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31 अक्टूबर 2019 है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए अहम दिन, अनुच्छेद 370 हटने के बाद जानिए क्या-क्या हुआ

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा है कि प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 (Article 370) को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है.

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31 अक्टूबर 2019 है जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए अहम दिन, अनुच्छेद 370 हटने के बाद जानिए क्या-क्या हुआ

अमित शाह ने राज्यसभा में पेश किया था अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव

खास बातें

  1. सोमवार को घाटी में खुल जाएंगे स्कूल
  2. पंचायतों को मजबूत करने का प्लान
  3. 31 अक्टूबर को बन जाएंगे दो राज्य
नई दिल्ली:

जम्मू में 35 हजार अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जा चुके थे और पूरी घाटी में सेना अलर्ट पर थी. इस पर कयास लग ही रहे थे कि सरकार ने सदियों से चली आ रही अमरनाथ और एक दूसरी धार्मिक यात्रा भी रोक दी. साथ ही अपील की कि जितनी जल्दी हो सके सभी श्रद्धालु और सैलानी जम्मू-कश्मीर छोड़ दें. इसी बीच खबरें आनी शुरू हुईं कि सीमा पार से पाकिस्तानी आतंकवादी हमला करने की फिराक में हैं. सेना की ओर से की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसके सबूत दिए गए जिसमें अमेरिका में बनी एक स्नाइपर राइफल भी दिखाई गई. हालांकि दिन बीतते-बीतते अपुष्ट खबरें आने लगीं कि सरकार जम्मू-कश्मीर में कुछ बड़ा करने जा रही है और इस बात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती भी अपना शक जाहिर करने लगे. इसी बीच उमर अब्दुल्ला की अगुवाई में नेशनल कॉन्फ्रेंस का एक प्रतिनिधिमंडल भी राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिला. वहां उन्हें ज्यादा कुछ तो नहीं पता चला लेकिन इस बात का आश्वासन मिला कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 (Article 370)  हटाने नहीं जा रही है. वहीं दिल्ली में विपक्षी, खासकर कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में अचानक से बढ़ा दिए गए सुरक्षाबलों पर सरकार से जवाब मांगा. पांच अगस्त को सुबह कैबिनेट की बैठक हुई. लेकिन इसमें क्या हुआ इस पर होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस टाल दी गई  और खबर आई कि जम्मू-कश्मीर पर गृहमंत्री अमित शाह संसद में जवाब देंगे.

सोमवार 5 अगस्त को 11 बजे संसद शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया. वे जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग कर रहे थे. राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370  (Article 370) हटाने की सिफारिश और राज्य के पुनर्गठन का बिल पेश कर दिया. इस ऐलान के साथ ही पहले से ही तैयार बैठी सरकार ने कश्मीर घाटी के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद किया गया, इंटरनेट सहित अन्य संचार सेवाएं रोक दी गईं और पूरे राज्य में धारा 144 लागू कर दी गई. हालांकि इससे पहले ही कई अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किया जा चुका था. राज्य पुनर्गठन बिल के मुताबिक जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था, जिसमें एक लद्दाख का अलग और जम्मू-कश्मीर एक अलग राज्य बनाया गया. लेकिन दोनों को ही दर्जा केंद्र शासित प्रदेश का दिया गया. इस प्रस्ताव के आते ही राज्यसभा में भारी हंगामा शुरू हो गया. विरोध में पीडीपी सांसदों ने अपने कपड़े फाड़ दिए. कांग्रेस ने भी जमकर विरोध किया. हालांकि राज्यसभा में इसके पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 61. सरकार के समर्थन में बीएसपी ने भी वोट किया.


