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'हिंदी विवाद' पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी

गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाने का प्रस्ताव देने वाली शिक्षा नीति के मसौदे पर तमिलनाडु में आक्रोश है.

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'हिंदी विवाद' पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी

खास बातें

  1. हिंदी विवाद पर एस जयशंकर ने कहा- कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी
  2. 'अंतिम फैसला लिए जाने से पहले राज्य सरकारों से परामर्श लिया जाएगा'
  3. हिंदी का प्रस्ताव देने वाली शिक्षा नीति के मसौदे पर तमिलनाडु में आक्रोश
नई दिल्ली:

गैर हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाने का प्रस्ताव देने वाली शिक्षा नीति के मसौदे पर तमिलनाडु में आक्रोश को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर (Subrahmanyam Jaishankar) ने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिए जाने से पहले राज्य सरकारों से परामर्श लिया जाएगा. जयशंकर की प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर टि्वटर यूजर के एक सवाल के जवाब में आयी है. जयशंकर ने ट्वीट किया, 'एचआरडी मंत्री को सौंपी गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति महज एक मसौदा रिपोर्ट है. आम जनता से प्रतिक्रिया ली जाएगी. राज्य सरकारों से परामर्श किया जाएगा. इसके बाद ही इस मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा. भारत सरकार सभी भाषाओं का सम्मान करती है. कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी.' पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज केनक्श-ए-कदम पर चलते हुए जयशंकर ने रविवार को टि्वटर पर कई सवालों और विदेश में रह रहे कई भारतीयों की मदद की अपीलों का जवाब दिया.

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बता दें कि दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर माहौल गर्म होता दिख रहा है. खासकर तमिलनाडु में हिंदी का विरोध शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि नई शिक्षा नीति के मसौदे से तमिलनाडु के लोग नाराज हैं. सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. ट्विटर पर #StopHindiImposition ट्रेंड कर रहा है. दरअसल, नई शिक्षा नीति के मसौदे में 3 भाषाएं पढ़ाने की बात हो रही है, जिसमें हिंदी भी शामिल है. इसी बात को लेकर दक्षिण में विरोध शुरू हो गया है. नेताओं और सिविल सोसायटी ने कहा कि इसे थोपा जा रहा है.

विरोध के बाद तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि 2 भाषाओं की नीति का पालन करेंगे और राज्य में सिर्फ़ तमिल और अंग्रेजी ही लागू होगी. डीएमके नेता कनीमोई ने कहा था कि हम किसी भाषा के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन हिंदी थोपने का विरोध करेंगे. वहीं अभिनेता और नेता कमल हासन ने कहा था कि किसी भी भाषा को थोपा नहीं जा सकता है. टीटीवी दिनाकरन ने कहा था कि केंद्र को ये नीति नहीं लानी चाहिए, इससे विविधता ख़त्म होगी. उन्होंने कहा था कि सरकार के इस फैसले से हम दूसरे दर्जे के नागरिक बन जाएंगे. (इनपुट:भाषा)



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