स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का मनीष सिसोदिया को जवाब- 'आप शिक्षा मंत्री हैं, शिक्षा के मालिक नहीं हो गए'

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, 'मैं समझता हूं कि वो बौखला गए हैं, घबरा गए हैं, परेशान हो गए हैं और जिस तरह की भाषा दिल्ली के शिक्षा मंत्री इस्तेमाल कर रहे हैं, वो शिक्षा मंत्री हैं तो ऐसा नहीं है कि वो शिक्षा के मालिक हो गए हैं.'

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का मनीष सिसोदिया को जवाब- 'आप शिक्षा मंत्री हैं, शिक्षा के मालिक नहीं हो गए'

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को जवाब दिया है. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • 4 जनवरी को दिल्ली के सरकारी स्कूलों में PTM
  • पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग को लेकर बढ़ा विवाद
  • मनीष सिसोदिया को डॉ. हर्षवर्धन का जवाब
नई दिल्ली:

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. हर्षवर्धन (Dr Harsh Vardhan) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) पर पलटवार करते हुए कहा है कि आप दिल्ली के शिक्षा मंत्री हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप शिक्षा के मालिक हो गए हैं. डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, 'मैं समझता हूं कि वो बौखला गए हैं, घबरा गए हैं, परेशान हो गए हैं और जिस तरह की भाषा दिल्ली के शिक्षा मंत्री इस्तेमाल कर रहे हैं, वो शिक्षा मंत्री हैं तो ऐसा नहीं है कि वो शिक्षा के मालिक हो गए हैं.'

दरअसल डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने गुरुवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन पर आरोप लगाया था कि वह दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 4 जनवरी को होने वाली पेरेंट्स टीचर मीटिंग रुकवाना चाहते हैं. सिसोदिया ने सख्त लहजे में कहा, 'हर्षवर्धन जी आपकी हिम्मत कैसे हो गई दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पेरेंट्स टीचर मीटिंग को रुकवाने के लिए उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखने की.'

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जिसके बाद मनीष सिसोदिया के आरोपों का जवाब देते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि दरअसल उनके घर सरकारी स्कूल टीचर एसोसिएशन के लोग आए थे, जिन्होंने यह मांग की थी कि दिल्ली में 4 जनवरी को सरकारी स्कूलों में पेरेंट्स टीचर मीटिंग है, जबकि दिल्ली में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है इसलिए इस मीटिंग को रुकवाया जाए. डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक, 'पिछले 25 साल से मेरा यही काम है कि जो कोई भी मेरे घर कोई समस्या या फरियाद लेकर आता है, मैं उसको सही जगह पहुंचा देता हूं. इस मामले में भी मैंने यही किया.'

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डॉ. हर्षवर्धन ने सवाल उठाया कि जो लोग मेरे घर आए थे वह दिल्ली के सरकारी स्कूलों के हजारों शिक्षकों के प्रतिनिधि हैं और वह लोग बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के एक सांसद और केंद्रीय मंत्री के घर आकर अपनी बात रख रहे थे. दिल्ली की सरकार के मुखिया को वह चिट्ठी लिख रहे हैं तो इसपर सरकार के लोग इतना बौखलाकर चैलेंज क्यों कर रहे हैं, इतनी घटिया बातें क्यों कर रहे हैं.

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