संसद को कैसे मिली शक्ति
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 (Article 370) को समाप्त करने का अधिकार जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा को था. लेकिन मौजूदा हालात में अनुच्छेद 370 (Article 370) में ही निहित एक व्यवस्था के तहत यह अनुच्छेद समाप्त कर दिया गया. जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा भंग करके उसके अधिकार राज्य विधानसभा को दिए गए. चूंकि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा की शक्तियां मौजूदा समय में संसद के पास हैं इसलिए संसद में अनुच्छेद 370 की दो धाराओं को समाप्त करने का प्रस्ताव लाया गया. राष्ट्रपति धारा 370 (Article 370) को खत्म कर सकते हैं. इसके लिए जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की अनुशंसा चाहिए. एक अधिसूचना के जरिए जम्मू-कश्मीर संविधान सभा भंग करके उसकी शक्ति राज्य विधानसभा को दी गई. चूंकि विधानसभा की शक्ति अभी संसद के पास है इसलिए संसद में अनुच्छेद 370 के दो उपखंडों को समाप्त करने का प्रस्ताव लाया गया. संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की अधिसूचना के बाद यह खत्म हो गई. गृह मंत्रालय के मुताबकि दो नए केंद्र शासित प्रदेश-जम्मू कश्मीर और लद्दाख 31 अक्टूबर को अस्तित्व में आएंगे.

घाटी में अजीत डोभाल ने संभाला मोर्चा
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और गृह सचिव राजीव गौबा श्रीनगर पहुंच गए. अजीत डोभाल और राजीव गौबा हर जानकारी केंद्र सरकार को दे रहे थे. डोभाल ने घाटी के कई जिलों का दौरा किया और स्थानीय लोगों से मुलाकात की. इसके वीडियो भी जारी किए गए. जम्मू और श्रीनगर में लगातार धारा 144 जारी रही. ऐसे में घाटी के ज़्यादातर शहरों में सड़कों पर सन्नाटा पसर गया. साथ ही बाज़ार भी बंद कर दिए गए. घाटी में बड़ी संख्या में सुरक्षाबल की तैनाती है जो लगातार चप्पे-चप्पे पर नज़र बनाए हुए हैं. वहीं अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के फ़ैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला को गिरफ़्तार किया गया, जो कि अभी तक हिरासत में हैं. 

लोकसभा में मनीष तिवारी ने सरकार को घेरा
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने कहा 'यह पहला मौका है जब किसी प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया है. यह संघीय ढांचे पर बहुत बड़ा प्रहार है. अगर आज जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा हैं तो वह पंडित जवाहर लाल नेहरू के कारण है'.उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का एक अलग संविधान है जो 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था, उसका क्या होगा. क्या सरकार उसके लिए अलग से विधेयक लेकर आएगी. आज जब अनुच्छेद 370 को खत्म कर रहे हैं तो आज आप पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को क्या संदेश दे रहे हैं कि कल को आप असम, त्रिपुरा, नगालैंड के अधिकार अनुच्छेद 371 खत्म करके लेंगे. हालांकि अमित शाह ने भी मनीष तिवारी से पूछा कि यह बताया ही नहीं कि वे अनुच्छेद 370 के पक्ष में या खिलाफ. इस पर तिवारी ने कहा कि अगर आप बिना संवैधानिक असेंबली की सहमति से धारा हटाएंगे तो यह बिलकुल गलत है, उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे.

आर्टिकल 370 पर लोकसभा में कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने मोदी सरकार को घेरा, उठाए ये सवाल

कांग्रेस में उभरे मतभेद
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांटने के केंद्र सरकार के कदम का समर्थन करते हुए अपनी पार्टी के रुख से अलग राय रखी. उन्‍होंने कहा कि सरकार ने एक ‘‘ऐतिहासिक गलती'' सुधारी है. जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि यह राष्ट्रीय संतोष की बात है कि स्वतंत्रता के समय की गई गलती को सुधारा गया है. उन्होंने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है. स्वतंत्रता के बाद कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं चाहते थे कि अनुच्छेद 370 रहे. जनार्दन द्व‍िवेदी ने कहा कि मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया शुरू से ही अनुच्छेद 370 का विरोध करते थे. मेरे व्यक्तिगत विचार से तो यह एक राष्ट्रीय संतोष की बात है. वहीं द्विवेदी के अलावा दीपेंद्र हुड्डा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अदिति सिंह सहित तमाम नेताओं ने अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में बयान दिए. वहीं राज्यसभा में कांग्रेस के नेता  गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जिन लोगों को जम्‍मू-कश्‍मीर का इतिहास और कांग्रेस का इतिहास पता नहीं है उनसे मुझे कोई लेना देना नहीं है. वे पहले जम्‍मू-कश्‍मीर और कांग्रेस का इतिहास पढ़ लें फिर कांग्रेस में रहें. 

