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फिल्म मेकिंग की पढ़ाई आपके करियर को दिला सकती है नई ऊंचाइयां

इस क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में कई नए तरीके की संभावनाएं बनी हैं

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फिल्म मेकिंग की पढ़ाई आपके करियर को दिला सकती है नई ऊंचाइयां

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली: आपको अगर सिनेमा बनाना पसंद है और आप इसके नए नए तरीके जानना जाहते हैं तो यह आपके लिए एक  बेहतर मौका है. दरअसल, मौजूदा समय में फिल्म मेकिंग एक बेहतर करियर विकल्प के तौर पर उभर रहा है. इस क्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में कई नए तरीके की संभावनाएं बनी हैं, जो खासकर युवाओं के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती हैं. लिहाजा आप फिल्म मेकिंग सीखकर अपने करियर को नई ऊंचाइयां दे सकते हैं. फिल्म मेकिंग को बेहतर तरीके से सिखाने के लिए आज कई कोर्स मौजूद हैं. इन कोर्स को करने के साथ आप अपने करियर को नई ऊंचाइयां दे सकते हैं. आइये जानते हैं क्या होता है फिल्म मेकिंग और इसके लिए कौन से कोर्स  हैं उपलब्ध.

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क्या होता है फिल्म मेकिंग
फिल्म मेकिंग एक कला है जिसके लिए एक बेहतर कैमरे की जरूरत होती है. फिल्म मेकिंग में स्क्रिप्ट के आधार पर की जाती है. इसमें चरित्र होते हैं, एक कहानी होती है, हर कहानी की एक भाषा होती है. फिल्म दृश्य होते हैं, ध्वनियों का दृश्यों के साथ मिलान होता है, स्पेशल इफेक्ट्स होते हैं और गीत-संगीत होता है. फिल्मों में क्रिएटिविटी और टेक्नोलॉजी का अनोखा मेल देखा जाता है. आज फिल्मों में नई-नई तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है. आज की इंडस्ट्री में फिल्मों के कई प्रकार हैं, जैसे डिजिटल फिल्म, 3डी फिल्म और आदि. हर एक फिल्म को रिलीज होने से पहले उसे सेंसर बोर्ड के सामने परखा जाता है. वहां से पास होने के बाद ही उसे आम जनता के लिए रिलीज की जाती है.  

इस तरह की योग्यता जरूरी
फिल्म मेकिंग को बेहतर तरीके से बताने के लिए आज कई पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं. बैचलर स्तर पर भी अलग-अलग संस्थान कोर्स कराते हैं. बैचलर कोर्स में दाखिला लेने के लिए न्यूनतम योग्यता बारहवीं है. जबकि पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट की डिग्री होना अनिवार्य है. साउंड एडिटिंग और कुछ अन्य तकनीकी कोर्सों में दाखिले के लिए साइंस बैकग्राउंड से ग्रेजुएट होना भी जरूरी है.

यहां हैं बेहतर मौके 

स्क्रीनप्ले
स्क्रीनप्ले आइडिया और कहानी के विकास के बाद का चरण है. इसके आधार पर ही फिल्म का फिल्मांकन होता है पटकथा लेखक/निर्देशक की मदद से  कहानी की पटकथा तैयार की जाती है. दरअसल पटकथा एक नहीं, अनेक हो सकती हैं जिसमें कैमरा पर्सन और अभिनेताओं समेत सभी जरूरी लोगों के लिए आवश्यकता के अनुरूप पटकथाएं तैयार की जाती हैं. बॉलीवुड में पटकथा लिखने के बजाए या फिर उस पर हू-ब-हू चलाने के बजाय वह लगातार बदलती रहती है. पटकथा की तैयारी के साथ-साथ डॉयलाग राइटर का आगमन होता है और निर्देशक की सलाह से दृश्यों का ध्वनि का मिलान करना किया जाता है. इसके बाद ही इससे जरूरी काट-छांट संभव हो पाती है. पटकथा में स्पेसिफिक्स यानी समय, लोकेशंस और सिचुएशन की सूचना अंग्रेजी में लिखी जाती है. 

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निर्देशन
फिल्मों में निर्देशन करना एक मल्टीटास्किंग काम है. फिल्म की पटकथा से लेकर संवादों की प्रस्तुति और कैमरे के संयोजन तक का काम एक निर्देशक को करना होता है. बॉलीवुड में पटकथा लेखन, संवाद लेखन और निर्देशन एक व्यक्ति द्वारा ही करने का चलन है. फिल्म निर्देशन में कॅरियर बनाने के लिए डिग्री के साथ फिल्मों की सभी विधा में कौशल हासिल करना होता है.
 
