीट परि²श्य में सुधार के लिए कुछ गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) या फंसे हुए कर्जो के मामलों को हल करने पर भी विचार कर सकती है.
 


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