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नरेंद्र मोदी को ईमेल भेज 'खत्म' करने की दी थी धमकी, 15 साल बाद सुनवाई शुरू 

अहमदाबाद की एक अदालत ने करीब 15 साल पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए धमकी भरे एक ईमेल के मामले में सुनवाई शुरू कर दी है.

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नरेंद्र मोदी को ईमेल भेज 'खत्म' करने की दी थी धमकी, 15 साल बाद सुनवाई शुरू 

ईमेल में नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगियों को खत्म करने की धमकी दी थी.

खास बातें

  1. 15 साल पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दी थी धमकी
  2. स्थानीय निवासी मोहम्मद रिजवान कादरी है मामले में आरोपी
  3. सरकारी अभियोजक ने कहा- 27 जून को होगी अगली सुनवाई
नई दिल्ली: अहमदाबाद की एक अदालत ने करीब 15 साल पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए धमकी भरे एक ईमेल के मामले में सुनवाई शुरू कर दी है. इस मामले में एक स्थानीय निवासी मोहम्मद रिजवान कादरी आरोपी है. सरकारी अभियोजक प्रतीक भट्ट ने कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट जे एल परमार ने शिकायतकर्ता से जिरह के साथ पिछले हफ्ते मामले में सुनवाई शुरू कर दी. उन्होंने कहा कि अगली सुनवाई 27 जून को होगी. गुजरात पुलिस के आतंक विरोधी दस्ते के अनुसार कादरी ने दिसंबर, 2002 में मोदी को धमकी भरा ई-मेल भेजा था. ईमेल में उन्हें और उनके सहयोगियों 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल को फरवरी 2003 के अंत तक ‘‘खत्म’’ करने की धमकी दी थी. 

यह भी पढ़ें : पुलिस का दावा : 'राजीव गांधी हत्याकांड' की तरह पीएम मोदी के खिलाफ साजिश रच रहे थे माओवादी

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गौरतलब है कि पिछले दिनों ही पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने का खुलासा भी हुआ था. पुणे की पुलिस ने कोर्ट में एक लेटर पेश करते हुये दावा किया था कि  माओवादी  पीएम मोदी की  'राजीव गांधी की तरह हत्या' करने की साजिश रच रहे थे. पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया,  जिनके संबंध प्रतिबंधित सीपीआई-माओवादी संगठन से हैं. इनके नाम दलित एक्टिविस्ट सुधीर धावले, वकील सुरेंद्र गडलिंग, एक्टिविस्ट महेश राउत, शोमा सेन और रोना विल्सन हैं.  पुलिस ने इनको 'अरबन माओइस्ट' का शीर्ष नेता बताया है और इनको जनवरी में हुई भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया है. पीटीआई में छपी खबर की मानें तो पुलिस की ओर से दी गई जानकारी दी गई है कि यह चिट्ठी रोना विल्सन के दिल्ली आवास से बरामद हुई है. रोना विल्सन इस समय राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिये बनाई गई समिति के सदस्य हैं. (इनपुट-भाषा) 

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