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पीएम के मन की बात पर किसने लिखी किताब? अरुण शौरी के दावे ने पैदा किया विवाद

राजेश जैन पीएम मोदी के पूर्व सहयोगी हैं. किताब को पीएम नरेंद्र मोदी के रेडियो पर आने वाले मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की विवेचना के तौर पर दर्शाया गया.

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पीएम के मन की बात पर किसने लिखी किताब? अरुण शौरी के दावे ने पैदा किया विवाद

किताब का आवरण.

खास बातें

  1. पूर्व मंत्री शौरी ने किताब पर किया खुलासा
  2. लेखक राजेश जैन ने भी किया इनकार
  3. सरकारी साइट पर भी लेखक का नाम दिया गया है
नई दिल्ली:

पीआईबी की 25 मई को जारी एक प्रेस रिलीज ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित के खास समारोह की जानकारी दी. इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति की मौजूदगी में दो किताबों के विमोचन की बात बताई गई. इसमें एक किताबे -  राजेश जैन की 'मन की बात : रेडियो पर एक सामाजिक क्रांति' (मन की बात : अ सोशल रिवोल्यूशन ऑन रेडियो) थी. राजेश जैन पीएम मोदी के पूर्व सहयोगी हैं. किताब को पीएम नरेंद्र मोदी के रेडियो पर आने वाले मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' की विवेचना के तौर पर दर्शाया गया.

वहीं कार्यक्रम में रिलीज की गई दूसरी किताब पत्रकार उदय माहुरकार द्वारा लिखी गई थी. इसका नाम मार्चिंग विद अ बिलियन : अनालाइजिंग नरेंद्र मोदीज गवर्नमेंट इन मिड टर्म है.

बाकी सब तो सामान्य था. एक बात को छोड़कर. पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने एनडीटीवी से कहा कि राजेश जैन का मन की बात पर किताब से कोई लेना-देना नहीं था. शौरी ने कहा, राजेश जैन मेरे मित्र हैं. उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें (पुस्तक विमोचन) कार्यक्रम में घसीटा गया, एक लिखी हुई स्पीच दे दी गई जिसे पढ़ना था.


राजेश जैन ने पूर्व मंत्री के दावे को सही बताया. उन्होंने कहा कि मैं मन की बात किताब का लेखन नहीं था और लेखक के तौर पर अपना नाम देखकर आश्चर्यचकित था. मुंबई से बात करते हुए जैन ने एनडीटीवी को यह बताया. 

उन्होंने यह भी कहा कि वे ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन संस्ता के साथ काम कर रहे थे. यह संस्था किताब के विमोचन के वक्त पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम का आयोजन कर रही थी. लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि किताब से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

जैन ने बताया कि मुझे पीएमओ की ओर से कार्यक्रम में आने के लिए कहा गया. वहां पर मैंने देखा कि कार्ड में लेखक के तौर पर मेरा नाम लिखा हुआ था. कार्यक्रम में मैंने साफ कर दिया था कि मैं किताब का लेखक नहीं हूं. इसके बावजूद पीएम मोदी की साइट narendramodi.in और पीआईबी की साइट पर मेरा नाम लेखक के तौर पर लिखा हुआ है. 

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जैन का कहना है कि उन्होंने कोई अंदाजा नहीं है कि किसने किताब लिखी है और क्यों उन्हें बतौर लेखक बुलाकर खड़ा किया गया. पीआईबी की साइट पर तीन प्रेस रिलीज हैं, शायद लेखक के रहस्य को ही बता रही हैं.

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पहला रिलीज 25 मई 2017 का है, इस दिन किताब का विमोचन हुआ था. इसमें कहा गया है कि किताब राजेश जैन की है. अगले दिन दूसरा विज्ञप्ति जारी हुई जिसमें दावा किया गया कि किताब राजेश जैन ने लिखी है. तीसरा रिलीज उसी दिन शाम को जारी किया गया, इसमें लिखा गया कि किताब को राजेश जैन ने संग्रहित किया है.
 



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