हैदराबाद एनकाउंटर केस: CJI ने पूछा- क्या आरोपियों की गोली पुलिस को लगी थी? सरकार के वकील ने कहा- नहीं, पुलिस वाले डंडे से जख्मी हुए

सुप्रीम कोर्ट में हैदराबाद एनकाउंटर मामले पर दाखिल हुए याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम जांच के आदेश देंगे, आप सहयोग करें.

हैदराबाद एनकाउंटर केस: CJI ने पूछा- क्या आरोपियों की गोली पुलिस को लगी थी?  सरकार के वकील ने कहा- नहीं, पुलिस वाले डंडे से जख्मी हुए

सुप्रीम कोर्ट - फाइल फोटो

खास बातें

  • सुप्रीम कोर्ट में हुई हैदराबाद एनकाउंटर केस की सुनवाई
  • SC ने कहा कि हम जांच के आदेश देंगे
  • सरकार की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट में हैदराबाद एनकाउंटर मामले पर दाखिल हुए याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई. इस मामले में पूर्व जज वीएस सिरपुरकर के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन किया है. तीन सदस्यों वाले इस आयोग को छह महीने में रिपोर्ट सौंपनी है. इसके साथ ही हाईकोर्ट और NHRC की जांच पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम जांच के आदेश देंगे, आप सहयोग करें. साथ ही कोर्ट ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे हैं कि पुलिस दोषी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आपका इस घटना से क्या संबंध है. आपने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की? क्या आप हैदराबाद से हैं? इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि मैं तमिलनाडु से हूं.

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सुनवाई के दौरान सीजेआई एसए बोबडे ने तेलंगाना सरकार की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी से पूछा कि किसी को भी तथ्यों का नहीं पता? इस पर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हमें पता है. चारों को टोल प्लाजा के सीसीटीवी से पहचाना गया. चारों को गिरफ्तार किया गया. थाने के बाहर लोगों की भीड जुटी. चारों को मोबाइल व अन्य सामान बरामद करने के लिए मौके पर ले जाना था, लेकिन लोगों की भीड़ जुटने की वजह से रात में ले जाना पड़ा.

वकील मुकुल रोहतगी ने आगे बताया कि दो रिवाल्वर उन्होंने छीन ली और लोहे की रॉड, डंडे और पत्थरों से हमला कर दिया. फिर CJI ने सवाल किया कि क्या उन्होंने पिस्तौल छीनी? क्या मेडिकल रिकार्ड है? फिर वकील ने कहा, जवाब में पुलिस को गोली चलानी पड़ी. CJI का अगला सवाल था कि किस रैंक के अफसर मौके पर थे? जिस पर मुकुल ने कहा कि एसीपी, SI समेत दस पुलिस वाले थे. 

सीजेआई ने पूछा कि उन्होंने पिस्तौल से पुलिस पर फायर किया? क्या पुलिस वाले को गोली लगी? इस पर वकील ने कहा कि नहीं दो पुलिस वाले पत्थर डंडे से जख्मी हुए.  सीजेआई ने आगे पूछा कि क्या पिस्तौल की गोली बरामद हुए? इस पर वकील ने जवाब हां में दिया. उन्होंने कहा कि एक दूधवाले ने अपराध देखा था, उसने लड़की को जलते हुए देखा. पुलिस को सूचना दी. कोई भी कह सकता है कि ये फर्जी मुठभेड़ है.

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CJI ने कहा कि हम मुठभेड़ की जांच कराने की राय रखते हैं. इस मामले में कुछ तथ्यों की जांच जरूरी है. फिर वकील मुकुल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक जांच हो रही है. पुलिस कमिश्नर जो IPS अफसर हैं व अन्य अफसरों की SIT जांच कर रही है. 

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे ने कहा, इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमे का कोई नतीजा नहीं निकलेगा क्योंकि चारों अब मर चुके हैं. वे अपना मामला बिल्कुल भी प्रस्तुत नहीं कर सकते. केवल पुलिसकर्मी ही अपने सबूत देंगे. आप और अधिक निष्पक्ष रहें. ट्रायल मजाक बन जाएगा. 

CJI ने आगे कहा कि हम पुलिस कार्रवाई की जांच कराना चाहते हैं, लेकिन हम उन लड़कों की तरफ से आंख नहीं मूंद सकते जो मारे गए हैं. CJI ने यह भी कहा कि आखिर सुबह-शाम मीडिया को सबूतों के हिस्से क्यों दिखाए जा रहे हैं? इस पर वकील मुकुल ने कहा कि मीडिया को नोटिस किया जाए. कोर्ट भी मीडिया रिपोर्ट देखकर संज्ञान लेता है. फिर चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में हम मीडिया पर गैग लगाने के लिए सहमत नहीं हैं. अयोध्या मध्यस्थता में हमने ये किया था, लेकिन ये एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. इसमें मीडिया प्रभाव डाल सकता है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक जवान वेटनरी महिला डॉक्टर का रेप किया गया और हत्या कर दी गई. परिणाम में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, वो हिरासत में लिए गए. ऐसा लगता है कि पुलिस को उन्हें अपनी हिरासत में रखना मुश्किल हो गया था क्योंकि भारी संख्या में लोग थाने के बाहर जमा हो गए थे. बताया जा रहा है कि पुलिस सुबह अंधेरे में क्राइम सीन को रिकंस्ट्रक्ट करने और सामान रिकवरी के लिए उन्हें मौके पर ले गई. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आगे क्या हुआ ये इन याचिकाओं का विषय है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने मुठभेड़ की झूठी कहानी गढ़ी है कि आरोपियों ने हथियार छीनकर पुलिस पर हमला किया. पुलिस कह रही है कि उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था. चारों को सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन खुद को बचाने के लिए मुठभेड़ में मारा गया. कोर्ट ने कहा कि हम इस विचार से हैं कि राज्य की दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता. राज्य ने बताया है कि चारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है यह जाहिर है कि चारों मर चुके हैं और उनके खिलाफ ट्रायल या कार्रवाई नहीं चल सकती. हम इस मामले में ऐसा किसी ट्रायल की संभावना नहीं देखते.

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कोर्ट ने कहा कि चारों आरोपियों की मौत के मामले में जांच आयोग का गठन होगा. जांच आयोग की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सिरपुरकर करेंगे. आयोग में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रेखा बल्डोटा और सीबीआई के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेय होंगे. तीन सदस्यों के जांच आयोग का गठन 6 महीने में रिपोर्ट सौंपेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग हैदराबाद में काम करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई दूसरी अदालत या अथॉरिटी इस मामले में जांच नहीं करेगी.

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