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गौरी लंकेश हत्याकांड के 72 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ, जारी किए ईमेल आईडी, फोन नंबर

पुलिस ने इसके लिए फ़ोन नंबर 9480800202 भी जारी किया है. साथ ही जानकारी देने के लिए पुलिस ने एक ईमेल आईडी भी जारी किया है  sit.glankesh@ksp.gov.in.

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गौरी लंकेश हत्याकांड के 72 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ, जारी किए ईमेल आईडी, फोन नंबर

गौरी लंकेश हत्याकांड के 72 घंटे बाद भी पुलिस खाली हाथ (प्रतीकात्मक फोटो)

खास बातें

  1. पुलिस ने कहा है कि अगर कोई भी जानकारी हो तो पुलिस को बताएं
  2. गौरी लंकेश की हत्या के मामले में पुलिस 'क्लूलेस'
  3. पुलिस ने जारी किए ईमेल, फोन नंबर
नई दिल्ली: गौरी लंकेश के हत्यारों के सुराग के लिए अब एसआईटी ने आम लोगों से मदद की अपील की है. 72 घंटों बाद भी हत्यारों का सुराग न मिल पाने के चलते पुलिस के हाथ खाली हैं. पुलिस ने कहा है कि अगर कोई भी जानकारी हो तो पुलिस को बताएं.

इस अफसर को मिला गौरी लंकेश की हत्या का राज खोलने का जिम्मा

पुलिस ने इसके लिए फ़ोन नंबर 9480800202 भी जारी किया है. साथ ही जानकारी देने के लिए पुलिस ने एक ईमेल आईडी भी जारी किया है  sit.glankesh@ksp.gov.in. इस बीच गौरी की मां ने एक अंग्रेजी दैनिक को दिए बयान में कहा है कि गौरी ने 2 सितंबर को अपनी बहन कविता से अपने घर के आस पास कुछ अनजान लोगों को घूमते हुए देखा था लेकिन उनसे किसी तरह के खतरे की ज़िक्र नहीं किया.

'हम डरकर नहीं हटेंगे पीछे', गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में पत्रकारों ने बुलंद की आवाज

गौरी की मां का ये भी कहना है कि क्या इन लोगों का हत्या से संबंध है या नहीं ये साफ नहीं है. मंगलवार को रात 8 बजे उनके घर में घुसकर तीन हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाई थीं. सांप्रदायिकता और कट्टरपंथी ताक़तों के ख़िलाफ़ लगातार लिखने और बोलनेवाली गौरी लंकेश की हत्या के तीन दिन बाद भी हत्यारों का कोई सुराग़ नहीं है. गौरी लंकेश के घर और आसपास की इमारतों के सीसीटीवी फ़ुटेज से आरोपियों की पहचान में जुटी पुलिस ने अब लोगों से मदद की अपील की है.

VIDEO:  क्या गौरी नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के मिशन पर थीं? 

एनडीटीवी के कार्यक्रम लेफ़्ट राइट सेंटर में निधि राजदान से बात करते हुए गौरी लंकेश के भाई इंद्रजीत लंकेश ने दावा किया है कि उन्हें नक्सलियों से धमकी मिली थी. गौरी के भाई के मुताबिक़- गौरी नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने की मुहिम की अगुवाई कर रही थीं. कुछ नक्सलियों को मुख्य धारा से जोड़ने में वह सफल भी हुई थीं, जिसकी वजह से वह नक्सलियों के निशाने पर थीं और उन्हें लगातार धमकी भरी चिट्ठी और ईमेल आते थे.


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