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Exit Poll Results 2019 : राहुल गांधी का केरल के वायनाड से '1 तीर से 130 निशाने' वाले दांव का कितना हुआ असर

Exit Poll Results 2019 : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी  के वायनाड में चुनाव लड़ने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि कांग्रेस का अब पूरा फोकस दक्षिण के राज्यों में पैठ बनाने की है क्योंकि उत्तर भारत में उसे क्षेत्रीय दलों जैसे उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और बिहार में आरजेडी सहित कई अन्य पार्टियां तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में टीएमसी और ओडिशा में बीजू जनता दल से पार पाना इतना आसान नहीं होगा

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Exit Poll Results 2019  : राहुल गांधी का केरल के वायनाड से '1 तीर से 130 निशाने' वाले दांव का कितना हुआ असर

Exit Poll Results 2019 : केंद्र में एक बार फिर एनडीए की सरकार मिलने के संकेत मिल रहे हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. दक्षिण भारत की 130 सीटों पर नजर
  2. केरल और तमिलनाडु में कांग्रेस को हो सकता है फायदा
  3. राहुल का वायनाड जाना कांग्रेस की रणनीति
नई दिल्ली:

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का दक्षिण भारत के राज्य  केरल के वायनाड  से लड़ने का फैसला का कितना असर रहा है यह तो 23 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि कांग्रेस को फायदा होता दिखाई दे रहा है. हालांकि यह असर केरल और तमिलनाडु तक ही सीमित है. एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक आंध्र प्रदेश की 25 सीटों में टीडीपी को 10, वाईएसआर कांग्रेस को 15, कांग्रेस और बीजेपी को कोई भी सीट मिलती नहीं दिखाई दे रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में टीडीपी को 15, वाईएसआर कांग्रेस को 8, बीजेपी को 2 और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी.  दक्षिण के इस राज्य में कांग्रेस को फायदा होते नहीं दिखाई दे रहा है. अब बात करें कर्नाटक की तो एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक राज्य की 28 सीटों में से सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस को 9, बीजेपी को 19 और अन्य के खाते में एक भी सीट नहीं जा रही है. साल 2014 के आंकड़ों से देखें तो इस चुनाव में बीजेपी को 17 और कांग्रेस को 9 औ जेडीएस को 2 सीटें मिली थीं. अब बात करें केरल की जहां के वायनाड सीट से राहुल गांधी ने चुनाव लड़ा था. एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक कांग्रेस गठबंधन को 14, वामदलों को 4, बीजेपी को 1 और अन्य के खाते में 1 सीट जाते दिखाई दे रही है. वहीं साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 11, वामदलों को 7 और अन्य के खाते में एक सीट गई थी. 

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तमिलनाडु में इस बार दो दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता और करुणानिधि के बिना लोकसभा चुनाव हुआ है. जयललिता और करुणानिधि के न रहने से एआईएडीएमके और डीएमके में अंदरुनी खींचतान जारी है. बीजेपी ने सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया है और कांग्रेस ने डीएमके के साथ. एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक राज्य की 39 सीटों में से एआईएडीएमके+बीजेपी को 11, डीएमके+कांग्रेस को 27 और अन्य के खाते में एक भी सीट जाते नहीं दिखाई दे रही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके को 37, बीजेपी को 2 और पीएमके को 1 सीट मिली थी.  आंध्र प्रदेश से अलग हुए तेलंगाना की 17 सीटों में एनडीटीवी पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक से सत्तारूढ़ टीआरएस को 12, कांग्रेस को 2, बीजेपी को 1 और अन्य के खाते में 1 सीट जाते दिखाई दे रही है.  साल 2014 के लोकसभा चुनाव में टीआरएस को 11, बीजेपी को 1, कांग्रेस को 2  और अन्य के खाते में 3 सीटें गई थीं.

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अगर नतीजे यही रहते हैं तो तमिलनाडु और केरल को छोड़कर कांग्रेस को किसी भी राज्य में कोई बहुत फायदा होता नहीं दिखाई दे रहा है. कर्नाटक की 28,  आंध्र प्रदेश की 25, केरल की 20, तेलंगाना की 17,  पुदुच्चेरी की 1, तमिलनाडु की 39 सीटें मिलाकर यहां पर कुल 130 सीटे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी  के वायनाड में चुनाव लड़ने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि कांग्रेस का अब पूरा फोकस दक्षिण के राज्यों में पैठ बनाने की है क्योंकि उत्तर भारत में उसे क्षेत्रीय दलों जैसे उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और बिहार में आरजेडी सहित कई अन्य पार्टियां तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में टीएमसी और ओडिशा में बीजू जनता दल से पार पाना इतना आसान नहीं होगा और उसे इन राज्यों में बीजेपी के साथ-साथ इन पार्टियों के बराबर वोटबैंक बढ़ाना होगा जो कि इतना आसान नहीं है. लेकिन दक्षिण की राजनीति में उसे संभवाना दिख रही है और यह कांग्रेस के लिए 'एक तीर से 130 निशाने' लगाने वाला दांव था. 

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