जब-जब जिस पार्टी ने किया किसानों की कर्ज माफी का किया वादा, उसने मारी चुनाव में बाजी!

कांग्रेस ने इन चुनावों के दौरान वादा किया कि उनकी सरकार बनने के बाद 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा.

जब-जब जिस पार्टी ने किया किसानों की कर्ज माफी का किया वादा, उसने मारी चुनाव में बाजी!

प्रतीकात्मक तस्वीर.

खास बातें

  • कांग्रेस ने किया था कर्ज माफ करने का वादा
  • इस साल हुए किसानों के दो बड़े आंदोलन
  • मोदी सरकार को किसानों के मुद्दे पर घेरा
नई दिल्ली:

साल 2018 में किसानों के हुए दो बड़े आंदोलनों से कांग्रेस को एक बड़ा मुद्दा मिल गया. कांग्रेस ने किसानों के मुद्दे को राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनाव में भुनाया भी. इतना ही नहीं कांग्रेस ने इन चुनावों के दौरान वादा किया कि उनकी सरकार बनने के बाद 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद कई रैलियों को संबोधित करते हुए यह वादा किया था और घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र किया गया. इतना ही नहीं कांग्रेस ने किसानों के मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना भी साधा. इसके बाद कांग्रेस ने पांच राज्यों में से राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत भी हासिल की. 

छत्तीसगढ़ में जहां कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. सोमवार को तीनों राज्यों में कांग्रेस के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे. पिछले करीब दो साल के आंकड़ें देखें तो जब-जब जिस भी पार्टी ने किसानों के कर्ज माफी का वादा किया है. उसने चुनाव में बाजी मारी है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या किसानों के कर्ज माफी का वादा पार्टियों को जीत का गारंटी देता है? क्या साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा उतना ही जोर-शोर से उठाया जाएगा?

सरकार बनने से पहले ही किसानों की कर्ज माफी की तैयारियां शुरू, राहुल ने किया था 10 दिनों में माफ करने का वादा

साल 2017 में उत्तर प्रदेश चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के कर्ज माफी का वादा किया था. इस चुनाव में भाजपा ने 400 में से 325 सीटों पर जीत हासिल की थी. सीएम योगी ने सरकार बनने के बाद 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ करने का ऐलान किया था. वहीं इसके साथ हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने किसानों से कर्ज माफी का वादा किया था. कांग्रेस को 117 सीटों में 77 सीटें मिली थीं. सरकार बनने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफी का एलान भी किया था. 

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साल 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान जेडीएस ने कर्ज माफी का वादा किया था. इसके बाद एचडी कुमारस्वामी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई. इसके साथ हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसानों से वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आती है तो उनके कर्ज का ब्याज सरकार चुकाएगी. 

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किसानों से वादे
राजस्थान में कांग्रेस ने किसानों से सरकार बनने के 10 दिनों के बाद ही कर्ज माफी का वादा किया था. साथ ही उनसे वादा किया गया था कि कृषि उपकरणों पर जीएसटी में छूट दी जाएगी. वहीं मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने कर्ज माफी के साथ ही धान का एमएसपी बढ़ाने का वादा किया था. छत्तीसगढ़ में कर्जमाफी के साथ ही धान का समर्थन मूल्य दो हजार से बढ़ाकर ढाई हजार करने का वादा किया था. वहीं तेलंगाना में टीआरएस ने किसानों से वादा किया था कि अगर दोबारा उनकी सत्ता बनती है तो रायतू बंधु स्कीम के तहत किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाले आठ हजार रुपए प्रति वर्ष को बढ़ाकर 10 हजार कर दिया जाएगा. यह राशि किसानों को खर्च के लिए राज्य सरकार की ओर से दी जाती है.

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छत्तीसगढ़ में सरकार बनने से पहले ही तैयारियां शुरू
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत के बाद राज्य शासन के अधिकारियों ने किसानों की कर्ज माफी की तैयारियां शुरू कर दी हैं. राज्य शासन के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक सहकारिता विभाग के उप सचिव पीएस सर्पराज ने संचालक संस्थागत वित्त संयोजक, राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी और प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक को पत्र लिखकर किसानों की ऋण माफी योजना को लागू करने के लिए जानकारी मांगी है. अधिकारियों से कहा गया है कि उनके अधीन कार्यरत बैंकों द्वारा किसानों को वितरित कृषि ऋण अवशेष की जानकारी 30 नवंबर की स्थिति के अनुसार उपलब्ध कराएं.

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