कर्ण सिंह भी आए समर्थन में
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने पर कहा कि व्यक्तिगत तौर पर मैं इस फैसले के विरोध में नहीं हूं. इसके कई फायदे हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर संसद द्वारा अचानक लिए गए फैसले से हैरान हूं. आपको बता दें कि कर्ण सिंह, जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह के बेटे हैं.

पीएम मोदी ने दिया राष्ट्र के नाम संदेश
छह अगस्त को लोकसभा में भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल और अनुच्छेद 370 को हटाने का प्रस्ताव पास हो चुका था लेकिन रात को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की खबर आ गई. इसलिए आठ अगस्त को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों को टेलीविजन के जरिए संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हमने पूरे देश में एक ऐतिहासिक फैसला किया. आर्टिकल 370 एक ऐसी व्यवस्था थी जिससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग विकास से वंचित थे, वह समस्या अब दूर हो गई है. पीएम मोदी ने कहा कि सरदार पटेल, श्यामाप्रसाद मुखर्जी और करोड़ों देशभक्तों का सपना पूरा हो गया. यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए नए युग की शुरुआत है. जम्मू-कश्मीर और देश के लोगों को बहुत-बहुत बधाई.

संयुक्त राष्ट्र ने दी संयम बरतने की सलाह
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने भारत और पाकिस्तान से अत्यधिक संयम बरतने को कहा और शिमला समझौते का जिक्र किया जो इस मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को नकारता है.  वहीं पाकिस्तान ने भारत के इस कदम को ‘‘एकपक्षीय और अवैध'' करार देते हुए कहा है कि वह इस मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ले जाएगा.

अमेरिका ने कहा कश्मीर पर नीति में कोई बदलाव नहीं 
अमेरिका ने शुक्रवार को कहा कि कश्मीर पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है. उसने भारत तथा पाकिस्तान से शांति एवं संयम बरतने का आह्वान किया. विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्टागस से मीडिया ने यह पूछा कि क्या अमेरिका की कश्मीर पर नीति में कोई बदलाव आया है. अमेरिका मानता है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है. 

नौसेना अलर्ट पर
नौसेना ने तत्काल किसी भी अभियान में तैनाती के लिए अपने युद्ध पोतों को हाई अलर्ट पर रखा है. जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को खत्म करने वाले और राज्य को दो केंद्र शासित राज्यों में बांटने वाले सरकार के फैसले के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए नौसेना ने यह कदम उठाया है. रक्षा सूत्रों ने यह जानकारी दी.

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से संबंधित राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी की ओर से दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को जम्मू-कश्मीर में ‘‘असंवैधानिक, अमान्य एवं निष्प्रभावी'' घोषित करने के संबंध में निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को भी ‘‘असंवैधानिक'' घोषित करने का अनुरोध किया है. जम्मू एवं कश्मीर में कर्फ्यू लगाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आधा दर्जन याचिकाएं दाखिल की गई हैं. तीन याचिकाएं राष्ट्रपति के आदेश से अनुच्छेद 370 को संविधान में एक मृत पत्र बना देने के खिलाफ दाखिल की गई हैं. अन्य याचिकाएं कर्फ्यू और क्षेत्र में उसके परिणाम के संदर्भ में दाखिल की गई हैं.

राहुल गांधी ने जताई चिंता
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कश्मीर मुद्दे पर भी चर्चा हुई. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जम्मू-कश्मीर  के हालात पर 'गंभीर चिंता' जताते हुए कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पारदर्शिता के साथ राज्य की स्थिति से देश की जनता को अवगत कराएं. राहुल गांधी ने कहा कि ख़बर आ रही है कि कश्मीर में हालात बहुत ख़राब हैं. सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ बताए कि वहां के हालात क्या हैं? वहीं जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने चुनौती देते हुए कहा कि वह राहुल गांधी को विमान उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं ताकि वह राज्य में घूम सकें. उनकी इस चुनौती पर राहुल गांधी ने पहले कहा कि वह घूमना नहीं चाहते हैं बल्कि वहां के लोगों, तैनात जवानों से मिलना चाहते हैं. वहीं दूसरे बयान में राहुल गांधी ने कहा कि वह विमान से जम्मू-कश्मीर जाने के लिए तैयार हैं. फिलहाल सत्यपाल मलिक की ओर से कोई जवाब नहीं आया है. 

