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दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा की अग्रिम जमानत याचिका को सुनने से किया इनकार

अपनी अर्जी में वाड्रा ने मांग की थी कि पीएमएलए की धारा 3 (धनशोधन का अपराध), 17 (तलाश एवं जब्ती), 19 (गिरफ्तारी का हक), 24 (सबूत देने की जिम्मेदारी), 44 (विशेष अदालतों द्वारा सुनवाई योग्य अपराध) और 50 (सम्मन, दस्तावेज पेश करने और सबूत आदि देने से संबंधित अधिकारियों के अधिकार) को असंवैधानिक घोषित किया जाए.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा की अग्रिम जमानत याचिका को सुनने से किया इनकार

रॉबर्ट वाड्रा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

रॉबर्ट वाड्रा की दो अलग-अलग याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट और पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई. जहां दिल्ली हाई कोर्ट से रॉबर्ट वाड्रा को निराशा हाथ लगी तो वहीं पटियाला हाउस कोर्ट ने 27 मार्च यानी परसों तक रॉबर्ट वाड्रा की अंतरिम जमानत बढ़ा दी है. दिल्ली हाई कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा की मांग को ठुकराते हुए निचली अदालत यानी पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि हाईकोर्ट ने ईडी से 2 सप्ताह में जवाब दायर करने को कहा है. हाईकोर्ट ने ईडी से वाड्रा की याचिका पर जवाब दायर करने को कहा है जिसमे रॉबर्ट वाड्रा ने अपने खिलाफ दायर PMLA के तहत एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी. 2 मई को मामले की अगली सुनवाई होगी.

वहीं दूसरी तरफ पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के समय ईडी ने आरोप लगाया कि 300 करोड़ रुपये एक डिफेंस डील का प्लाट्स कंपनी में आया जबकि 10 मिलियन डॉलर सैमसंग कंपनी के जरिये आया. प्लाट्स कंपनी संजय भंडारी की कंपनी है. पटियाला हाउस कोर्ट में तकरीबन डेढ़ घंटे तक मामले पर सुनवाई हुई. जहां रॉबर्ट वाड्रा के वकील केटीएस तुलसी ने पटियाला हाउस कोर्ट से कहा कि अभी तक ईडी 76 घंटे से ज्यादा पूछताछ कर चुकी है लेकिन अभी तक उनके हाथ कुछ नहीं लगा, अब वो हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहते हैं. वो रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कुछ साबित नहीं कर पा रहे है इसलिये वो ऐसा करना चाह रहे हैं. लिहाजा, उन्हें रेगुलर बेल दे दी जानी चाहिए. वाड्रा खुद ही ईडी के पास गए थे, ऐसा नहीं है कि इस मामले में ईडी ने उन्हें सम्मन किया था. 10 बार से ज्यादा बार ईडी के पास गए हैं. कई सौ सवालों के जवाब उन्होंने दिए हैं. ऐसे में उन्हें रेगुलर बेल मिलनी चाहिए.


इससे पहले ईडी ने वाड्रा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया और उन्हें कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए.  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वाड्रा की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है.

गौरतलब है कि रॉबर्ट वाड्रा ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में अपने खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द करने की गुहार लगाई थी. जांच एजेंसी इस मामले में उनसे पूछताछ कर चुकी है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बहनोई वाड्रा की दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को धनशोधन मामले में वाड्रा को गिरफ्तारी से मिले अंतरिम संरक्षण की अवधि 25 तक बढ़ा दी थी. ईडी का यह मामला लंदन के 12, ब्रायंस्टन स्क्वायर स्थित 19 लाख पौंड की एक संपत्ति की खरीद में धनशोधन के आरोपों से जुड़ा है. यह संपत्ति कथित तौर पर वाड्रा की है.    

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अपनी अर्जी में वाड्रा ने मांग की थी कि पीएमएलए की धारा 3 (धनशोधन का अपराध), 17 (तलाश एवं जब्ती), 19 (गिरफ्तारी का हक), 24 (सबूत देने की जिम्मेदारी), 44 (विशेष अदालतों द्वारा सुनवाई योग्य अपराध) और 50 (सम्मन, दस्तावेज पेश करने और सबूत आदि देने से संबंधित अधिकारियों के अधिकार) को असंवैधानिक घोषित किया जाए. वाड्रा के अलावा उनके करीबी सहयोगी मनोज अरोड़ा ने भी उच्च न्यायालय में ऐसी ही एक अर्जी दाखिल की है. अरोड़ा स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी एलएलपी का कर्मचारी हैं. यह कंपनी वाड्रा की है.

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ईडी ने निचली अदालत को बताया था यह मामला काला धन कानून के तहत हुए अपराध के आधार पर शुरू किया गया है. यह जांच कर से बचने के लिए अघोषित विदेशी संपत्ति से संबंधित है. वाड्रा की अग्रिम जमानत अर्जी निचली अदालत में लंबित है. उन्हें इस मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला है. 

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