गहलोत का कैबिनेट: जातीय समीकरण साधने की कोशिश, 18 पहली बार बने मंत्री, नए और अनुभवी दोनों को तवज्जो

आरएलडी के इकलौते विधायक सुभाष गर्ग को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.

गहलोत का कैबिनेट: जातीय समीकरण साधने की कोशिश, 18 पहली बार बने मंत्री, नए और अनुभवी दोनों को तवज्जो

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट.

खास बातें

  • राजभवन में 23 मंत्रियों ने ली शपथ
  • इनमें 13 कैबिनेट मंत्री और 10 राज्य मंत्री शामिल
  • अशोक गहलोत और सचिन पायलट पहले ही ले चुके शपथ
जयपुर:

राजस्थान में सोमवार को मंत्रिमंडल का गठन किया गया.  23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, इनमें 13 कैबिनेट मंत्री और 10 राज्य मंत्री शामिल हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पहले ही शपथ ले चुके हैं. आरएलडी के इकलौते विधायक सुभाष गर्ग को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. भरतपुर से जीत हासिल करने वाले गर्ग की पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर रखा था. कांग्रेस के इस कदम के पीछे साल 2019 के चुनाव के लिए उसकी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. ताकि, साथी दलों में यह संदेश जाए कि कांग्रेस अपनी साथियों को तवज्जो देती है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से रायशुमारी के बाद राजस्थान में मंत्रिमंडल के नाम तय किए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल के गठन के लिए आयोजित बैठकों में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे, कांग्रेस के पर्यवेक्षक के सी वेणुगोपाल और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी भी शामिल थे. साथ ही बताया गया कि अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य के मंत्रिमंडल गठन में ज्यादातर नए चेहरों को शामिल करने पर ध्यान केन्द्रित किया. मंत्रिमंडल में पुराने और ऐसे नए लोगों को शामिल किया गया है, जिनके पास पूर्व में मंत्री पद का कोई अनुभव नहीं है.

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गहलोत के कैबिनेट में अनुभवी और नए दोनों ही चेहरे देखने को मिले, हालांकि, पहली बार चुनकर आए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है. 23 में से 18 विधायकों को पहली बार मंत्री बनने का मौका दिया गया. कैबिनेट में केवल एकमात्र महिला ममता भूपेश को शामिल किया गया है, जिन्हें राज्य मंत्री का दर्ज दिया गया. भरतपुर के पूर्व महाराजा विश्वेंद्रसिंह ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली.

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जातीय समीकरण का रखा गया ख्याल
अशोक गहलोत के कैबिनेट के लिए नाम तय करने के दौरान जातीय समीकरण का ख्याल भी रखा गया. गहलोत के कैबिनेट में हर एक समुदाय के प्रतिनिधित्व को शामिल करने की कोशिश की गई है. इन 23 नामों में दो राजपूत, दो वैश्य (व्यापार समुदाय के सदस्य), एक मुस्लिम, चार जाट, तीन एसटी, चार एससी, तीन ओबीसी और एक गुज्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि गहलोत के पिछले कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री रहे सीपी जोशी, भरत सिंह और पूर्व स्पीकर दीपेंद्र सिंह को जगह नहीं दी गई है. 

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ये हैं कैबिनेट मंत्री
बी डी कल्ला, रघु शर्मा, शांति धारीवाल, लालचंद कटारिया, प्रमोद जैन भाया, परसादी लाल मीणा, विश्वेन्द्र सिंह, हरीश चौधरी, रमेश चंद्र मीणा, भंवर लाल मेघवाल, प्रताप सिंह खाचरियावास, उदय लाल अंजाना और सालेह मोहम्मद.

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ये हैं राज्यमंत्री
गोविंद सिंह डोटासरा, ममता भूपेश, अर्जुन सिंह बामनिया, भंवर सिंह भाटी, सुखराम विश्नोई, अशोक चांदना, टीकाराम जोली, भजनलाल जाटव, राजेन्द्र सिंह यादव और आरएलडी के सुभाष गर्ग.

(इनपुट- भाषा से भी)

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