छह दिन से नहीं हुई कोई फायरिंग- पुलिस
राहुल गांधी के बयान आते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने साफ किया है कि पिछले छह दिनों में फायरिंग की कोई भी घटना नहीं हुई है. लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए. पूरे राज्य में शांति बनी हुई है और कर्फ्यू में ढील दी जा रही है. श्रीनगर और बाकी शहरों में लोग ईद की खरीददारी में जुटे हुए हैं.

पी चिदंबरम ने लगाया आरोप
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करने के लिए रविवार को भाजपा की आलोचना की और कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर हिंदू बहुल राज्य होता तो भगवा पार्टी इस राज्य का विशेष दर्जा नहीं छीनती.

ईद को लेकर की गई खास व्यवस्था
जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) में ईद-उल-अजहा के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई. ईद के मद्देनजर 300 टेलिफोन बूथ भी बनाए गए. ईद के दिन सड़कें सुनसान दिखीं, क्योंकि श्रीनगर में कड़ी सुरक्षा प्रतिबंधों के तहत ईद-अल-अजहा मनाया गया.रिपोर्ट के अनुसार श्रीनगर की अधिकांश बड़ी मस्जिदों में ईद के नमाज की अनुमति नहीं दी गई. सरकार की तरफ से शेयर की गई तस्वीरों के अनुसार, श्रीनगर की छोटी-छोटी मस्जिदों में ईद की नमाज आयोजित की गई. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने ट्वीट किया कि ईद की नमाज़ शांतिपूर्ण रही. उधर, नमाज के बाद मिठाई बांटते हुए लोगों की फोटो शेयर करते हुए गृह मंत्रालय की प्रवक्ता वसुधा गुप्ता ने ट्वीट किया, 'अनंतनाग, बारामुला, बडगाम, बांदीपोर की सभी स्थानीय मस्जिदों में ईद की नमाज बिना किसी अप्रिय घटना के अदा की गई. पुराने शहर बारामुला की जामिया मस्जिद में लगभग 10,000 लोगों ने नमाज अदा की.

जल्द हटेंगी पाबंदियां
अनुच्छेद 370  हटाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में लगाई गई पाबंदियां जैसे इंटरनेट और संचार माध्यमों पर बैन और ब्लैकआउट के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा है कि कुछ दिनों में सारे प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे. आपको बता दें कि कश्मीर टाइम्स की एक्जीक्यूटिव एडिटर अनुराधा भसीन ने धारा  370 के हटने के बाद घाटी में कामकाजी पत्रकारों पर लगी पाबंदियों को चुनौती दी है.

पूरी तरह से नहीं हटा है अनुच्छेद 370?
संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा है कि प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है. उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है. जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई  प्रावधान है जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है. अमित शाह के बयान के मुताबिक 370 (1) बाकायदा कायम है सिर्फ 370 (2) और (3) को हटाया गया है. 370 (1) में प्रावधान के मुताबिक जम्मू और कश्मीर की सरकार से सलाह करके राष्ट्रपति आदेश द्वारा संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू कर सकते हैं.

क्या है सरकार का प्लान
नई व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार की कोशिश पंचायतों को मजबूत करना की है जिसके जरिए आम जनता तक पहुंच बनाई जा सके. इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश होने का लाभ भी वहां के सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा. आपको बता दें कि जम्मू इलाके से धारा 144 हटा ली गई है और कश्मीर घाटी में भी कई इलाकों में जारी पाबंदियों पर ढील दी गई है. अब 19 अगस्त से घाटी के सभी जिलों से कर्फ्यू हटा लिया जाएगा और सभी स्कूल-कॉलेज खुल जाएंगे.

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