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बुराड़ी मौतें : ललित को परिवारवाले बुलाते थे ‘काका’ और उसके पिता को ‘डैडी’, पूरे घर को देता था ऐसी ‘धमकी’

बुराड़ी में एक परिवार के 11 सदस्यों के रहस्यमयी तरके से मृत मिलने के मामले में कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं.

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बुराड़ी मौतें : ललित को परिवारवाले बुलाते थे ‘काका’ और उसके पिता को ‘डैडी’, पूरे घर को देता था ऐसी ‘धमकी’

फाइल फोटो

खास बातें

  1. ललित को परिवारवाले बुलाते थे ‘काका’
  2. सपने में आने वाले उसके पिता को 'डैडी' कहा जाता था
  3. ललित अपने परिजनों को 'डैडी' के नाम से धमकी देता था
नई दिल्ली: बुराड़ी में एक परिवार के 11 सदस्यों के रहस्यमयी तरके से मृत मिलने के मामले में कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं. इन मौतों का मास्टरमाइंड ललित को घर के लोग काका कहते थे और सपने में आने वाले उसके पिता को पूरा घर डैडी कहता था. ललित पूरे घर को धमकी देता था कि अगर ऐसा नहीं किया तो डैडी ऐसा कर देंगे. ललित की इस धमकी की वजह से पूरा घर उसकी कोई बात नहीं टालता था. फांसी लगाने के लिए जिस चुन्नी और कपड़ों का इस्तेमाल हुआ, वो टीना और उसकी मां उसी दिन पास के ही बाजार से लाये थे.

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पुलिस ने बताया कि इस परिवार के मुखिया भोपाल सिंह की मौत के बाद से ही ललित के अंदर उसके पिता की 'आत्मा' आने लगी थी. ललित 11 साल से पिता की आत्मा आने के बाद पिता की आवाज में परिवार से बात करता था. उन्हें क्या फैसला लेना है, वो पिता की आत्मा आने के बाद ललित ही लेता था. परिवार के 11 सदस्यों को यकीन हो चुका था कि ललित के अंदर उसके पिता की आत्मा आ जाती है. पिछले 11 साल में ललित ने पिता की आत्मा आने के बाद जो फैसले लिए उसकी वजह से परिवार की काफी तरक्की हुई. एक दुकान से तीन दुकान हो गईं. 

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ललित के अंदर उसके पिता आए और उन्होंने 24 जून से 7 दिन तक चलने वाली बड़ पूजा यानी बरगद की तपस्या करने को कहा. क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक, यह परिवार बरगद की तपस्या करके अपने परिवार की खुशहाली के लिए यह पूजा कर रहा था जो 7 दिन से चल रही थी. एक आत्मा को खुश करने के चक्कर में 11 लोगों की जान चली गई.. इनमें से तीन भूपी, ललित और टीना के हाथ खुले हुए थे.

VIDEO: सिटी सेंटर: बुराड़ी में 11 मौतों का राज खुला
क्राइम ब्रांच को घर से 11 रजिस्टर मिले हैं जिनमें मौत की पूरी स्क्रिप्ट पहले से ही लिखी हुई है. पुलिस ने बताया कि पिछले 11 साल से ललित के पिता उसके सपने में आ रहे थे. वह 2007 से, यानि 11 साल से अपने पिता की आवाज़ निकाल रहा था. परिवार के 11 सदस्यों के अलावा किसी को यह बात पता नहीं थी.


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