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नॉर्थ ब्लॉक के नए 'शाह' : मोदी कैबिनेट में नंबर दो पर किसका 'राज'?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी कैबिनेट कमेटियों में गृह मंत्री अमित शाह को रखा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आरएसएस के हस्तक्षेप के बाद आठ में छह कमेटियों में आए

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नॉर्थ ब्लॉक के नए 'शाह' : मोदी कैबिनेट में नंबर दो पर किसका 'राज'?

मोदी सरकार में पीएम नरेंद्र मोदी के बाद सबसे ताकतवर कौन है, राजनाथ सिंह या अमित शाह? यह सवाल चर्चा में है.

खास बातें

  1. पिछली मोदी सरकार में नंबर दो की हैसियत रखते थे राजनाथ सिंह
  2. मौजूदा मोदी सरकार में अमित शाह ताकतवर बनकर उभरे
  3. संघ हस्तक्षेप न करता तो सीमित कमेटियों में ही होते राजनाथ
नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दूसरे कार्यकाल में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि उनके कैबिनेट में नंबर दो पर कौन है? प्रधानमंत्री ने हाल में ही कई कमेटियों की घोषणा की है जिसमें दो कमेटियों को देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश के लिए उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है.

एक कमेटी है इसके लिए कि देश की अर्थव्यवस्था में निवेश कैसे लाया जाए और दूसरी कमेटी है देश में रोज़गार पैदा करने के लिए. बाकी आठ और कमेटियों की घोषणा की गई है जिसमें अपॉइंटमेंट कमेटी है, एकमोडेशन कमेटी है, इकोनॉमिक अफेयर्स कमेटी है, राजनीतिक मामलों की कमेटी है, सुरक्षा मामलों की कमेटी है... और यह सब कमेटियां एक तरह से सरकार को सही ढंग से चलाने के लिए बनाई गई हैं.

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इन सारी कमेटियों में गृह मंत्री अमित शाह सभी के सदस्य बनाए गए और नंबर दो के मंत्री माने जाने वाले राजनाथ सिंह आर्थिक मामलों की कमेटी, संसदीय कार्य, राजनैतिक मामलों की कमेटी, निवेश मामलों और नौकरी से जुड़े मामलों की कमेटी में नहीं थे. हालांकि उनको सुरक्षा के मामले वाली कैबिनेट कमेटी में जरूर रखा गया था. चर्चा है कि मोदी के इस फैसले के बाद अमित शाह ने आरएसएस से संपर्क किया और फिर संघ ने हस्तक्षेप किया. इसके बाद राजनाथ सिंह को आठ में से दो की जगह छह कैबिनेट कमेटियों में स्थान दिया गया. बीजेपी के सत्ता संघर्ष में फिलहाल राजनाथ अपनी नंबर दो की पोजीशन बचा गए हैं लेकिन उन्हें संघ का दरवाजा खटखटाना पड़ा.


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इस बीच चर्चा चलती रही कि कि नंबर दो की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के साथ ऐसा क्यों किया गया, क्योंकि पिछली सरकार में रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण इन सब कमेटियों में से अधिकतर में सदस्य थीं. इस पर भी बात हो रही थी कि अमित शाह इन सभी आठ कमेटियों के सदस्य हैं तो क्या कैबिनेट में अब वे नंबर दो की हैसियत रखते हैं?

कई जानकार मानते हैं कि रायसीना हिल्स, जो कि भारत की सत्ता का केंद्र है, के नॉर्थ ब्लॉक में एक नया शाह आया है जिसके इर्द गिर्द सत्ता की सीढ़ी घूम रही है और वह प्रधानमंत्री मोदी के बाद सबसे ताकतवर बनकर उभरा है.

अमित शाह न केवल गृह मंत्री हैं बल्कि बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं. प्रधानमंत्री मोदी के नए कैबिनेट में वे उनकी आंख और कान माने जा रहे हैं. उन्होंने अब तक जितनी भी बैठकें की हैं उनमें वे बड़े-बड़े नौकरशाहों और मंत्रियों को अपने दफ़्तर में बुलवाते हैं, साथ-साथ सभी विषयों पर चर्चा करते हैं.

कहा जा रहा है कि सत्ता के नए समीकरण में सबसे ताकतवर बनकर उभरे हैं अमित शाह. और भले ही आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री के बाद राजनाथ सिंह ने शपथ ली हो और अधिकारिक रूप से राजनाथ भले ही नंबर दो की हैसियत रखते हों, लेकिन असल में कामकाज के लिहाज़ से अमित शाह ही नंबर दो पर हैं. राजनाथ सिंह के लिए यह राहत की बात है कि उन्हें सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी में पहले ही रख लिया गया था. यह कमेटी देश की सुरक्षा, चाहे वह आंतरिक हो या बाहरी, के लिए होती है. कोई भी निर्णय, चाहे वह  देश के दुश्मन मुल्क के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का हो या देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए हो, इसी कमेटी में लिया जाता है. इसलिए इस कमेटी का सदस्य होना काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.

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हालांकि यह तो तय है कि रक्षा मंत्री होने के नाते राजनाथ सिंह को इस कमेटी में रखा ही जाना था लेकिन गृह मंत्री के रूप में अमित शाह के पास ढेरों ऐसे काम हैं जिसे आप देश की नब्ज़ भी कह सकते हैं. उनके पास कश्मीर का मामला भी है जिसके बारे में यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वहां पर अब नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा. हालांकि इस खबर की अभी तक आधिकारिक पुष्टि किसी ने नहीं की है.

सरकारी तौर पर भले ही यह कहा जाए कि राजनाथ सिंह ही कैबिनेट में नंबर दो पर हैं और प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में, यानी यदि प्रधानमंत्री विदेश जाते हैं और कोई ऐसा मामला आता है जब कैबिनेट की राय लेनी हो तो राजनाथ सिंह कैबिनेट बुला सकते हैं, उसकी अध्यक्षता भी कर सकते हैं. ऐसा मामला तब देखने को मिला था जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बीमार थे और उनकी अनुपस्थिति में कैबिनेट की बैठक प्रणब मुखर्जी ने बुलाई थी. कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्री होने के नाते उन्होंने बैठक ली थी. वे उस वक़्त विदेश मंत्री थे.

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अब तक ऐसा देखने में आया है कि  रक्षा और गृह मंत्रालय किसी के पास भी हो कैबिनेट में नंबर दो की हैसियत प्रधानमंत्री के बाद सबसे वरिष्ठ मंत्री की होती है, जिसका अनुभव सबसे अधिक हो. इस सरकार में यह तय है कि अमित शाह ही सबसे ज़्यादा पावर रखते हैं. शायद इसकी वजह उनकी प्रधानमंत्री से नज़दीकी होना हो और साथ में बीजेपी अध्यक्ष होना भी. उनकी रणनीति की वजह से बीजेपी को इस चुनाव में इतना भारी बहुमत मिला है. कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि इस सरकार में समीकरण बदल गए हैं और अमित शाह सत्ता के एक नए केंद्र के रूप में उभरे हैं. वे नॉर्थ ब्लॉक के नए शाह हैं.



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