कांग्रेस ने सचिन पायलट को पार्टी से नहीं निकाला, क्या है इसके पीछे का गणित?

Rajasthan Crisis:अकेले कांग्रेस के पास कम से कम 90 विधायक होने की उम्मीद है और दो सीपीएम विधायकों के समर्थन से गहलोत विश्वास मत जीत सकते हैं.

कांग्रेस ने सचिन पायलट को पार्टी से नहीं निकाला, क्या है इसके पीछे का गणित?

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

Rajasthan News: राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने बगावत करने वाले वरिष्ठ नेता सचिन पायलट (Sachin Pilot) के खिलाफ कार्रवाई की, जिन्होंने राज्य की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार को गिराने की कगार पर पहुंचा दिया है. 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की गहलोत सरकार के पास बहुमत से कम 100 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है. आज, कांग्रेस ने सरकार और पार्टी में सभी पदों से उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को हटा दिया. इसके साथ-साथ उनका समर्थन करने वाले दो मंत्रियों को भी सरकार से बाहर का रास्ता दिखा गया. हालांकि न तो पायलट को और न उनके समर्थकों को पार्टी से बाहर किया गया है.

माना जा रहा है कि सचिन पायलट को 17 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिसमें खुद और तीन निर्दलीय शामिल हैं. इसका मतलब यह होगा कि अगर 17 विधायकों को निष्कासित किया जाता है तो संसद के नियमों के तहत वे एक अलग मोर्चा भी बना सकते हैं और यहां तक कि BJP में भी शामिल हो सकते हैं. इसके साथ-साथ विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सरकार के खिलाफ वोट करने का भी उन्हें अधिकार होगा.

लेकिन अगर पार्टी उन्हें विश्वास मत से पहले डिस्क्वालिफाई करती है तो इससे बहुमत का आंकड़ा कम हो जाएगा, जो वर्तमान में 101 है. वहीं, अगर 17 बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया जाता है, तो बहुमत का आंकड़ा 92 तक पहुंच जाएगा. अकेले कांग्रेस के पास कम से कम 90 विधायक होने की उम्मीद है और दो सीपीएम विधायकों के समर्थन से गहलोत विश्वास मत जीत सकते हैं.

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इस स्थिति में उन्हें 10 निर्दलीय विधायकों में से किसी एक या भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो विधायकों के समर्थन की भी जरूरत नहीं होगी, जिसने कांग्रेस से समर्थन वापस ले लिया है. कांग्रेस ने पहले ही पायलट और विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है, साथ ही यह भी कहा है कि अब भी बातचीत के लिए 'दरवाजे खुले हैं.' पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को दलबदल विरोधी कानून के तहत स्पीकर द्वारा अयोग्य ठहराया जा सकता है.

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नियमों के तहत, विधायक दल के नेता को अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने के लिए अध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज करनी होती है. विधायकों को नोटिस जारी किया जाता है, जिन्हें अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए समय दिया जाता है. अंतिम निर्णय अध्यक्ष का होता है. हालांकि यह विकल्प अभी के लिए अशोक गहलोत सरकार को बचा सकता है, लेकिन सरकार के पास जो आंकड़ा रहेगा वह बहुमत के बेहद करीब रहेगा और आने वाले समय में इससे दिक्कत हो चुकी है.

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कार्यवाही पर निगाह रखने वाली भाजपा पहले ही विश्वास मत की बात कर रही है. पायलट ने रविवार को 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और कहा था कि अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है. कांग्रेस ने शुरुआत में 109 विधायकों के समर्थन का दावा किया था और फिर 107. सोमवार को हुई कांग्रेस की बैठक में 106 विधायकों ने भाग लिया था. देर रात, भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) ने कहा कि विश्वास मत के दौरान वह न तो सरकार और न ही भाजपा का समर्थन करेंगे. वहीं, आज तीन और विधायक कांग्रेस के खेमे से गायब दिखे.

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देर शाम सचिन पायलट ने अपने साथ खड़े लोगों का आभार जताया. सचिन पायलट ने ट्वीट किया, 'आज जो मेरे समर्थन में आए उनका तहे दिल से शुक्रिया व आभार. राम राम सा!

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