दक्षिण पश्चिम मानसून ने केरल में दी दस्तक, बारिश का मौसम शुरू

मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, '''दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी."

दक्षिण पश्चिम मानसून ने केरल में दी दस्तक, बारिश का मौसम शुरू

केरल में मानसून की दस्तक (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

दक्षिण पश्चिम मानसून (Southwest monsoon) के केरल में दस्तक देने के साथ ही चार महीने का लंबा बारिश वाला मौसम शुरू हो गया. मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, '''दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में दस्तक दे दी." जून से सितंबर तक चलने वाले इस मानसून की वजह से देश में 75 फीसदी बारिश होती है. मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने 30 मई को मानसून आने की घोषणा की थी लेकिन आईएमडी ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि इस तरह की घोषणा के लिए अभी स्थितियां बनी नहीं हैं.

इस बीच, दिल्ली सहित उत्तर भारत के अनेक राज्यों में रविवार को हल्की से मध्यम बारिश हुई जिससे क्षेत्र में लू से एक सप्ताह राहत मिलने के आसार हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि अरब सागर के ऊपर बना कम दबाव क्षेत्र चक्रवाती तूफान में तब्दील होकर ऊपरी पश्चिमी तट की ओर बढ़ सकता है.

दिल्ली में रातभर हल्की बारिश और दिन में भी बारिश होने से अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विज्ञानी ने अगले दो दिन में दिन का तापमान 40 डिग्री से नीचे रहने का अनुमान व्यक्त किया है. दिल्ली-एनसीआर के कई निवासियों ने आसमान में इंद्रधनुष देखा और खेल प्रेमियों ने बारिश के बाद वॉलीबॉल खेला. हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी वर्षा हुई.

भारत मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा कि एक जून से तीन जून के बीच दिल्ली-एनसीआर में तापमान 2-4 डिग्री बढ़ने की संभावना है. श्रीवास्तव ने कहा कि जून के पहले सप्ताह में उत्तर पश्चिम भारत में एक और पश्चिमी विक्षोभ की आशंका है, आठ जून से पहले इस क्षेत्र लू चलने की संभावना नहीं है. पिछले हफ्ते उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में लू चलनी शुरू हो गई थी.

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ताजा पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पश्चिमी हवाओं तथा अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र बनने से दिल्ली- एनसीआर में और नमी सकती है. आईएमडी ने कहा कि तीन जून तक उत्तर महाराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में जाने से पहले कम दबाव का क्षेत्र एक चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की आशंका है.

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