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देश-विदेश के शिक्षाविदों का PM मोदी को खुला खत, कठुआ-उन्नाव पर चुप्पी साधने पर जताई नाराजगी

पीएम मोदी को लिखे इस पत्र पर भारत के संस्थानों के अलावा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड जैसे संस्थानों के लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं.

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देश-विदेश के शिक्षाविदों का PM मोदी को खुला खत, कठुआ-उन्नाव पर चुप्पी साधने पर जताई नाराजगी

पीएम मोदी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. देश-विदेश के 600 से ज़्यादा शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी
  2. कठुआ और उन्नाव मामलों पर अपनी नाराज़गी का इज़हार किया
  3. पीएम पर देश में बने गंभीर हालात पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है
नई दिल्ली:

देश-विदेश के 600 से ज़्यादा शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुली चिट्ठी लिखी है. इस ख़त में उन्होंने कठुआ और उन्नाव मामलों पर अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हुए पीएम पर देश में बने गंभीर हालात पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है. ख़त में इन मामलों के आरोपियों को बचाने की कोशिशों पर भी गुस्सा दिखाया है. 

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इस पत्र पर भारत के संस्थानों के अलावा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड जैसे संस्थानों के लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं. यह खत ऐसे दिन आया है जब कठुआ और सूरत में नाबालिग बच्चियों के बलात्कार और हत्या एवं उन्नाव में एक लड़की से बलात्कार को लेकर देशभर में आक्रोश के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ही 12 वर्ष और उससे कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामले में दोषी पाये जाने पर मृत्युदंड सहित कड़े दंड के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दी. 


प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में कहा गया है कि वे कठुआ और उन्नाव एवं उनके बाद की घटनाओं पर अपने गहरे गुस्से और पीड़ा का इजहार करना चाहते हैं. पत्र में लिखा गया, ‘हमने देखा है कि देश में बने गंभीर हालत पर और सत्तारूढ़ों के हिंसा से जुड़ाव के निर्विवाद संबंधों को लेकर आपने लंबी चुप्पी साध रखी है.’

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इससे पहले देश के 49 रिटायर नौकरशाहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखा था. खत में लिखा गया था कि कठुआ और उन्नाव की दर्दनाक घटनाएं दिखाती हैं कि सरकार अपनी बहुत ही मूल ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में भी नाकाम रही है. ये हमारा सबसे काला दौर है और इससे निपटने में सरकार और राजनीतिक पार्टियों की कोशिश बहुत ही कम और कमज़ोर है.

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पत्र में आगे लिखा गया था कि नागरिक सेवाओं से जुड़े हमारे युवा साथी भी लगता है अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं. इस पत्र में प्रधानमंत्री से कहा गया है कि वो कठुआ और उन्नाव में पीड़ित परिवारों से माफ़ी मांगें और मामलों की फास्ट ट्रैक जांच करवाएं. पत्र में यह भी मांग की गई है कि प्रधानमंत्री नफ़रत भरे भाषणों और अपराधों से जुड़े लोगों को अपनी सरकार से हटाएं और इस पूरे मसले पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं.
 


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