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अरुण जेटली ने ब्लॉग में राहुल पर किया तीखा हमला, पूछा- कौन है मानवाधिकारों का दुश्मन?

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आतंकवादियों और माओवादियों की विचारधारा के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया है.

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अरुण जेटली ने ब्लॉग में राहुल पर किया तीखा हमला, पूछा- कौन है मानवाधिकारों का दुश्मन?

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की फाइल फोटो

खास बातें

  1. सवाल उठाया है कि मानवाधिकारों को किससे ख़तरा है?
  2. लोकतंत्र के तौर पर हमारे यहां एक ऐसा संविधान है
  3. दो विचारधाराओं से जुड़े लोग देश के खिलाफ़ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर आतंकवादियों और माओवादियों की विचारधारा के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप लगाया है. एक ब्लॉग में उन्होंने सवाल उठाया है कि मानवाधिकारों को किससे ख़तरा है? जेटली ने कहा है कि मानवाधिकार भारत के संसदीय लोकतंत्र और संविधान का अहम हिस्सा रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के तौर पर हमारे यहां एक ऐसा संविधान है जो हर नागरिक को मूल मानवाधिकारों की गारंटी देता है. लेकिन दो विचारधाराओं से जुड़े लोग देश के खिलाफ़ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. 

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जेटली ने लिखा है कि ये आतंकवाद और देश के खिलाफ हरकतों में शामिल हैं. जिहादियों और अलगाववादियों में से कई को हमारे पड़ोसियों से ट्रेनिंग मिली है और पैसा मिलता है. ये देश के कुछ हिस्सों में हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर में ज़्यादा सक्रिय हैं. कुछ स्थानीय नौजवान भी इनके साथ हो लिए हैं. दूसरा गुट माओवादियों का है, जो मध्य भारत के कुछ आदिवासी बहुत ज़िलों में सक्रिय हैं. लेकिन उनकी विचारधारा के समर्थक देश के कई हिस्सों में फैले हुए हैं. ये दोनों ही गुट लोकतांत्रिक तरीकों से चुनी गई सरकारों को हटाना चाहते हैं.

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उन्होंने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक तौर पर और विचारधारा के तौर पर इन समूहों का विरोध करती रही है लेकिन राहुल गांधी के मन में इनके लिए सहानुभूति नज़र आती है. उनको जेएनयू और हैदराबाद में आपत्तिजनक नारेबाज़ी करने वालों के साथ जाने का भी कोई अफसोस नहीं दिखता है. उन्होने आगे लिखा है कि कश्मीर में मस्क्यूलर या सख्त नीति की बात की जाती है. एक हत्यारे से निपटना भी कानून और व्यवस्था का मुद्दा है. यह राजनीतिक समाधान का इंतजार नहीं कर सकता. एक फ़िदाईन मरने की बात करता है. उसे मारने से भी परहेज़ नहीं होता. क्या उसके सामने सत्याग्रह की बात की जा सकती है. जब वो मरने की बात कर रहा हो तो क्या सुरक्षा बल उससे संपर्क कर सकते हैं. आमने सामने बैठकर बातचीत कर सकते हैं?

जेटली लिखते हैं कि जिहादी सिर्फ़ एक धर्म में यकीन करते हैं और माओवादी मानते हैं कि किसी और के लिए जगह नहीं है. दोनों विचारों के बीच एक तरह का तालमेल दिखता रहा है. उन्होंने कहा कि हमारी नीति आतंकवादियों से हर भारतीय के मानव अधिकार की रक्षा करना है. वह चाहे आदिवासी हो या कश्मीरी.

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मानवाधिकारों को किससे ख़तरा?

दो विचारधाराओं से जुड़े लोग देश के खिलाफ़ माहौल बनाने की कोशिश में आतंकवाद और देश के खिलाफ हरकतों में शामिल कई को पड़ोसियों से ट्रेनिंग और पैसा कुछ हिस्सों में मौजूद, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ज़्यादा सक्रिय हैं. कुछ स्थानीय नौजवान भी इनके साथ हो लिए हैं. दूसरा गुट माओवादियों का माओवादी मध्य भारत के कुछ आदिवासी बहुल ज़िलों में सक्रिय है लेकिन उनकी विचारधारा के समर्थक देश के कई हिस्सों में चुनी गई सरकारों को हटाना चाहते हैं.

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उन्होने लिखा है कि कांग्रेस इन समूहों का विरोध करती रही है लेकिन राहुल के मन में इनके लिए सहानुभूति आपत्तिजनक नारेबाज़ी करने वालों के साथ जाने का अफसोस नहीं दिखता. उन्होंने आगे लिखा है कि हत्यारे से निपटना भी कानून-व्यवस्था का मुद्दा इसमें राजनीतिक समाधान का इंतजार नहीं फिदाइन मरने की बात करता है. फ़िदाइन को मारने से भी परहेज़ नहीं क्या उसके सामने सत्याग्रह संभव? क्या सुरक्षा बल उससे संपर्क कर सकते हैं? आमने सामने बैठकर बातचीत कर सकते हैं?

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