NDTV Khabar

Ayodhya Case: सुप्रीम कोर्ट में चार पुनर्विचार याचिकाएं, कहा- अवैध रूप से रखी गई मूर्ति के पक्ष में फैसला

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से मिसबाहुद्दीन, मौलाना हसबुल्ला, हाजी महबूब और रिजवान अहमद ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर कीं

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
Ayodhya Case: सुप्रीम कोर्ट में चार पुनर्विचार याचिकाएं, कहा- अवैध रूप से रखी गई मूर्ति के पक्ष में फैसला

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. कहा- फैसले में 1992 में मस्जिद के ढहाए जाने का फायदा दिया गया
  2. सही नहीं कि मस्जिद पक्ष प्रतिकूल कब्जे को साबित करने में सक्षम नहीं रहा
  3. न्याय हासिल करने के लिए दाखिल की गई हैं याचिकाएं
नई दिल्ली:

अयोध्या (Ayodhya) के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चार पुनर्विचार याचिकाएं (Review petitions) दायर की गई हैं. याचिकाओं में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सन 1992 में मस्जिद ढहाए जाने को मंजूरी देने जैसा है. अवैध रूप से रखी गई मूर्ति के पक्ष में फैसला सुनाया गया. अवैध हरकत करने वालों को ज़मीन दी गई. याचिकाओं में कहा गया है कि हिंदुओं का कभी वहां पूरा कब्ज़ा नहीं था. मुसलमानों को पांच एकड़ जमीन देने का फैसला पूरा इंसाफ नहीं कहा जा सकता. सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह अपने नौ नवंबर के फैसले पर रोक लगाए. मामले पर दोबारा विचार करे.

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के समर्थन से मिसबाहुद्दीन, मौलाना हसबुल्ला, हाजी महबूब और रिजवान अहमद ने पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं. अगर खुली अदालत में सुनवाई हुई तो
इन सभी याचिकाओं के वकील राजीव धवन होंगे.


याचिकाओं में कहा गया है कि ये याचिकाएं शांति और सद्भाव में खलल डालने के लिए नहीं बल्कि न्याय हासिल करने के लिए दाखिल की गई हैं. मुस्लिम संपत्ति हमेशा ही हिंसा और अनुचित व्यवहार का शिकार हुई है. फैसले में 1992 में मस्जिद के ढहाए जाने का फायदा दिया गया है. अवैध रूप से रखी गई मूर्ति कानूनी रूप से वैध नहीं हो सकती और इसके पक्ष में फैसला सुनाया गया है.

Ayodhya Case: अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारतीय पीस पार्टी ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका, उठाए ये 5 सवाल

कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का 9 नवंबर का फैसला बाबरी मस्जिद के विनाश, गैरकानूनी तरीके से घुसने और कानून के शासन के उल्लंघन की गंभीर अवैधताओं को दर्शाता है. निर्विवाद तथ्य यह है कि हिंदू कभी भी एक्सक्लूसिव कब्जे में नहीं रहा. अवैधता में पाए गए सबूतों के आधार पर हिंदूओं ने दावा किया है.

अयोध्या मामले पर असदुद्दीन ओवैसी बोले- मेरी लड़ाई 5 एकड़ की नहीं, मस्जिद की है

याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के पांच एकड़ जमीन देने के फैसले पर भी सवाल उठाया गया है. कहा गया है कि पूजा स्थल को नष्ट करने के बाद ऐसा कोई "पुनर्स्थापन" नहीं हो सकता. यह कोई कामर्शियल सूट नहीं था बल्कि सिविल सूट था. सुप्रीम कोर्ट का ये निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण है कि यह दिखाने के लिए सबूत हैं कि हिंदुओं ने मस्जिद के परिसर में 1857 से पहले पूजा की थी. यह दिखाने के लिए सबूत हैं कि मुस्लिम 1857 और 1949 के बीच आंतरिक आंगन के एक्सक्लूसिव कब्जे में थे. कोर्ट का ये निष्कर्ष सही नहीं है कि मस्जिद पक्ष प्रतिकूल कब्जे को साबित करने में सक्षम नहीं रहा.

Ayodhya Case : राजीव धवन ने कहा, जमात-ए-उलेमा ने मेरे खराब स्वास्थ्य के बारे में झूठ बोला

VIDEO : अयोध्या पर बंटा मुस्लिम पक्ष

टिप्पणियां



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें. India News की ज्यादा जानकारी के लिए Hindi News App डाउनलोड करें और हमें Google समाचार पर फॉलो करें


 Share
(यह भी पढ़ें)... महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी बोले - अब सुप्रीम कोर्ट भी हो गया है राममय

Advertisement