Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com
NDTV Khabar

निर्भया मामले में दोषियों के कानूनी दांव-पेंच से परेशान केंद्र सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

केंद्र ने कहा कि - ये तय किया जाए कि अदालत द्वारा डेथ वारंट जारी करने के बाद सात दिनों के भीतर ही याचिका दायर की जा सकती है

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
निर्भया मामले में दोषियों के कानूनी दांव-पेंच से परेशान केंद्र सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट

निर्भया केस में दोषियों के कानूनी दांव-पेंच का उपयोग करने पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है.

खास बातें

  1. कहा- मौत की सजा के मामलों में पीड़ितों को केंद्र में रखकर गाइडलाइन बने
  2. दया याचिका खारिज होने के सात दिन के भीतर डेथ वारंट जारी हो
  3. इसके सात दिनों के भीतर मौत की सजा देने का आदेश दिया जाए
नई दिल्ली:

मौत की सजा के केसों को लेकर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. केंद्र ने अपनी अर्जी में कहा है कि मौत की सजा के मामलों में पीड़ितों को केंद्र में रखकर गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए. केंद्र ने कहा है कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की जो गाइडलाइन है वह फिलहाल ‘दोषी केंद्रित' है. इसके चलते दोषी कानून से खेलते हैं और मौत की सजा से बचते रहते हैं. केंद्र सरकार ने शत्रुघ्न चौहान मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर ये अर्जी दी है.

केंद्र सरकार ने सन 2014 में शत्रुघ्न चौहान मामले में दी गई गाइडलाइन में संशोधन की मांग की है. केंद्र ने कहा है कि देश कुछ अपराधों का सामना कर रहा है जो मौत की सजा के साथ दंडनीय हैं. इस तरह के अपराधों में आतंकवाद, बलात्कार, हत्या आदि से संबंधित अपराध शामिल हैं. बलात्कार का अपराध न केवल देश के दंड संहिता में परिभाषित अपराध है, बल्कि किसी भी सभ्य समाज में सबसे भयानक और अनुचित अपराध है. बलात्कार का अपराध केवल एक व्यक्ति और समाज के खिलाफ अपराध नहीं है, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है. बलात्कार के ऐसे जघन्य और भयावह अपराधों के विभिन्न उदाहरण हैं, जिसमें पीड़िता की हत्या के समान रूप से भयानक और जघन्य अपराध शामिल हैं जो राष्ट्र की सामूहिक अंतरात्मा को हिला देता है.

केंद्र ने कहा है कि शत्रुघ्न सिंह चौहान मामले में माननीय न्यायालय ने दिशानिर्देश दिए हैं और उक्त निर्देश इस माननीय न्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से दोषी के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए जारी किए  हैं. दोषियों के अधिकारों का ध्यान रखते हुए, पीड़ितों, उनके परिवारों और बड़े सार्वजनिक हित में दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण और आवश्यक है कि वे दोषी पाए जाएं. इनसे ऐसे भयानक, क्रूर, घृणित, भयावह, भीषण और भयंकर अपराधों के दोषियों को कानून से साथ खेलने की इजाजत मिल गई है और सजा लंबी खिंच गई है.


निर्भया रेप और मर्डर केस मामले में दोषी पवन के नाबालिग होने का दावा सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अदालत पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद मौत के सजायाफ्ता के लिए क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने के लिए समय निर्धारित करे. ये तय किया जाए कि अदालत द्वारा डेथ वारंट जारी करने के बाद सात दिनों के भीतर ही याचिका दायर की जा सकती है.

निर्भया मामला: दोषी पवन के वकील को बार काउंसिल ने भेजा नोटिस, हाईकोर्ट में दिखाए थे फर्जी दस्तावेज

केंद्र ने कहा है कि देश के सभी सक्षम न्यायालयों, राज्य सरकारों, जेल प्राधिकारियों को उनकी दया याचिका को खारिज करने के सात दिन के भीतर डेथ वारंट जारी करने और इसके सात दिनों के भीतर मौत की सजा देने का आदेश दिया जाए, भले ही उसके साथी दोषियों की पुनर्विचार/ क्यूरेटिव याचिका / दया याचिका लंबित हो.

उत्तर प्रदेश: टॉफी देने के बहाने पड़ोसी युवक ने किया 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म, आरोपी गिरफ्तार

VIDEO : अब निर्भया के दोषियों को 1 फरवरी को होगी फांसी

टिप्पणियां



दिल्ली चुनाव (Elections 2020) के LIVE चुनाव परिणाम, यानी Delhi Election Results 2020 (दिल्ली इलेक्शन रिजल्ट 2020) तथा Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


 Share
(यह भी पढ़ें)... Love Aaj Kal Box Office Collection Day 4: सारा और कार्तिक की फिल्म का चौथे दिन ऐसा रहा प्रदर्शन, कमाए इतने करोड़

Advertisement