सिनेमेटोग्राफी 
फिल्म के शॉट से जुड़ा हुआ काम सिनेमेटोग्राफी कहलाता है. सिनेमेटोग्राफी  में मौलिक रूप से तीन शॉट और दो मूवमेंट होते हैं. शॉट क्लोज अप, मिड और लॉन्ग होता है, जबकि मूवमेंट पैन और टिल्ट. इसे शॉट और मूवमेंट फिल्म का व्याकरण कहा जाता है. अर्थ को पैदा करने में इनकी गहरी भूमिका होती है। सिनेमेटोग्राफर का प्रोफेशनल कोर्स एफटीआईआई समेत कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कराया जाता है. वहां से डिग्री लेकर आप अपने कॅरियर को एक नया मुकाम दे सकते हैं. 

संगीत
संगीत बनाने में विभिन्न लोगों की मेहनत लगती है. फिल्म की संगीत में गीतकार, संगीतकार या संगीत निर्देशक, गायक, रिर्काडिस्ट (साउंड मैनेजर), साउंड एडिटर की मुख्य भूमिका होती है. इन सभी के बेहतर संयोजन से गाना बनता है. पहले संगीतकार या संगीत निर्देशक आर्केस्ट्रा के साथ गायक को रिकॉर्ड करते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल चुकी है. अब गायक रॉ सांग (कच्चा गाना) गा देते हैं, संगीत रिर्काडिस्ट, संगीतकार/ संगीत निर्देशक और साउंड एडिटर मिलकर गाने को कंपोज करते हैं. इस क्षेत्र में क्रिएटिव और मल्टीटैलेंटेड लोगों की काफी मांग है. 

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कोरियोग्राफी
कोरियोग्राफी का बॉलीवु़ड फिल्मों में विशेष महत्व है. पारंपरिक तौर विभिन्न प्रकार के शास्त्रीय नृत्य में निपुण लोग फिल्मों के कोरियोग्राफर होते थे लेकिन फिल्मों में पाश्चात्य नृत्य कला, एरोबिक आदि के आने के बाद इसके स्वरूप में विस्तार हुआ है. आजकल विभिन्न प्रकार की नृत्य शैलियों का एक साथ संयोजन करने वाले कलाकार इसमें सफल हो रहे हैं. इस क्षेत्र में हमेशा कुछ नया करने की चुनौती बनी रहती है.
 
वीडियो एडिटिंग
वीडियो एडिटिंग मल्टीमीडिया से जुड़ा काम है. आजकल साइंस फिक्शन फिल्मों, कार्टून फिल्में का चलन बढ़ा है. इसने वीडियो एडिटिंग में ग्रफिक डिजाइनिंग, कार्टूनिस्ट, आर्ट डायरेक्शन जैसे पहलुओं को जोड़ने का काम किया है. अब तो बिना कास्ट के कार्टून के सहारे फिल्मों को बनाने का भी प्रचलन बढ़ा है. इस क्षेत्र में भी मल्टीटैलेंटेड और क्रिएटिव लोगों की काफी मांग है. मल्टीमीडिया और  वीडियो एडिटिंग में प्रशिक्षण लेकर आप इस क्षेत्र में अपना कॅरियर बना सकते हैं.

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आय 
इस क्षेत्र में अलग अलग काम के लिए अलग- अलग वेतन मिलता है. शुरुआती स्तर पर फिल्म से जुड़े किसी भी काम में वेतन 15 से 20 हजार रुपये होता है. इस क्षेत्र में एक बार अगर यदि आप स्थापित हो गए, तो फिर आय की कोई सीमा नहीं रहती.

यह हैं कोर्स
- पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन सिनेमा
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डायरेक्शन
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सिनेमेटोग्राफी
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन साउंड रिकार्डिंग एंड साउंड डिजाइन
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एडिटिंग
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन आर्ट डायरेक्शन एंड प्रोडक्शन डिजाइन
- सर्टिफिकेट कोर्स इन स्क्रीनप्ले राइटिंग
- डिप्लोमा इन वीडियो प्रोडक्शन
- बैचलर ऑफ फिल्म टेक्नोलॉजी आदि

टिप्पणियां
यह हैं संस्थान 
- फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे 
- सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, कोलकाता 
- व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल, मंबई

VIDEO: विद्या ने साझा किया अपना अनुभव

- एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन, नोएडा
- एसआरएम शिवाजी गणेशन फिल्म इंस्टीट्यूट, चेन्नई
- जी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स, मुंबई


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